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किसानों की करोड़ों की मुआवजा राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर, प्रशासन में मचा हड़कंप

Excessive Rainfall Compensation: अतिवृष्टि से 2 साल पहले खराब हुई फसलों की मुआवजा राशि आधार के लिंक में आई तकनीकी खराबी के चलते वास्तविक 647 किसानों के खातों में नहीं आई। यह राशि एक करोड़ है। यह मामला उनियारा उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के किसानों के साथ हुआ है।
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टोंक

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Akshita Deora

Apr 07, 2024

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Farmer News: अतिवृष्टि से 2 साल पहले खराब हुई फसलों की मुआवजा राशि आधार के लिंक में आई तकनीकी खराबी के चलते वास्तविक 647 किसानों के खातों में नहीं आई। यह राशि एक करोड़ है। यह मामला उनियारा उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायतों के किसानों के साथ हुआ है। एक साल बाद मामला उजागर होने से जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया है। वे अब किसानों को न्याय दिलाने के बजाए उसे दबाने में लग गया है। गम्भीर बात तो यह है कि सालभर पहले हुई एक करोड़ रुपए की गड़बड़ का जिला प्रशासन ने अब तक कुछ नहीं किया है। ना ही राशि वापस लेने के सम्बन्ध में किसी विभाग से पत्राचार किया है।

2022 में हुई थी फसल खराब
वर्ष 2022 में हुई अतिवृष्टि से प्रदेश में सबसे ज्यादा 33 फीसदी से अधिक फसल खराबा टोंक जिले में माना गया था। गिरदावरी रिपोर्ट में उनियारा तहसील के 175 राजस्व गांवों में 33 फीसदी से अधिक खराबा सामने आया था। मुआवजा फसल के हिसाब से दस से बीस हजार रुपए प्रति किसानों को तय किए थे।

पटवारी के माध्यम से भेजी थी जानकारी
राज्य सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने खराबी का सर्वे करा कर किसानों की जानकारी खाता संख्या, किसानों का नाम, भूमि का ब्यौरा, मोबाइल नंबर, आधार कार्ड की फोटो कॉपी सहित अन्य जानकारी पटवारी के माध्यम से तहसीलदार को भेजी थी। उनियारा तहसील के किसानों को तीन बार जयपुर ट्रेजरी से मुआवजा राशि खातों में डाली गई। जयपुर कोषागार से राशि डालने के बाद उनियारा तहसील के 647 किसानों के खाते में राशि नहीं आई।
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दो साल पहले हुए फसल खराबे का मुआवजा सरकार ने जारी कर दिया। लेकिन यह राशि किसानों के खाते में नहीं आई। तकनीकी खामियों के चलते यह राशि किसी अन्य के खाते में चली गई। मामले की जानकारी के बावजूद अधिकारी अनदेखी बरत रहे हैं।

यह बोले किसान
फसल मुआवजे के लिए लगातार तहसील के चक्कर लगाए हैं। हर बार राशि खाते में आने का आश्वासन मिला। लेकिन नहीं आई।
रामजी लाल बैरवा, चोरू

दो साल पहले अतिवृष्टि से फसल खराब हो गई थी। सर्वे के बाद दस्तावेज पटवारी को दिए थे। लेकिन राशि अब तक नहीं मिली।
रामकिशन धाकड़, चोरू
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फसल खराबे का सर्वे हुआ था। इसमें 33 प्रतिशत से अधिक खराबा मानते हुए मुआवजा देना तय हुआ था। लेकिन राशि ही नहीं आई।
राम प्रसाद धाकड़, किसान

ई-मित्र से चला पता
किसानों के लगातार चक्कर लगाने के बाद भी राशि नहीं आई तो वे ई-मित्र एवं अन्य संसाधनों से जानकारी जुटाई। इसमें सामने आया कि उनकी राशि एक वर्ष पहले 2023 में जारी हो चुकी है। लेकिन उनके खाते में राशि नहीं आई।