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लाल गेहूं और देसी गुड़ की बढ़ी मांग, आने लगा रजगिरा और मक्का

टीकमगढ़. संक्रांति पर्व को लेकर बाजार सजने लगा है। संक्रांति पर बनने वाले विभिन्न प्रकार के लड्डुओं के सामान के साथ ही अब बाजार में देशी गुड् और लाल (कठिया) गेहूं आने लगा है। इसकी बाजार में खासी डिमांड बनी हुई है। इसके साथ ही सर्दियों में खास पसंद किए जाने वाले रजगिरा और मक्का के लड्डुओं के सामान की भी बाजार में जमकर आवाक हो रही है।

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टीकमगढ़. बाजार में लगी दुकानें।

टीकमगढ़. बाजार में लगी दुकानें।

संक्रांति पर्व को लेकर सजने लगा बाजार

टीकमगढ़. संक्रांति पर्व को लेकर बाजार सजने लगा है। संक्रांति पर बनने वाले विभिन्न प्रकार के लड्डुओं के सामान के साथ ही अब बाजार में देशी गुड् और लाल (कठिया) गेहूं आने लगा है। इसकी बाजार में खासी डिमांड बनी हुई है। इसके साथ ही सर्दियों में खास पसंद किए जाने वाले रजगिरा और मक्का के लड्डुओं के सामान की भी बाजार में जमकर आवाक हो रही है।

संक्रांति के पर्व में अब एक सप्ताह शेष है। ऐसे में घरों में भी इसकी तैयारियां होने लगी हैं। संक्रांति के पर्व पर घरों में विभिन्न प्रकार के लड्डुओं के साथ ही अन्य खाने का सामान तैयार किया जाता है। ऐसे में घरों में महिलाओं ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है तो बाजार में भी इसका सामान आने लगा है। इन दिनों पुरानी नजाई मंडी में इसकी दुकानें खास हो गई है। सुबह से बाजार पहुंच रहे लोग इनकी खरीदारी करते दिखाई दे रहे है। इस अवसर पर क्षेत्र भर के किसान यहां पर लड्डुओं में उपयोग होने वाला सामान लेकर पहुंचने लगे हैं।

70 से 100 रुपए बिक रहा लाल गेहूं

संक्रांति पर सबसे खास तिल के लड्डू होते हैं। इसके साथ ही आटा के साथ ही रजगिरा, मक्का, लाई सहित अन्य लड्डू बनाए जाते हैं। इसके लिए लोग जहां अच्छी तिल की डिमांड कर हरे हैं तो आटा के लड्डुओं के लिए लोग लाल गेहूं तलाश करने लगे हैं। बाजार में एक-दो किसान ही यह गेहूं लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में इसके दाम भी अधिक बने हुए हैं। सोमवार को यहां पर दो किसान लाल गेहूं लेकर पहुंचे और इसकी कीमत 70 से 100 रुपए तक बताई गई। वहीं अच्छी साफ तिल 100 से 125 रुपए किलो बिक रही थी। देशी गुड़ की भी इन दिनों खास डिमांड बनी हुई है। इसकी कीमत 60 रुपए किलो बताई जा रही है।

ड्राईफू्रट के ठेले लगे

बाजार में इन दिनों ड्राईफू्रट दुकानों के साथ ही हाथ ठेलों पर बिक रहा है। संक्रांति के लिए कुछ फुटकर व्यापारियों ने इसे हाथ ठेलों पर सजा लिया है। पुरानी नजाई में यह अलग से व्यवस्था की गई है। यहां पर काजू, बाजाम, किसमिस, छुहारे के साथ ही गाद, गरी सहित अन्य चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इन दुकानों के बाजार में आने से अब संक्रांति पर्व का अहसास होने लगा है।