
ओरछा में भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह उत्सव शुरु
टीकमगढ़/ओरछा. ओरछा में भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह उत्सव शुरु हो गया है। यहां 450 साल से मिथिला की बजाय ठेठ बुंदेली परंपरा से राम विवाहोत्सव आयोजित किया जा रहा है। रविवार को होने वाली शादी के उत्सव में डूबने के लिए शहर सजकर तैयार है।
श्रीराम-जानकी विवाह महोत्सव की यह परंपरा अपने आप में अनूठी है। श्रीराम विवाहोत्सव में शनिवार को मंडप सजा। दूल्हा श्रीराम राजा सरकार को हल्दी और तेल चढ़ाया गया। पुजारी और आचार्य ने तेल-हल्दी की रस्म निभाई। राजा जनक की ओर से पं. हरिशचंद्र दुबे ने परंपरा निभाई।
श्रीराम के अयोध्या से ओरछा आगमन के साथ ही यह परंपरा शुरू हुई थी और अब तक विशुद्ध बुंदेली में परंपरा जारी है। श्रीराम विवाह ओरछा का सबसे प्रमुख महोत्सव है। स्थानीय लोग मानते हैं कि यहां पर जो भी कुछ भी है वह सब भगवान के कारण ही है। यहां से बड़ी रियासतें और मठ-मंदिर देश में हैं, लेकिन यहां जैसी दिव्यता और भव्यता और कहीं नहीं।
बुंदेलखंड की अयोध्या कही जाने वाली ओरछा नगरी इन दिनों श्रीराम-जानकी विवाह के रंग में डूबी हुई है। हर किसी को पूरे एक साल इस आयोजन का इंतजार रहता है। हो भी क्यों न, क्यों कि इसी दिन तो उनके सरकार (राजा) दूल्हा के रूप में उनके घर पहुंचते हैं और वहां पर लोगों को अपने सरकार की आरती कर आगवानी का अवसर मिलता है। इस पल के साक्षी बनने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेश से भी लोग पहुंचते हैं। ऐसे में ओरछा के तमाम होटल और लोगों के घर आगंतुकों से भर गए हैं।
खजूर का मुकुट, सवा रुपए होता है टीका
विवाह महोत्सव में भगवान की बारात पूरे नगर की परिक्रमा कर जानकी मंदिर पहुंचती है। यहां पर बारात का टीका किया जाता है। मंदिर के पुजारी हरीश दुबे बताते हैं कि परंपरा के अनुसार आज भी यहां पर दूल्हा सरकार का टीका सवा रुपए से किया जाता है। ऐसे कार्यों में सवा का बहुत महत्व होता है, इसके लिए वह 25 पैसे के सिक्के की पहले से व्यवस्था करते हैं। पांव पखराई, कन्यादान की रस्म के बाद बारात वापस चली जाती है।
कहने को तो भगवान श्रीराम राजाओं के राजा हैं, लेकिन ओरछा में होने वाले विवाह समारोह में वह भी दूल्हा सरकार के रूप में परंपरा के अनुसार खजूर का मुकुट ही धारण करते हैं। वर्तमान में आमजन भी अपने विवाह समारोह में खजूर के मुकुट का उपयोग नहीं करते है, लेकिन यहां पर भगवान आज भी खजूर का मुकुट पहन कर ही दुल्हा बनते हैं। यहां पर पारंपरिक तरीके से उनके मुकुट में खजूर की पत्तियां लगाई जाती हैं। यह शुभ माना जाता है।
Published on:
16 Dec 2023 08:14 pm
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