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खुशखबरी: ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों का होगा विकास, डिग्गी कल्याणजी और देवधाम जोधपुरिया को भी किया शामिल

लंबे अर्से बाद कागजों में दफन पर्यटन के सपने अब साकार होंगे। राज्य सरकार ने पर्यटन विकास को लेकर प्रमुख स्थलों की घोषणा में कस्बे के प्राचीन महलों समेत जिले के धार्मिक स्थलों को शामिल किया है।

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टोंक

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kamlesh sharma

Jun 09, 2025

ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों का होगा विकास: फोटो पत्रिका

टोडारायसिंह। लंबे अर्से बाद कागजों में दफन पर्यटन के सपने अब साकार होंगे। राज्य सरकार ने पर्यटन विकास को लेकर प्रमुख स्थलों की घोषणा में कस्बे के प्राचीन महलों समेत जिले के धार्मिक स्थलों को शामिल किया है।

15 तक भेजना होगा प्रस्ताव

इसके लिए पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को कार्यकारी एजेन्सी नियुक्त किया है। इसी प्रकार टोंक जिले में निवाई स्थित भगवान देवनारायण मंदिर देवधाम जोधपुरिया को राजस्थान धरोहर घोषित करते हुए राजस्थान धरोहर प्राधिकरण (आरएचए) में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के तहत लाम्बाहरि सिंह में हरि सिंह किला एवं हरि सागर कुंड का जीर्णोद्धार तथा डिग्गी कल्याणजी तीर्थ क्षेत्र का धार्मिक पर्यटन के रूप में विकास कार्य होंगे। पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं शासन सचिव रवि जैन ने विकास कार्य के लिए स्थलवार मौका निरीक्षण कराया जाकर विस्तृत लागत, प्रस्ताव 15 जून तक पर्यटन निदेशालय को भिजवाने के निर्देश दिए है।

प्राचीन महलों में लिखी जाएगी इबारत

टोडारायसिंह रियासतकाल में निर्मित प्राचीन महल आज भी अतीत का गौरव बयां करते है। तक्षकगिरी पहाड़ी तलहटी स्थित टोडारायसिंह शहर को ऐतिहासिक धरोहरों की खान कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। यहां प्राचीन महल, मंदिर व साढ़े तीन सौ बावड़ियों समेत प्राकृतिक सौन्दर्य लिए प्राचीन जलाशय स्थित है। जोकि विशाल पत्थरों से निर्मित वास्तुकला, शिल्प व बेजोड़ता लिए प्राचीन गाथा को बयां करते है। इसमें 13 वीं सदी में सोलंकी शासकों द्वारा निर्मित महलों में लगे नौ हाथ के छज्जे आज भी दर्शकों को रिझाते है। छह मंजिल के महलों में कई हाल, कमरे व चौबारे स्थित है।

इनमें विशाल दीवाने आम, दीवाने खास और महलों के बीच कुण्ड स्थित बारहदरी (संगमरमर के बारह खम्भों पर निर्मित) स्थित है। जहां चित्रकारी व मीनाकारी का अद्भूत संगम है। अनदेखी से इनका स्वरुप बिगड़ चुका है। तीन भागों में विभाजित दौलत महल, दरबारी महल व जल महल शामिल है। उपेक्षित महलों के परकोटे में अतिक्रमण के साथ लोग दीवारों को खुर्द-बुर्द कर पत्थर चोरी कर ले गए।

महल परिसर व परकोटे में जंगी पेड़, बिलायती बबूल व झाड़ियां उग आई है। करीब 15 बीघा भू-भाग पर ऐतिहासिक महल की भव्यता व वास्तुकलां पहाड़ी तलहटी में सिमट कर रह गई है। प्राचीन महलों समेत अन्य स्थलों का पर्यटन की दृष्टि से विकास को लेकर क्षेत्रवासियों की वर्षो से मांग लम्बित थी। पर्यटन विभाग की घोषणा के बाद कागजों में दफन पर्यटन के सपने अब साकार होंगे।

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बावड़ियों में बिखरा सौन्दर्य

टोडारायसिंह कस्बे की प्राचीन बावडिय़ों की अलग पहचान है। कस्बे स्थित प्राचीन हाडी रानी कुण्ड के अलावा किंगसी बावड़ी, महल बावड़ी, जगन्नाथ बावड़ी, भोपत बावड़ी, विश्राम गृह स्थित बावड़ी, सारडा बावड़ी, भांड बावड़ी, खारी बावड़ी, मीठी बवड़ी समेत करीब साढ़े तीन सौ बावड़ी स्थित है। जिनमें मेहराबदार दरवाजे, अनगिनत सीढ़ियां, तिबारे तथा उनमें तराशकर सूर्य, चंद्रमा, हाथी- घोड़े ऊंट की उकेरी गई शिल्प हर किसी को आकर्षित करती है।

वर्षों से थी मांग, उपेक्षा में बहुत कुछ खोया

भाजपा शहर अध्यक्ष सुनील भारत ने बताया कि क्षेत्रवासियों की वर्षो से लम्बित मांग अब पूरी होगी। पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा तथा क्षेत्र के विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेगे।