27 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यहां खुद बंध गया था मंदिर तोडऩे आया औरंगजेब

सेना के साथ जैसे ही यहां पहुंचा और भगवान अजितनाथ की मूर्ति पर प्रहार किया उसी क्षण वह जंजीरों से बंध गया। उसके पश्चाताप करने पर ही वह बंधनमुक्त हुआ था

less than 1 minute read
Google source verification
tikamgrah.jpg

टीकमगढ़. मध्यप्रदेश का टीकमगढ जिला कई पुरानी ऐतिहासिक इमारतों और मंदिरों के लिए विख्यात है. इनमें अतिशय क्षेत्र बंधाजी मंदिर भी शामिल है. जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर अतिशय क्षेत्र बंधाजी देश का प्रमुख जैन तीर्थ है। यह करीब 1200 से साल से भी ज्यादा प्राचीन है। यहां आचार्य विद्यासागर महाराज दो बार प्रवास कर चुके हैं।

औरंगजेब ने इस मंदिर को तोडऩे का प्रयास किया था लेकिन खुद ही मंदिर में ही बंधकर रह गया था- इतिहासकारों का कहना है औरंगजेब ने इस मंदिर को तोडऩे का प्रयास किया था लेकिन खुद ही मंदिर में ही बंधकर रह गया था। वह अपनी सेना के साथ जैसे ही यहां पहुंचा और भगवान अजितनाथ की मूर्ति पर प्रहार किया उसी क्षण वह जंजीरों से बंध गया। उसके पश्चाताप करने पर ही वह बंधनमुक्त हुआ था। तभी से इसका नाम बंधाजी पड़ा।

1000 साल से पुरानी प्रतिमा, भगवान अजितनाथ के दाएं और बाएं ओर दो प्रतिमाएं खडग़ासन में विराजमान हैं- यहां विराजमान अजितनाथ भगवान की प्रतिमा 1000 साल से ज्यादा पुरानी है। प्रतिमा पर लिखी स्वस्तिक पर चैत्र सुदी तेरस संवत 1199 ईस्वी की अंकित है। भगवान अजितनाथ के दाएं और बाएं ओर दो प्रतिमाएं खडग़ासन में विराजमान हैं। एक प्रतिमा संभवनाथ एवं दूसरी प्रतिमा आदिनाथ भगवान की हैं।