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खंडहर स्कूलों को खाली कराने और बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पढ़ाने का नहीं किया प्रयास

मातौल की कछयात का स्कूल

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मातौल की कछयात का स्कूल

मातौल की कछयात का स्कूल

सैकड़ों की संख्या में स्कूलों की दीवारें और छतें खा गई दरक, फिर भी बच्चों की सुरक्षा को लेेेकर नहीं किए नए

टीकमगढ़. जिले में जर्जर प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की संख्या सैकड़ों में पहुंच गई है। इन दिनों शासकीय स्कूलों की स्थिति वर्तमान में अत्यंत दयनीय है। स्कूल भवनों की दीवारों में दरारें आ गई है और छते भी चटक गई है। शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने अभी तक जर्जर हो रहे स्कूल भवनों की ओर किसी प्रकार का ध्यान नहीं दिया है। इसके चलते छात्र इन जर्जर भवनों में ही पढाई करने के लिए मजबूर है। हालांकि जिम्मेदार विभाग ने १२ अगस्त को एक पत्र जरुर जारी किया है। उसमें लिखा है कि वीसी में दिए गए निर्देश अनुसार जीर्णशीर्ण शालाओं में अध्यापन कार्य नहीं किया जाए। लेकिन वहां तक जिम्मेदार पहुंचे नहीे है। वह जीर्णशीर्ण भवनों की जानकारी देने से कतरा रहे है। बच्चों को लेकर इनकी सजकता और चिंता स्पष्ट दिखाई दे रही है।
वरिष्ठ कार्यालय में बैठे अधिकारी अधिकारी और क्षेत्र का जिम्मा संभाल रहे कर्मचारी बच्चों की सुरक्षा को लेकर बढे-बढ़े दावे तो अक्सर कर रहे है, लेकिन उस दावे पर अमल बहुत ही कम किया जा रहा है। जहां शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक स्कूलों की स्थिति पुराने जमाने के फि ल्मों में दिखाई जाने वाली खंडहर से भी बत्तर हो चुकी है। दरअसल कई भवन की स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि उसकी छत कभी भी गिर सकती है और कभी भी दुर्घटना हो सकती है। हालात यह है कि भवन कभी भी जमींदोज हो सकता है, लेकिन शिक्षा केंद्र की लापरवाही से आज भी छात्र इसी जर्जर भवन के नीचे बैठकर पढऩे के लिए मजबूर है। शिक्षक और बच्चें खतरे की आशंका को देखते हुए नया भवन बनवाने के लिए गुहार भी कर चुके है।

के स एक
जतारा जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत बर्मामांझ की प्राथमिक शाला पूरी तरह से खंडहर हो चुकी है। उसकी छत का सीमेंट गिर रहा है। शिक्षा केंद्र अधिकारी द्वारा बताया गया कि इस स्कूल में कक्षाएं संचालित नहीं की जा रही है। पत्रिका की टीम ने ८ अगस्त को निरीक्षण किया था तो उसमें कक्षाएं संचालित हो रही थी।

केस दो
बल्देवगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मातौल की प्राथमिक और माध्यमिक शाला कछयात गांव का स्कूल खंडहर में तब्दील हो गया है। ढालान का फर्श भी कई स्थानों से टूट गया है। बच्चों को बैठने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं है। विभाग के अधिकारियों द्वारा नया भवन बनाने के लिए जगह को चिन्हित किया गया है, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।

केस तीन
टीकमगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत मौखरा के बंशनखेरा निवासी अभिभावक शंकर यादव ने बताया कि पचास वर्ष पुराने भवनों की दीवारे सुरक्षित और छतें मजबूत दिखाई दे रही है, लेकिन पांच और १० साल पुराने भवनों से बारिश में पानी टपक रहा है। बंशनखेरा के स्कूल में बच्चों की पढ़ाई करवाना खतरे से कम नहीं है।

केस चार
परा गांव के माध्यमिक विद्यालय की दीवारें जीर्णशीर्ण दिखाई दे रही है। इसके अंदर बैठना किसी खतरे से कम नहीं है। बारिश और पढ़ाई के समय छतों के ऊपर से सीमेंट की परतें गिर रही है। जिसके कारण स्कूल आना कम कर दिया है।

केस पांच
शाला में पदस्थ प्रधान अध्यापक लक्ष्मण यादव ने बताया कि ग्राम पंचायत मलगुवां में बने शासकीय प्राथमिक शाला की हालत काफ ी खराब है। यहां पर बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है। ऊपर से प्लास्टर उखडक़र नीचे गिर रहा है। यह बच्चों के ऊपर गिरने का डर बना रहता था। भवन की हालत देखते हुए गांव के लोग अपने बच्चों को पढ़ाई करने के लिए नहीं भेजते है।

केस छह
प्रधान अध्यापक राम बिहारी राजपूत ने बताया कि चंदेरी माध्यमिक शाला की १० साल पुरानी छत गिरकर ध्वस्त हो गई है। स्कूल में रखी किताबें खराब हो गई है। गनीमत यह रही कि यह छत रात्रि के दौरान गिरी है। जिसके कारण बड़ा हादसा टल गया है। संकुल प्राचार्य और स्कूल प्रबंधन ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है।

केस सात
बम्होरीकलां में शासकीय विद्यालय है, जिसका निर्माण वर्ष २०११-१२ में ६५ लाख रुपए की लागत से हाउसिंग बोर्ड के योजना से किया गया था, लेकिन उसकी कुछ ही साल में दीवारंे दरक खा गई थी। ग्रामीणों के विरोध पर संबंधित विभाग के अधिकारी निरीक्षण करने आए। ६५ लाख रुपए निर्माण किए गए भवन को डेड घोषित किया गया। उसके बाद भी कक्षाएं संचालित की जा रही है।