
प्रशासन की टीम की नहीं टूट रही है नींद, खेल स्टेडियम की टूटी दीवार ने खोली अवैध खनन की पोल
टोंक. सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भले ही जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को भेजी रिपोर्ट में बनास नदी में बजरी खनन पर अंकुश के दावे किए हो, लेकिन इन दावों की मंगलवार सुबह बजरी से भरे ट्रैक्टर-टॉली ने पोल खोल दी। इस ट्रैक्टर-टॉली ने जिला अम्बेडकर खेल स्टेडियम की करीब 100 फीट दीवार को तोड़ दिया।
प्रशासन को सूचना मिलने के बावजूद एक भी कारिंदा बजरी पर कार्रवाई करने नहीं पहुंचा। वहीं मामले में शिकायत करने गए जिला खेल अधिकारी मुकेश शर्मा को उक्त बजरी मंगवाने वाले ने धमकी तक दे दी। मकान निर्माण कराने वाला स्वयं को कांस्टेबल बता रहा था।
इतना ही नहीं मामले को दबाने के लिए उक्त कांस्टेबल ने वर्दी में दो पुलिस कर्मीभी बुला लिए। तीनों ने मिलकर दीवार तोडऩे का उलाहना दे रहे जिला खेल अधिकारी और वहां अभ्यास तथा शारीरिक व्यायाम करने आए खिलाडिय़ों व लोगों को धमका कर चुप कर दिया।
जबकि पुलिस का काम अवैध खनन पर अंकुश लगाना भी है, लेकिन धड़ल्ले से पुलिसकर्मी ही बजरी से भरे वाहन मंगवा रहे हैं। सम्भवता ये बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली बनास नदी से पुलिस अधीक्षक तथा जिला कलक्टर कार्यालय के सामने से ही खेल स्टेडियम तक पहुंची है।
नजदीक ही पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय भी है, लेकिन बजरी के इस अवैध परिवहन पर कहीं पर भी रोक नहीं लग पाई। नतीजा निकला कि जिला खेल स्टेडियम की 100 फीट दीवार तोड़ दी गई। अब खेल विभाग ही इस क्षति की भरपाई करेगा। मामले में जिला खेल अधिकारी मुकेश शर्मा ने मकान निर्माण करने तथा स्वयं को कांस्टेबल बताने वाले रामसहाय गुर्जर के खिलाफ स्टेडियम की दीवार तोडऩे की प्राथमिकी पुरानी टोंक थाने में दी है।
सरकार में हैं देख लेंगे...
सुबह दीवार तोडऩे के बाद मौके पर पहुंचे जिला खेल अधिकारी ने मकान निर्माण करने वाले रामसहाय को उलाहना दिया। खेल अधिकारी ने बताया कि उसे दीवार तोडऩे का मलाल तक नहीं हुआ, बल्कि वह धमकाने लगा। साथ ही कहा कि सरकार में है... कुछ नहीं होगा। दीवार की मरम्मत स्वयं ही करा लो। इस दौरान वहां शारीरिक व्यायाम कर रहे लोगों ने सकारी सम्पति का नुकसान करने का हवाला दिया तो दो कांस्टेबल बुलाकर उन्हें भी वहां से रवाना कर दिया गया।
प्रशासन नहीं चाहता लगे रोक
प्रशासन चाहे तो बजरी खनन पर अंकुश लग सकता है, लेकिन ढीलाई के चलते इस पर रोक नहीं लग रही है। प्रशासन के पास बजरी पर अंकुश लगाने के लिए कई आंखें हैं। शहर के हर चौराहे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी इनकी मदद नहीं ली।
स्टेडियम के समीप बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली घंटाघर व बमोर गेट होते हुए पहुंची होगी। इसके अलावा छावनी, बस स्टैण्ड से कृषि उपज मंडी के सामने से भी स्टेडियम गई है तो यहां भी कई कैमरे लगे हुए हैं, लेकिन प्रशासन ने कभी इनकी मदद नहीं ली। इसके चलते शहर में बजरी से भरे वाहन दौड़ रहे हैं।
पुलिस गश्त भी सो रही थी
यूं तो शहर में चौबीस घंटे पुलिस की जा रही है। हेलमेट नहीं होता पुलिसकर्मी कब आ पकड़े, इसका पता नहीं चल पाता है, लेकिन शहर में दौड़ रहे बजरी से भरे वाहन पुलिस गश्त को नजर नहीं आ रहे हैं। इससे ये लग रहा है कि पुलिस कागजों में हो रही है या पुलिस भी शहर में सो रही है।
दूसरी ओर सवाल ये है कि पुलिसकर्मी अकेले बजरी से भरे वाहनों पर कार्रवाई नहीं कर सकते, लेकिन वे इन वाहनों को रोक कर जिला कलक्टर की ओर से बनाई गई टीम को सूचना तो दे सकते हैं, लेकिन नवम्बर 2017 से लेकर अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि टीम ने समन्वय बैठाकर कार्रवाईकी है। दबाव के बाद ही कार्रवाईकी गई है।
जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का...
शहर में ‘जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का’ कहावत प्रशासन पर ही चरितार्थहो रही है। खनन पर लगे प्रतिबंध से ही खेल स्टेडियम के समीप तीन सरकारी भवन तैयार हो गए, लेकिन कभी खनिज विभाग तथा प्रशासनिक टीम ने ये नहीं पहुंचा कि निर्माण सामग्री वाली बजरी कहां से आ रही है। इसमें अम्बेडकर सामूदायिक भवन तथा पुलिस उपाधीक्षक कार्यालय भी शामिल है। समीप ही बस स्टैण्ड का निर्माण व सुलभा शौचालय भी बन कर तैयार हो गया है।
Published on:
02 Oct 2019 03:42 pm
बड़ी खबरें
View Allटोंक
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
