1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

video: सांसद का 15 दिन का वादा 205 दिन गुजरजाने के बाद भी नही हो पाया पूरा

सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने गत जुलाई 2017 को टोंक के केन्द्रीय बस स्टैण्ड का 15 दिन में कायाकल्प करने का वादा किया था।  

2 min read
Google source verification
 केन्द्रीय बस स्टैण्ड

टोंक. सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने गत जुलाई 2017 को टोंक के केन्द्रीय बस स्टैण्ड का 15 दिन में कायाकल्प करने का वादा किया था।

टोंक. जनप्रतिनिधियों के निर्देशों की पालना करने के प्रति अधिकारी कितने गम्भीर है। इसका अंदाजा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है कि सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने गत जुलाई 2017 को टोंक के केन्द्रीय बस स्टैण्ड का 15 दिन में कायाकल्प करने का वादा किया था। इस दौरान उन्होंने बस स्टैण्ड के बदतर हालत का निरीक्षण करते समय सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश भी दिए थे, लेकिन 205 दिन बाद भी बस स्टैण्ड के हालात नहीं सुधरे हैं।।


तब यह कहा था

गत 15 जुलाई को बस स्टैण्ड का निरीक्षण करने के बाद सांसद ने कहा था कि टोंक के बस स्टैण्ड सुविधाओं का काफी अभाव है। यहां व्याप्त अव्यवस्थाओं और गंदगी को देख कर कोई भी यात्री आता होगा तो टोंक के प्रति संदेश लेकर जाता होगा, इसलिए अब टोंक के बस स्टैण्ड का 15 दिन में कायाकल्प किया जाएगा। और साथ ही इसकेविकास के लिए राज्य के परिवहन मंत्री से बात करने को भी कहा था।

अब हालात यह
बस स्टैण्ड की सडक़ गड्ढों में तब्दील है। वहीं परिसर में एपीआरआई के पास वाले गेट के समीप पानी भरने वाली जगह पर मिट्टी डाली गई है। ऐसे में बस स्टैण्ड का कायाकल्प छोड़ सुविधाएं जुटना भी दूर की बात नजर आता है। यहां अभी नाली निर्माण कार्य ही हुआ है।

प्लेटफार्म पर और गायों का विचरण करना आम बात है। गंदगी की हर जगह भरमार है। परिसर में यात्रियों के बैठने के लिए घास लगाया जाना तो दूर यहां पौधों को पूरा पानी भी नहीं मिल पा रहा है, जबकि अभी गर्मी का मौसम नहीं आया है।

शुरुआत में ही मिली थी मिलावट
अगस्त 2017 में सांसद के निरीक्षण के दौरान मिलावट का मामला सामने आया था। सीमेन्ट में अधिक मात्रा में बजरी मिलने पर सांसद ने टाइल्स उखाड़ कर वापस लगाने के मौके पर जेईएन फतेह चंद को लताड़ लगाते हुए निर्देश दिए थे। इस दौरान जेईएन ने यह करते हुए स्वयं का बचाव किया कि यह उसका क्षेत्र नहीं है। इसके बाद टाइल्स को उखाड़ कर वापस लगाया गया था।

बस स्टैण्ड का कायाकल्प करने की बात सांसद ने यहां निरीक्षण के दौरान कही थी, लेकिन अभी यहां सिर्फ नालियां बनी है। स्टैण्ड के विकास में क्या-क्या होना है, इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। कुछ लोगों से टेण्डर होने के बारे में सुना है।
राजेन्द्र कुमार, आगार प्रबंधक, टोंक