
मालपुरा न्यायालय परिसर में आयोजित लोक अदालत में विवाद के निस्तारण के बाद एक-दूसरे को माला पहनाते दम्पती
देवली. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर शनिवार को सिविल न्यायधीश व न्यायिक मजिस्टे्रट मनोज कुमार निमौरिया की मौजूदगी में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन हुआ। इसमें मजिस्टे्रट व अधिवक्ताओं के प्रयास से दो पारिवारिक मामलों का निस्तारण किया गया।
मामले के तहत लोक अदालत में दो वर्षों से पति-पत्नी के मध्य चल रहे पारीवारिक विवाद को निपटारा किया गया। मामले के अनुसार सलमा बानो निवासी देवली ने पति मोहम्मद हुसैन व अन्यों के खिलाफ न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया था। इसमें बताया कि गत 1 दिसम्बर 2010 को उसका विवाह ब्यावर निवासी मोहम्मद हुसैन से हुआ।
शादी के कुछ समय बाद ही पति-पत्नी में वैचारिक मतभेद हुआ। इसके चलते सलमा अपने पति को छोडकऱ देवली आ गई तथा पति समेत अन्य पर घरेलू हिंसा करने, अपने नाबालिग बच्चों के भरण पोषण के लिए 20 हजार रुपए प्रतिमाह की मांग रखी थी।
इस पर लोक अदालत में मजिस्ट्रेट मनोज कुमार निमौरिया व अधिवक्ता महावीर सिंह राठौड़, बद्रीप्रसाद, प्रियंका विजन ने समझाया। इसके बाद सलमा व हुसैन मतभेद भुलाकर पुन: साथ रहने के लिए राजी हो गए। इस पर अधिवक्ताओं ने माला लाकर एक-दूसरे को दी।
जहां अदालत पैनल के समक्ष दोनों ने माला पहनाकर साथ रहने का संकल्प लिया। इसी प्रकार हेमराज मीणा निवासी निवारिया व उसकी पत्नी शिमला मीणा निवासी टोडा का गोठड़ा थाना दूनी के बीच चल रहे पारिवारिक मामलें का निस्तारण किया गया।
मामले के अनुसार पति-पत्नी में मतभेद के चलते शिवराज ने शिमला के खिलाफ सिविल न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया था। इसमें बताया कि शिमला 14 अक्टबूर 2016 को घर छोडकऱ पिता के यहां चली गई। उसे लाने के लिए पति ने सामाजिक स्तर पर सभी प्रयास किए, लेकिन वह नहीं मानी।
उक्त प्रकरण का भी लोक अदालत में समझाकर निस्तारण किया गया। इस पर दोनों एक साथ रहने के लिए राजी हो गए। इस दौरान लोक अदालत में रखे 113 में से 27 प्रकरणों का राजीनामे से निस्तारण किया। वहीं प्री-लिटिगेशन के रूप में मामलों की सुनवाई करते हुए 25 लाख 8 हजार 309 रुपए की राशि अवार्ड पारित किया।
लोक अदालत में बैंच सदस्य व अधिवक्ता बंशीलाल कलवार, निजी सहायक यासीन अली खां, रीडर हरीश जैन, सचिव तालुका विधिक सेवा समिति पुष्पेन्द्र अग्रवाल आदि ने उपस्थित रहकर कार्य किया।
मालपुरा. लडक़े की चाह में पत्नी से चल रहे विवाद में शनिवार को न्यायालय परिसर में आयोजित लोक अदालत में पति-पत्नी के मध्य आपसी समझाइश के बाद दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई तथा साथ में ही अपना जीवन व्यतीत करने की कसमें खाई।
मामले के अनुसार अपर जिला एवं सैशन न्यायाधीश विनोद गिरी की अदालत में पिछले एक वर्ष से सोड़ा के श्रीनगर निवासी रामलाल चौधरी व पीपलू के संदेड़ा फार्म निवासी सहोदरा देवी के मध्य महज लडक़ा नहीं होने के कारण विवाद चल रहा था।
सहोदरा के कम पढ़ी लिखी होने व कोख से एक साथ दो लड़कियों के जन्म होने व पति रामलाल की सरकारी नौकरी आने से दोनों में विवाद की स्थिति पैदा हो गई। विवाद के चलते दोनों की ओर से न्यायालय में वाद दायर किया गया था तथा अपनी दो लड़कियों में से एक-एक लडक़ी को दोनों लालन-पालन करते थे।
मामले में एडवोकेट सुरेन्द्र मोहन जैन व रवि कुमार जैन ने आज लोक अदालत में अपर जिला एवं सैशन न्यायाधीश विनोद गिरी, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रशान्त चौधरी, मुंसिफ मजिस्ट्रेट सीमा चौहान की मौजूदगी में पति-पत्नि के मध्य आपसी सुलह करवाते हुए विवाद को मिटाने तथा एक साथ अपना जीवन-यापन करने के बात कहने पर दम्पती में सहमति बन गई तथा न्यायालय परिसर में ही दोनों ने एक-दूसरे का वरमाला पहनाकर दोबारा से अपना सुनहरा जीवन जीने का संकल्प लिया।
लोक अदालत में एडीजे कोर्ट में 6 2 लम्बित मामलों में से 22 का निस्तारण किया गया। जिनमें मोटर दुर्घटना के 5 मामलों में 15 लाख 45 हजार रुपए के अवार्ड जारी किए गए। प्रिलिटिगेशन के 390 मामलों में से 23 का निस्तारण कर 13 लाख 77 हजार 200 के अवार्ड जारी किए गए।
एसीजेएम की अदालत में 121 मामलों में से 14 मामलों का निस्तारण किया गया जिनमें 5 मामलें 5 वर्ष से अधिक समय के थे। मुंसिफ मजिस्ट्रेट न्यायालय में 111 मामलों में से 23 मामलों का निस्तारण किया गया।
Published on:
10 Dec 2017 09:17 am
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