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उधारी का लाइसेंस कर रहा जीवन से खिलवाड़, औषधि नियंत्रक नही दे रहे ध्यान

जिले में वर्तमान में करीब साढ़े तीन सौं अंग्रेजी दवाइयों की दुकानें संचालित है। इनमें एक तिहाई दुकानें किराए का लाइसेंस लेकर संचालित है।
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टोंक

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Pawan Kumar Sharma

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Updated: 29 Dec 2017, 1:33 PM IST

 अंग्रेजी दवा

टोंक. अंग्रेजी दवा के अनुज्ञा-पत्र(लाइसेंस) को किराए पर लेने का खेल जिले में इन दिनों खूब फलफूल रहा है।

टोंक. अंग्रेजी दवा के अनुज्ञा-पत्र(लाइसेंस) को किराए पर लेने का खेल जिले में इन दिनों खूब फलफूल रहा है। आलम यह है गांव-कस्बों में एक-दूसरे का लाइसेंस किराए पर लेकर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इतना होने के बावजूद जिले में लगे औषधि नियंत्रक ध्यान नहीं दे रहे है।

उल्लेखनीय है कि जिले में वर्तमान में करीब साढ़े तीन सौं अंग्रेजी दवाइयों की दुकानें संचालित है। सूत्रों के मुताबिक इनमें एक तिहाई दुकानें किराए का लाइसेंस लेकर संचालित है। दवा के रखरखाव से अनजान विक्रेता धडल्ले से दवा बेचने में लगे हैं।

जबकि नर्सेज भी दवा की दुकानें संचालित नहीं कर सकते। इसका कारण यह है कि दवा का रखरखाव, उचित प्रबन्धन, रसायन के ज्ञान की जो जानकारी फार्मासिस्ट को होती है, वह अन्यों को नहीं होती। डीफार्मा के प्रशिक्षण काल के दौरान चार वर्षों तक उचित तापमान, केमिकल ज्ञान व दवा का प्रबन्धन आदि ही तो फार्मासिस्ट को सिखाया जाता है।


नियमों से भी अनजान
गांव-देहात में जहां दवा वितरण दुकाने संचालित है। इनमें अधिकतर में एसी लगे हुए नहीं है, जिससे कि तापमान में बढ़ोतरी से दवाओं को खराब होने से बचाया जा सके। जबकि होना यह चाहिए कि जबकि दवाओं को रखने के लिए अलग से आवश्यकतानुसार स्टोर बनाया जाना चाहिए।


दवाइयों को 25 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता रहती है। अधिक तापमान में रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित हो जाती है। इसी प्रकार इंजेक्शनों का निर्धारित तापमान आवश्यक है। इसलिए ही सभी दवाओं पर कम्पनी की ओर से निर्धारित तापमान में रखने की हिदायत अंकित होती है। अधिकांश दवाओं को 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच रखना जरूरी है।

कभी नहीं हुई कार्रवाई
जिले के गांव-ढाणी में चारों ओर दवा दुकानें संचालित होने के बावजूद औषधि नियंत्रकों की ओर से कभी कार्रवाई की बात सामने नहीं आई। इसका खामियाजा आए दिन मरीजों को भुगतना भी पड़ रहा है। अधिक मुनाफे के फेर में कई दवा दुकानदार गुणवत्ता हीन दवा बेचने सेभी नहीं चूक रहे। चौकाने वाली बात यह है कि गांवों में कई स्थानों पर परचून के सामानों के बीच जीवन रक्षक दवाइयां तक बेची जा रही है।


लाइसेंस किराए पर नहीं दे सकते। कब कहां कार्रवाई हुई, इस बारे में औषधि नियंत्रक ही अधिक बता सकेंगे। दवा दुकानों की जांच को लेकर अलग ही यूनिट बनाई हुई है। ये मेरे अधीन भी नहीं है। इधर, औषधि नियंत्रक का मोबाइल फोन बंद मिला।
डॉ. गोकुललाल मीणा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी टोंक।