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शौचालय बना जनाना घाट, 48 लाख रुपए की स्वीकृति के बाद भी मॉडल तालाब दुर्दशा का शिकार

तालाब के टूटे हुए ब्रुज व पाल क्षतिग्रस्त होने से बारिश के दिनों में हादसा होने का भय बना रहता हैं।  

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 पम्पासागार मॉडल तालाब

पचेवर. पम्पासागार तालाब आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा हैं। जहां लोग कचरा डालकर तालाब को कचरापात्र बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

पचेवर. पम्पासागार तालाब आज अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा हैं। जहां लोग कचरा डालकर तालाब को कचरापात्र बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बारिश आते ही पंचायत प्रशासन की ओर से टूटे हुए ब्रुज के मिट्टी के कट्टे लगाकर मरम्मत कर दी जाती हैं। तालाब के अन्दर टूटे हुए ब्रुज के पत्थर मिट्टी के ढेर हकीकत बयां कर रहे हैं। इस तालाब के टूटे हुए ब्रुज व पाल क्षतिग्रस्त होने से बारिश के दिनों में हादसा होने का भय बना रहता हैं।

तालाब कागजों में मॉडल तालाब बन गया, लेकिन जगह जगह तालाब की पाल क्षतिग्रस्त होने से बस स्टैण्ड स्थित स्नान घाटों पर कचरे के ढेर लग रहे हैं। महिला घाट पर बना शौचालय पानी की कमी होने के कारण पुरुषों के शौचालय के काम आ रहा हैं। कस्बे में रोजाना बाहर से आने वाले हजारों महिलाओं व पुरुषों को शौचालय के अभाव में परेशानी उठानी पड़ती हैं।

भाजयुमो मण्डल अध्यक्ष सुनील कुमार साहू ने बताया कि कस्बे की समस्याओं के बारे में ग्राम पंचायत में होने वाली ग्राम सभाओं में कई बार सरपंच घनश्याम गुर्जर को अवगत कराने पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा हैं। इससे कस्बे सहित आस-पास के ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। मण्डल अध्यक्ष ने बताया कि मॉडल तालाब के तहत 48 .23 लाख रुपए की स्वीकृति के बाद भी यह दुर्दशा बनी हुई हैं।


पीने को मिलेगा शीतल जल

उनियारा. कस्बे के रोडवेज बस स्टैण्ड स्थित देहलवाल चौक में गिर्राजधरण सेवा समिति की ओर से व बड़ाया परिवार के सहयोग से प्याऊ का संचालन शुरू किया गया। पालिकाध्यक्ष राकेश बड़ाया ने फीता काटकर प्याऊ का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि राहगीरों को गर्मी के दिनों में पीने को ठण्डा पानी मिलेगा। इस मौके पर रमेश बड़ाया, लक्ष्मीकान्त, शम्भुदयाल, शम्भु शर्मा, ओम प्रकाश, राकेश शर्मा, गोपाल आदि शामिल थे।


जर्जर इमारत ढहने की आशंका
नगरफोर्ट. कस्बे की उपतहसील मुख्यालय की जर्जर इमारत के ढहने की आशंका बनी हुई है। सैंतीस साल पुरानी इमारत ने अब जवाब दे दिया है। इमारत के कमरों में बड़ी-बड़ी दरारें बनी हुई हंै। इसके चलते ये इमारत कभी भी गिर सकती है। इसके बारे में कई बार प्रशासन को लिखित में जानकारी भी दे दी गई है। इसके बाद भी प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। प्रशासन की लापरवाही की वजह से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

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