
Health News: जिले के कृषि महाविद्यालय ने तिल की 6 ऐसी नई किस्मों को तैयार किया है, जो दिल के रोग से लड़ने व रोगप्रतिरोधी क्षमता भी बढ़ाएगी। इन विशेष किस्मों से तैयार फसलों में मौसमी बीमारियों का खतरा भी कम होगा। कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमके नायक ने बताया कि दस वर्ष के अनुसंधान के बाद डॉ. एनएल यादव एवं डॉ. एके मिश्रा ने इनको तैयार किया। विशेष गुणों के चलते इनकी डिमांड देश-विदेश में भी है।
इन किस्मों के बीज सफेद चमकीले होते हैं व प्रति एकड़ इनकी पैदावार क्षमता भी अधिक होती है। पुराने तिल में रोग जल्दी लगने लगे थे, नई वैरायटी में आसानी से कीड़ा या बीमारी नहीं होती।
अनसेचुरेटेट फैट व सिंगल कार्बन से यह सुपाच्य है। कोलेस्ट्रॉल कम होने से यह हृदय के लिए लाभदायक। इसके उबाल का मान बहुत अधिक है। खाना पकाने से स्वास्थ्य पर कोई विपरीत असर नहीं होता।
टीकेजी-21
यह सफेद चमकदार तिल होता
पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड पीयूएफए 55.6%
फसल अवधि 75-77 दिन
यह बीज फाइटोप्थोरा रोग, बैक्टीरियल लीफ स्पॉट, अल्टरनेरिया, फैलोडी लीफ कर्ल एवं स्टेम ब्लाइट रोगों के लिए प्रतिरोधी
उर्वरक उपयोग के प्रति प्रतिक्रियाशील
उपज क्षमता 950 किलो प्रति एकड़
टीकेजी-22
यह सफेद बोल्ड एवं चमकदार तिल
पॉली अनसेचुरेटेड फैटी एसिड 53.3%
फसल अवधि- 78 दिन
यह बीज मैक्रोफोमिना स्टेम रॉट, एंटिगैस्ट्रा एवं फाइटोप्थोरा रोगों के लिए प्रतिरोधी होता है
उपज क्षमता 650-700 किलो प्रति एकड़
Updated on:
30 Sept 2024 02:53 pm
Published on:
30 Sept 2024 02:50 pm
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