14 फ़रवरी 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एमपी में तैयार हुईं तिल की ये खास किस्में, सर्दियों में आपके दिल का रखेंगी खयाल

health: सर्दियों का मौसम आए और तिल की बात ना हो, ऐसा कैसे हो सकता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मध्य प्रदेश में तिल की ऐसी विशेष किस्में तैयार की गई हैं, जो दिल की बीमारियों से बचाएंगी। इसके साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएंगी।

less than 1 minute read
Google source verification
health

Health News: जिले के कृषि महाविद्यालय ने तिल की 6 ऐसी नई किस्मों को तैयार किया है, जो दिल के रोग से लड़ने व रोगप्रतिरोधी क्षमता भी बढ़ाएगी। इन विशेष किस्मों से तैयार फसलों में मौसमी बीमारियों का खतरा भी कम होगा। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमके नायक ने बताया कि दस वर्ष के अनुसंधान के बाद डॉ. एनएल यादव एवं डॉ. एके मिश्रा ने इनको तैयार किया। विशेष गुणों के चलते इनकी डिमांड देश-विदेश में भी है।

सेहत और कृषि दोनों में फायदेमंद

खेती में

इन किस्मों के बीज सफेद चमकीले होते हैं व प्रति एकड़ इनकी पैदावार क्षमता भी अधिक होती है। पुराने तिल में रोग जल्दी लगने लगे थे, नई वैरायटी में आसानी से कीड़ा या बीमारी नहीं होती।

सेहत में

अनसेचुरेटेट फैट व सिंगल कार्बन से यह सुपाच्य है। कोलेस्ट्रॉल कम होने से यह हृदय के लिए लाभदायक। इसके उबाल का मान बहुत अधिक है। खाना पकाने से स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर नहीं होता।

यह किस्में की गई तैयार

टीकेजी-21

यह सफेद चमकदार तिल होता

पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड पीयूएफए 55.6%

फसल अवधि 75-77 दिन

यह बीज फाइटोप्थोरा रोग, बैक्टीरियल लीफ स्पॉट, अल्टरनेरिया, फैलोडी लीफ कर्ल एवं स्टेम ब्लाइट रोगों के लिए प्रतिरोधी

उर्वरक उपयोग के प्रति प्रतिक्रियाशील

उपज क्षमता 950 किलो प्रति एकड़

टीकेजी-22

यह सफेद बोल्ड एवं चमकदार तिल

पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड 53.3%

फसल अवधि- 78 दिन

यह बीज मैक्रोफोमिना स्टेम रॉट, एंटिगैस्ट्रा एवं फाइटोप्थोरा रोगों के लिए प्रतिरोधी होता है

उपज क्षमता 650-700 किलो प्रति एकड़