
राजमहल के बीसलपुर बांध के जलभराव में मछली शिकार के लिए दौड़ती अवैध नाव।
राजमहल. बीसलपुर बांध के जलभराव क्षेत्र में मत्स्य आखेट बंद होने के बाद भी शिकार जारी है। इसकी जानकारी मत्स्य विभाग के अधिकारियों को भी है, लेकिन कार्रवाई में लापरवाही बरती जा रही है।
उल्लेखनीय है कि हर वर्ष मत्स्य विभाग की ओर से 15 जून से 31 अगस्त तक मछलियों में प्रजनन को लेकर बांधों व नदी, तालाबों में मत्स्य शिकार पर रोक लगा दी जाती है।
इस वर्ष भी गत 8 जून से मछली के शिकार पर पूर्णतया रोक लगा दी थी। इसके बावजूद मछलियों का अवैध शिकार जारी है।
इधर, बीसलपुर बांध के जलभराव क्षेत्र में प्रशासन की ओर से बिना लाइसेंस व फिटनेस की नाव पर रोक लगा रखी है, लेकिन चोरी से मछलियों का शिकार करने वाले लोग जलभराव में अवैध नौकाओं का संचालन कर रहे हैं।
साथ ही जलभराव में बैरोकटोक अवैध जाल डालकर मछलियां भी पकड़ रहे हैं। मछलियां जयपुर, कोटा, सहित अन्य मंडियों में बिक रही है।
ये मछली का शिकार जलभराव क्षेत्र के माताजी रावता, बांध के गेट संख्या तीन के करीब, नेगडिय़ा व नापा का खेड़ा पुलिया के पास, थड़ोली, सुजानपुरा आदि क्षेत्रों में रात को अवैध जाल डालकर अलसुबह तक किया जा रहा है। मामले को लेकर मत्स्य विकास अधिकारी टोंक राकेश देव से बात करनी चाही, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
नालों की सफाई नहीं हुई
बनेठा. कस्बे में वर्षा काल के निकट आते भी ग्राम पंचायत के माध्यम से अभी नालों की सफाई का कार्य पूर्ण रूप से नहीं हुआ है।
सीनियर सैकण्डरी के समीप नाले की सफाई नहीं होने से बाजार से बस स्टैण्ड जाने वाले मुख्य मार्गो पर पानी एवं कीचड़ एकत्र है।
कांग्रेस सेवादल के पदाधिकारी मुकेश जांगिड़ ने सरपंच नरेन्द्र कुमार सैनी को पत्र प्रेषित कर वर्षा काल से पूर्व नालों की सफाई कराकर मुख्य मार्ग पर जमा कीचड़ पानी को शीघ्र हटवाए जाने के प्रबन्ध कराने की मांग की है।
रास्ते में भरा पानी बना जी का जंजाल
निवाई. ग्राम पंचायत भरथला के छापर ढाणी के रास्ते मे बड़े-बड़े गड्ढे है, जिनमे पानी भरा हुआ हैं। इससे लोगों को आने-जाने मे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरपंच एवं ग्राम विकास अधिकारी को अवगत करा दिया गया है, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई निस्तारण नहीं हुआ है।
Published on:
17 Jun 2018 09:59 am
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