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मुख्यमंत्री की स्टार्टअप लीडर्स की टीम में पलेरा के मयंक शामिल

फिर उभर कर सामने आई जिले की प्रतिभा

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Mayank of Palera included in Chief Minister's team of startup leaders

Mayank of Palera included in Chief Minister's team of startup leaders

टीकमगढ़. जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ऐसी ही एक नई प्रतिभा अब पलेरा से उभर कर सामने आई है। इस प्रतिभा को प्रदेश सरकार ने अपनी स्टार्टअप फाउंडर समिति का सदस्य बनाया है। विदित हो कि प्रदेश में नए स्टार्टअप शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा 10 सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस टीम में पलेरा के मयंक प्रताप सिंह को भी चुना गया है। मयंक प्रताप सिंह अपनी कंपनी के माध्यम से युवाओं को रिमोट जॉब उपलब्ध कराते है।


टीकमगढ़ जिले के पलेरा में पढ़े-बड़े मयंक प्रताप सिंह वर्तमान में इंदौर में अपनी कपंनी चलाकर युवाओं को उनके घरों पर ही जॉब उपलब्ध करा रहे है। वह अब तक 6 हजार से अधिक युवाओं को जॉब दिला चुके है और इसमें 900 प्रदेश के युवा शामिल है। बुंदेलखण्ड जैसे पिछड़े जिले में पढ़े-बड़े मयंक प्रताप सिंह को खुद की पढ़ाई और जॉब के लिए तमाम संघर्ष करने पढ़े थे। उनका यह संघर्ष ही उनकी कंपनी की स्थापना का आधार बना। मयंक बताते है कि बुंदेलखण्ड में पढऩे के बाद जॉब नहीं है। ऐसे में युवाओं की शिक्षा बेकार जाती है, या फिर वह नौकरी के लिए महानगरों में पलायन कर जाते है। इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने कंपनी बनाई। इस कंपनी के माध्यम से मयंक 6 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ चुके है। अब मयंक प्रदेश सरकार को सलाह देंगे कि युवाओं को उनके क्षेत्र में ही रहकर किस प्रकार से रोजगार से जोड़ा जा सकता है। युवा दिवस के अवसर पर गुरुवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके इस अभिनव स्टार्टअप के लिए उनका सम्मान भी किया है।

बुढ़ापे में मां-बाप से दूर न हो बच्चें
युवाओं को उनकी स्किल के हिसाब से उसके ही स्थान पर जॉब उपलब्ध कराने वाले मयंक बताते है कि वर्तमान में सबसे अधिक समस्या यह है कि जॉब के लिए बच्चों को अपने माता-पिता से दूर जाना पड़ता है। ऐसे में मां-बाप को जब वृद्धावस्था में सबसे अधिक अपने बच्चों की जरूरत होती है तो उस समय बच्चें अपने कैरियर को लेकर महानगरों में संघर्ष करते दिखाई देते है। ऐसे में उन्होंने अपनी कपंनी शुरू की। उनका कहना था कि वह कंपनी के माध्यम से युवाओं को उनके स्किल के अनुसार जॉब उपलब्ध कराते है। वह कहते है कि यह युग डिजीटल और ऑनलाइन का युग है। ऐसे में तमाम काम ऑनलाइन किए जा सकते है। ऐसे में कंपनियों को भी कम वेतन पर अच्छे स्किल वाले युवा मिल जाते है। वहीं युवाओं को यह लाभ होता है कि वह घर पर ही अपने माता-पिता और परिजनों के बीच काम कर खुद का बेहतर भविष्य बना सकते है। वह कंपनियों एवं युवाओं के बीच सेतु का काम करते है।


मयंक द्वारा सरकार को दिए गए सुझाव
मयंक बताते है कि टीम में शामिल होने के पहले सभी तमाम युवाओं से सुझाव मांगे गए थे। ऐसे में तमाम क्षेत्रों में नए प्रयोग के साथ काम करने वाले लोगों के सुझाव के आधार पर मुख्यमंत्री के निर्देशन में 10 सदस्यीय स्टार्टअप फाउंडर समिति का गठन किया गया है। उनके द्वारा सरकार को निम्र सुझाव दिए गए थे।
- प्रदेश में रोजगार बढ़ाने के लिए यहां कॉलेज और स्कूल के स्टूडेंट्स को इंडस्ट्रियल इंटर्नशिप करवाना चाहिए। इस इंटर्नशिप की अटेंडेंस और परफॉर्मेंस को मार्कशीट में स्थान दिया जाए। ताकि मार्कशीट भी एक प्रकार से अनुभव प्रमाण पत्र का काम करें।
- छोटे शहरों और गांवों में अच्छे टैलेंट होते है। पर अवसर और गाइडेंस न मिलने से वह आगे नहीं बढ़ पाते। ऐसे प्रतिभान बच्चो को प्रदेश के स्टार्टप से मैच करना चाहिए। वो न केवल उनको अच्छी एजुकेशन बल्कि उनकी रुचि और क्षमता के हिसाब से जॉब भी दिलवा पाएंगे। मयंक मानते है कॉलेज से ज्यादा नॉलेज से फर्क पड़ता है। जो काम करने से आती है।
- भारत अवसरों का देश है। यहां अगर चाय बेचने वाला देश के प्रधानमंत्री और पेपर फेकने वाले देश के राष्ट्रपति बन सकते है, तो सही दिशा में प्रयास किया जए तो कुछ भी किया जा सकता है।