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व्यापारियों का आरोप है कि गौण कृषि मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा मिले

गौण कृषि उपज मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा मिले व्यापारी व किसान मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।

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Agricultural produce man

टोडारायसिंह मण्डी परिसर में गोदामों के अभाव में खुले में पड़ी कृषि जिंस।

टोडारायसिंह. गौण कृषि उपज मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा नहीं मिलने से पिछले दो दशक से व्यापारी व किसान मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। उल्लेखनीय है कि टोडारायसिंह उपखण्ड, जिले में उन्नत व अच्छी पैदावार का क्षेत्र है।

इसके बावजूद वर्षों से मुख्यालय पर संचालित गौण कृषि मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा नहीं मिलने से व्यापारी व किसान असुविधाओं का दंश झेल रहे है। लगातार डेढ़ दशक से मृत प्राय: गौण कृषि मण्डी में जनप्रतिनिधि व मण्डी व्यापारियों के प्रयास से गत वर्षो में खरीद-फरोख्त ने रफ्तार पकड़ी है। जिंसों की अच्छी आवक होने के बीच यहां करीब 20 लाख से एक करोड़ मण्डी की वार्षिक आय में वृद्धि हुई है।


इधर, मण्डी व्यापारी सुनील जैन, संजय मोदी, राकेश झण्डा, हंसराज गुर्जर, रमेश कीर, छोटू सैनी, रामस्वरूप चौधरी, शंकरलाल महिया, पारस जैन, अरुण सर्राफ समेत अन्य व्यापारियों का कहना है कि अच्छी आय होने के बावजूद प्रशासनिक व राजनीतिक खींचतान के बीच मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा नहीं मिल पाया है।

स्थिति यह है कि मण्डी सचिव की स्थायी नियुक्ति के अभाव में प्रभावी संचालन व मण्डी के बाहर अवैध व्यापार पर अंकुश नहीं है। मण्डी परिसर में व्यापारियों को दुकानें आवंटित नहीं होने से वे दुकानों का संचालन टीनशेड के नीचे तख्त व टेबलों पर कर रहे है।


प्लेट फार्म व डोम निर्माण के अभाव में किसानों की फसलों (जिंस) की खरीद-फरोख्त व तुलाई कार्य खुले आसमां के नीचे करना पड़ रहा है। गोदाम व वेयर हाउस के अभाव में खरीदी गई, जिंस असुरक्षित है।कृषि जिंसों पर मौसम की मार या चोरों की नजर रहती है।

किसान व मण्डी में कार्यरत मजदूरों का कहना है कि मण्डी में किसान सामुदायिक केन्द्र नहीं होने से उन्हें ठहराव व अन्य सुविधाओं से महरूम होना पड़ रहा है। इधर, व्यापारियों का आरोप है कि गौण कृषि मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा दिलाने के साथ ही करीब एक करोड़ रुपए की लागत से एक कवर्ड प्लेटफार्म योजना थी, लेकिन दो विधानसभा क्षेत्रों के बीच स्थापित मण्डी के संचालन को लेकर समिति गठन में राजनीतिक उपेक्षा के बीच कार्य अधूरा पड़ा है।


नहीं मिल रहा दर्जा
लम्बे अर्से से उपेक्षित गौण कृषि मण्डी में तीन वर्षों में व्यापारी खरीद-फरोख्त बढऩे के साथ मण्डी की वार्षिक आय में वृद्धि हुई है, लेकिन उपेक्षित रवैये के चलते सफल संचालन के लिए मण्डी को सम्पूर्ण मण्डी का दर्जा नहीं मिला है। इससे व्यापारी व किसानों को मण्डी में डोम, प्लेट फार्म, दुकानों का आवंटन समेत अन्य मिलने वाली व्यापक सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।