3 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्कूलों की छत से गिर रही गिट्टी और सीमेंट टपक रहा पानी . रसोईयां रसोई घर में छाता लगाकर बना रही मध्यान्ह भोजन

रसोई घर में छाता लगाकर मध्यान्ह बनाती रसोईयां

2 min read
Google source verification
रसोई घर में छाता लगाकर मध्यान्ह बनाती रसोईयां

रसोई घर में छाता लगाकर मध्यान्ह बनाती रसोईयां

छात्र और अभिभावकों ने भी बताई परेशानियां

टीकमगढ़. टीकमगढ़ विकास खंड की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं के कक्ष में छात्रों को बैठना खतरे से कम नहीं है। बारिश के समय छत से गिट्टी का गिरना और पानी का टपकना छात्रों को परेशान कर रहा है। रसोईयों को रसोई घर में मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए छाता लेकर बैठना पड़ रहा है। गनीमत यह रही कि किसी भी छात्र के ऊपर सीमेंट और गिट्टी नहीं गिरी। अभिभावकों ने ठेकेदारी की मनमानी पर आरोप लगाया है। प्रचार्य और शिक्षकों ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र के माध्यम से जानकारी दे चुके है।
जिले की ग्राम पंचायत परा, बिलौयाखेरा और बंशनखेरा की प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों के कक्ष में छात्रों का बैठना बंद हो गया है। बारिश के समय शाला की छत से सीमेंट की परते गिर रही है। दीवारों के साथ छतों से पानी टपक रहा है। यहां तक स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय त्योहार में भी शालाओं के कक्ष बंद रहे है। ढालान और मैदान में बैठकर कार्यक्रम का संचालन किया गया। अभिभावक रीवा की घटना को देखकर सभी लोग डरे हुए है। जिसके कारण अभिभावकों ने बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। सुरक्षा व्यवस्था और मरम्मत कार्य के लिए शिक्षकों ने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र के माध्यम से जानकारी भी दे चुके है। जबकि जिला शिक्षा अधिकारी ने खंडहर भवन में कक्षाएं संचालित नहीं करने के आदेश दे चुके है।

ग्रामीणों ने ठेकेदार और जिम्मेदारों पर लगाए आरोप
मौखरा गांव के बंशनखेरा निवासी अभिभावक शंकर यादव ने भवन निर्माण ठेकेदार और भवन निर्माण के उपयंत्री पर अनियमितताओं के आरोप लगाए है। उनका कहना था कि पचास वर्ष पुराने भवनों की दीवारे सुरक्षित और छतें मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन दो, पांच और १० साल पुराने भवनों से बारिश में पानी टपक रहा है। इनके निर्माण कार्य में ठेकेदार और जिम्मेदार विभाग के अधिकारियों द्वारा लापरवाही की गई है।

कक्ष में बैठना खतरे से कम नहीं है
परा गांव के माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत कक्षा सात के छात्र कैलास प्रजापति और मोहनी यादव ने बताया कि स्कूल भवन के दीवारें जीर्णछीर्ण दिखाई दे रही है। इसके अंदर बैठना किसी खतरे से कम नहीं है। बारिश के समय पढ़ाई के दौरान छतों के ऊपर से सीमेंट की परतें गिर रही है। जिसके कारण स्कूल आना कम कर दिया है।

रसोई घर में छाता लगाकर बना रहे रसोई
रसोईयां मुन्नीबाई ने बताया कि बच्चों को भोजन बनाने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। पूरे भवन में पानी टपक रहा है। रसोई में रखा आटा और भोजन की सामग्री गीली हो गई है। मध्यान्ह भोजन बनाने के लिए घंटों बैठना पड़ता है। छत से टपकने वाले पानी में गीले न हो, उस कारण से छाता लगाकर भोजना बनाने पड़ रहा है।

इनका कहना
बारिश के समय स्कूल भवन की दीवारें, छतें पानी से रिस रही है। छतों से सीमेंट की परतें गिर रही है। छतों के लोहे के तार दिखाई देने लगे है। कक्ष में छात्रों को बैठाने में परेशानियां हो रही है।
मोहन विश्वकर्मा शिक्षक परा।

मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दे चुके है। दूसरे भवन में कक्षाएं भी संचालित कर चुके है। भवन का सुधार कार्य हो जाए तो प्रत्येक कक्षा अलग-अलग लगने लगे। जिससे पढ़ाई में सुधार आएगा।
सूरज राजा, हेडमास्टर माध्यमिक शाला परा।