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स्वीकृति के इंतजार में गुजरे पांच साल , फाइलों में दब गया बनास में गहलोद रपट का प्रस्ताव

बनास नदी पर बनने वाले तीनों रपट पर किसी का ध्यान नहीं है। ऐसे में लोगों को पत्थरों के बीच उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना पड़ रहा है।

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Banas River

टोंक. जिला मुख्यालय को कम दूरी पर तीन उपखण्ड के दर्जनों गांवों को सीधे जोडऩे वाले बनास नदी स्थित गहलोद रपट के लिए प्रस्तावित योजना दफ्तर दाखिल हो गई।

टोंक. जिला मुख्यालय को कम दूरी पर तीन उपखण्ड के दर्जनों गांवों को सीधे जोडऩे वाले बनास नदी स्थित गहलोद रपट के लिए प्रस्तावित योजना दफ्तर दाखिल हो गई। इस प्रस्ताव पर ना तो सार्वजनिक निर्माध विभाग गम्भीर है और ना ही जनप्रतिनिधि।

ऐसे में प्रतिदिन टोंक आने वाले दर्जनों गांवों के हजारों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि सार्वजनिक निर्माण विभाग ने बनास की पहली रपट से सर्किट हाउस तक 625 लाख रुपए की सडक़ का निर्माण करा दिया है, लेकिन बनास नदी पर बनने वाले तीनों रपट पर किसी का ध्यान नहीं है।

ऐसे में लोगों को पत्थरों के बीच उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में गहलोद मार्ग बंद हो जाता है। ऐसे में टोडारायसिंह, पीपलू तथा मालपुरा उपखण्ड का सीधा सम्पर्क भी जिला मुख्यालय से कट जाता है।

रपट निर्माण के लिए सितम्बर 2013 में ही सार्वजनिक निर्माण विभाग ने मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा था। इसे मंजूरी भी मिल गई, लेकिन वित्तीय स्वीकृति आज भी अटकी हुई है। इसके चलते इस मार्ग के लोग बरसात के दिनों में जिला मुख्यालय से सीधे तौर पर कट जाते हैं। उन्हें टोंक आना हो तो 80 किलोमीटर का अलग से चक्कर लगाना पड़ता है, या फिर जान जोखिम में डालकर नदी में नाव के सहारे आना पड़ता है।

कोई नहीं दे रहा ध्यान
बनास नदी की रपट पर हर साल भरने वाले पानी से ग्रामीण क्षेत्रों का जिला मुख्यालय से सम्पर्क कट जाता है। इसके चलते सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस पर पुल व सडक़ बनवाने के लिए 25 करोड़ का प्रस्ताव बनाया था। तीन साल गुजर गए, लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।

प्रस्ताव के अनुसार बहीर से गहलोद घाट तक बड़े रपट के नीचे पानी निकासी के लिए बीस बड़े पाइप तथा दो छोटे रपट पर दस-दस बड़े पाइप रखे जाना है। ये प्रस्ताव पहले तो विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के कारण अटक गया। बाद मेें लोकसभा चुनाव आ गए। इससे प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिल पाई। बाद में मंजूरी मिली तो वित्तीय स्वीकृति जारी नहीं की गई।


पांच हजार लोगों का रहता है आवागमन
बनास नदी के गहलोद घाट क्षेत्र में बने तीन रपट पर हर साल बारिश के दौरान पानी में डूब जाते हैं। इससे आवागमन ठप हो जाता है। जीप व बाइक सहित अन्य वाहनों का आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है।

इससे टोंक से टोडारायसिंह, मालपुरा, डिग्गी, नानेर, झिराना, गहलोद, व पीपलू सहित अन्य गांवों व कस्बों के लोगों को वैकल्पिक मार्गों से लम्बा सफर तय करना पड़ता है। इसमें लोगों के समय व धन की बर्बादी होती है। जबकि इस मार्ग से सम्बन्धित गांवों व कस्बों से प्रतिदिन पांच हजार से अधिक लोगों का आवागमन रहता है।

स्वीकृति नहीं मिली
स्वीकृति में ही काम अटका हुआ है। ये मिलती है तो जल्द ही कार्य शुरू कराएंगे। इससे लोगों को आवागमान में सुविधा मिलेगी।
हरिश आहुजा, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, टोंक।


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