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रानी पद्मनी की अस्मिता को तनिक नहीं खोने देंगे, संकल्पित है हिन्दुस्तानी, फिल्म प्रदर्शित नहीं होने देंगे’

टोंक महोत्सव के तहत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।  

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कवि सम्मेलन

टोंक में आयोजित कवि सम्मेलन में मंच पर मौजूद कवि।

टोंक. अंजुमन सोसायटी खानदान-ए-अमीरिया की ओर से टोंक महोत्सव के तहत सोमवार रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसमें देर रात तक श्रोताओं ने काव्य रस का आनंद लिया। सम्मेलन की शुरुआत राष्ट्रीय कवि प्रदीप पंवार ने टोंक महोत्सव पर ‘रसिया की छतरी गाती है इश्क की सरगम पर गीत और सुनहरी कोठी अपना सुंदर सुखी अतीत, मनमोहक जामा मस्जिद दे सद्भावी संदेश को, अन्नपूर्णा मन्दिर बोले जय गणेश उदघोष को’ सुनाकर खूब दाद पाई।

उन्होंने फिल्म पद्मावती के ज्वलन्त मुद्दे पर ‘आज भी गढ़ चित्तौड़ की धरती पर छाई खामोश उदासी है, जौहर वाली गर्म राख, नापाक रक्त की प्यासी है, न तू संजय, न तू लीला, ना कोई भंसाली है, तू हिन्दुस्तानी खून नहीं, हिन्दुस्तान की गाली है, रानी पद्मनी की अस्मिता को तनिक नहीं खोने देंगे, संकल्पित है हिन्दुस्तानी, फिल्म प्रदर्शित नहीं होने देंगे’ सुनाई तो तालियां गूंज उठी।

उन्होंने श्रोताओं के अनुरोध पर जावेद अख्तर की टिप्पणी पर राजस्थान का विरोध जताते हुए ‘रणबांकुरा राजपूताना नाम है जिसका राजस्थान, ऐसे वीर पुत्र को पाकर धन्य हो गया हिन्दुस्तान’ कविता भी सुनाई। गीतकार गोविंद भारद्वाज ने ‘तेरी अंजुरी में भर-भर कर, वेद मंत्र अक्षर-अक्षर, राधा वाली अमर कथा से तूझे करूंगा अजर अमर’ सुनाकर तालियां बटोरी।

बयाना से आए कवि जगदीश खटाणा ने ‘रंगों वाली होली खेलते हैं जब आप लोग, शत्रुओं के साथ खूनी होली खेलते हैं वो, आप जब पटाखों से मनाते हैं दीपावली का जश्न, सीने पर शत्रुओं की गोलियों से झेलते हंैं वो’, माणक चंद सौदा ने ‘आज सुनाऊं तुमको दस नार सहेली, नशा खोर है पति सभी के, विपदा सभी ने झेली, नशे की लत को मिटाओ’ सुनाकर दाद पाई।

मुम्बई से आए अजय अटपट्टू ने ‘सब देख रहे मोदी का मकान दोस्तों, खाली पड़ी है झाडू की दुकान दोस्तों, अब पाक क्या है चीन भी औकात में रहे, होने लगी है दिल्ली जवान दोस्तों’, आगरा से आई कवयित्री चेतना शर्मा ने ‘गुडिय़ा या मैं चिडिय़ा कह दूं, या वीणा के तार कहूं’ सुनाकर श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

भरतपुर के भूपेन्द्र भरतपुरी ने ‘यकीं कैसे करें बोलो किसी का, अजब किरदार देखा आदमी का’, कोटा के गौरस प्रचंड ने ‘सरहद पे दे दी जान, मगर आन जिंदा है, मातृ भूमि पर कुर्बान मगर शान जिंदा है, मर जाएंगे झुकने ना देेंगे भारती का सिर, कुर्बानियों से मेरा हिन्दुस्तान जिंदा है’ सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया।

कोटा के ओजकवि संजय शुक्ला ने ‘मोल क्या वो समझेगा, जिसने चुकाया ही नहीं’ सुनाकर वाहवाही लूटी। सम्मेेलन में खानदान-ए-अमीरिया के हामिद अली, नईम मियां, खान, मशहूर शायर डॉ. जिया टोंकी, पूर्व उपसभापति सलीमुद्दीन, जुनेद असलम, नजमुउल हसन, इकबाल हसन जुगनू, अमजदउल्ला खान, सत्यनारायण शर्मा, विनोद बैरवा, राजीव बंसल आदि ने कवियों का स्वागत किया।