
पढ़ाई हेतु घर-परिवार में सौहार्दपूर्ण व प्रोत्साहन का वातावरण बनाए रखना चाहिए
दूनी.माता-पिता परिजन अपने बालकों का भविष्य बनाने को लेकर अच्छे संस्कार एवं शिक्षा देकर समाज-गांव में अलग पहचान बनाना चाहते है तो विद्यालय में शिक्षा देने वाले भविष्य निर्माता भी इसमें कोई कसर नहीं छोड़ अपनी योग्यता की झलक उस होनहार बालक में देखना चाहता है।
इस सत्र की उच्च माध्यमिक स्तर की परीक्षाएं प्रारम्भ हो चुकी है तो प्राथमिक से माध्यमिक स्तर की परीक्षाओं का विद्यार्थी, अभिभावक व शिक्षकों को बेसब्री से इंतजार है ऐसे में राजस्थान पत्रिका ने अभिभावक, शिक्षक व विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी को लेकर शुक्रवार को उत्कृष्ट शैक्षणिक गतिविधियों को लेकर राष्ट्रपति सम्मान से नवाजे एवं माध्यमिक शिक्षा बोर्ड एवं पुस्तक लेखन सामग्री सदस्य रहे राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय दूनी के प्रधानाचार्य भंवरलाल कुम्हार से परीक्षा तैयारी के गुर जाने।
प्रधानाचार्य कुम्हार ने बताया कि वर्तमान में विद्यार्थियों की योग्यता मापन में परीक्षा मूल्यांकन एक विद्या है। कक्षा प्रथम से बारह तक सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों के मूल्यांकन के लिए परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है। सत्रपर्यन्त प्रथम, द्वितीय व तृतीय परख एवं अद्र्धवार्षिक परीक्षा एवं वार्षिक परीक्षा ली जाती है। विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों का यह सतत प्रयास रहता है कि परीक्षा में अधिकतम अंक कैसे प्राप्त करे, इसके लिए निम्नलिखित बिन्दूओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
1. नियमित अध्ययन-:
विद्यार्थी अध्ययन के लिए विद्यालय में नियमित उपस्थित रहकर कक्षा शिक्षण में पूर्ण ध्यान देकर अध्ययन करे। पढ़ाए जाने वाले पाठ को पहले से पढकऱ जाए, कक्षा में अध्ययन करे तथा कक्षा के पश्चात घर पर भी उसका दोहरान करे।
2. दैनिक दिनचर्या-: विद्यार्थी अध्ययन के लिए दैनिक दिनचर्या का भी ध्यान रखे, जिसमें घर पर पढ़ाई के न्यूनतम चार से पांच घंटे निश्चित हो, खानपान सामान्य होने के साथ ही रात्रिकालीन न्यूनतम छह: घंटे सोने का समय दिया जाना चाहिए।
3. घर-परिवार का वातावरण-:
पढ़ाई के लिए घर-परिवार का सोहार्दपूर्ण वातावरण जरूरी है। किसी भी प्रकार लढ़ाई-झगड़ा एवं वाद-विवाद विद्यार्थियों के सामने नहीं हो। पढ़ाई हेतु प्रोत्साहन का वातावरण बनाए रखना चाहिए।
4. विद्यालय वातावरण-:
विद्यालय का वातावरण की पढ़ाई के अनुकुल हो, विद्यालय परिसर साफ-सूथरा एवं शिक्षकों की ओर से नियमित अध्यन कराना चाहिए। समय-समय पर अभिभावकों को बुलाकर विद्यार्थियों की प्रगति के बारे में अवगत करा चर्चा करना भी अति आवश्यक है।
5. लेखन शैली-:
परीक्षा में तनावमुक्त होकर प्रश्नों का उत्तर बिन्दूवार लिखे, चित्रों को नामांकित कर वर्णन करे। उत्तर के शीर्षक मोटे अक्षरों में लिखकर अण्डरलाइन करे। एक प्रश्न पूर्ण पर दूसरा प्रश्न एक लाइन छोडकऱ शुरू करे। किसी प्रकार की व्याकरण सम्बंधी त्रुटी नहीं करे।
7. समय प्रबंधन-: प्रश्नपत्र निश्चित अवधि का होता है, कोई प्रश्न छुटे नहीं अंकभार के अनुसार शब्द सीमा में प्रश्नों का उत्तर देवे।
Published on:
07 Mar 2020 03:34 pm
बड़ी खबरें
View Allटोंक
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
