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उमा भारती के बड़े भाई स्वामीप्रसाद लोधी का निधन, सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

उमा भारती के बड़े भाई स्वामीप्रसाद लोधी का निधन, सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

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उमा भारती के बड़े भाई स्वामीप्रसाद लोधी का निधन, सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

भोपालः मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा से जल संसाधन मंत्री उमा भारती के बड़े भाई स्वामीप्रसाद लोधी का करीब 9 साल लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। उनका इलाज दिल्ली के AIIMS में चल रहा था। भारतीय जनता पार्टी से एक बार विधायक और मध्य प्रदेश खाध्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रह चुके स्वर्गीय लोधी का अंतिम संस्कार उनके गृह नगर मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में सोमवार सुबह किया जाएगा।

भाजपा को दीं कई सेवाएं

मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को स्थापित करने वालों में शुमार स्वामी प्रसाद लोधी ने लंबे समय भाजपा को सेवाएं दी है। पार्टी में हमेशा ही अग्रणी रहे लोधी भाजपा से विधायक और मध्य प्रदेश खाध्य आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके मृत्यु की जानकारी लगते ही प्रदेश समेत देशभर के पक्ष विपक्ष के नेताओं समाजसेवियों में शौक की लहर दौड़ गई है। बता दें कि, रविवार सुबह 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

उमा भारती ने बताया आइडियल

72 वर्षीय बड़े भाई के बारे में बताते हुए मंत्री उमा भारती ने कहा कि, मेरे लिए उनकी भूमिका माता-पिता के सलमान थी। मुझसे 14 वर्ष बड़े होने के चलते भी उन्होंने इस भूमिका को निभाया। मंत्री भारती ने कहा कि, उन्होंने मुझे हमेशा बहादुर बनने की प्रेरणा दी। यह बात मुझे आजीवन याद रहेगी। अपने गुरु श्री पेजावर स्वामी जी के दर्शन करने गईं उमा भारती अपनी तीर्थ यात्रा समाप्त करके हिमालय से सीधे टीकमगढ़ के लिए रवाना हो गईं हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए बताया कि, सोमवार को वह टीकमगढ़ पहुंच जाएंगी, जिसके बाद ही उनके अंतिम संसकार का समय निर्धारित होगा।

हिमालय यात्रा पर थीं उमा

बता दें कि, मंत्री उमा भारती अब तक तीन दिवसीय दौरे पर हिमालय गईं हुईं थीं। जहां उन्होंने हरिद्वार से गंगा स्नान कर के अपने गुरू उडुपी मठ के श्री पेजावर स्वामी जी को प्रणाम कर के द्वितीय केदार - श्री मदमहेश्वर के लिए रवाना हुईं थी। वहां के बारे में उन्होंने बताते हुए लिखा था कि, हिमालय में पांच केदार हैं, जिसमें प्रथम केदार - केदारनाथ, फिर मदमहेश्वर द्वितीय केदार, तुंगनाथ तृतीय केदार, रूद्रनाथ चतुर्थ केदार एवं कल्पेश्वर पांचवें केदार हैं। इन सभी के दर्शन को निकली भारती को अपनी यात्रा को समाप्त करके लौटना पड़ रहा है।