
Government School News : टोंक। इस साल शिक्षा विभाग ने नवाचार करते हुए एक से सात जुलाई तक प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में ग्रीष्मकालीन शिविर लगाने का कार्यक्रम तैयार किया है। इसकी तिथि भी घोषित कर दी गई है। इस सप्ताह के तहत अगर कोई अवकाश होता है, तो उस दिन की गतिविधि आगामी दिन की जाएगी। शिविर के लिए सातों दिन अलग-अलग गतिविधियां आयोजित करने का कार्यक्रम तैयार किया है। शिविरों में शिक्षक विद्यार्थियों को माता-पिता का आदर करना, पानी की बचत, ऊर्जा संरक्षण तथा सिंगल यूज प्लास्टिक जैसे मुद्दों पर जागरूक करेंगे।
सरकारी स्कूलों में यह पहला मौका है जब ग्रीष्मकालीन शिविर लग रहा है। स्कूलों में एनएसएस व समाजोपयोगी उत्पादन कार्य एवं समाजसेवा जैसे शिविर ही अब तक लगाए जाते रहे हैं। ग्रीष्माकालीन शिविर आयोजन को लेकर राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद अति राज्य परियोजना निदेशक सुरेशकुमार बुनकर ने प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय बीकानेर निदेशक को आदेश जारी किए है। जिसमें बताया कि भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से वीसी में विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून से सात दिवसीय समर कैंप आयोजित करने थे लेकिन भीषण गर्मी को देखते हुए शिविर आयोजन को रोक दिया था। यह ग्रीष्मकालीन शिविर अब 1 जुलाई से 7 जुलाई तक आयोजित होंगे।
शिक्षा निदेशालय बीकानेर ने सभी संयुक्त निदेशकों को आदेश जारी कर शिविरों के आयोजन करवाए जाने की सुनिश्चितता किए जाने के निर्देश दिए है। विद्यार्थियों को स्वयं जागरूक होने के साथ ही अपने परिवार, परिचितों को भी जागरूक किए जाने के प्रेरित किया जाएगा। नवाचारी शिक्षक दिनकर विजयवर्गीय ने बताया कि शिक्षा विभाग का यह नवाचार विद्यार्थियों में नई जन जागृति लाएगा। ये शिविर विद्यार्थियों को उनके जीवन में एक नया रास्ता दिखाएगा।
शिविर के प्रथम दिन स्वस्थ जीवन जीने की प्राथमिकता को लेकर विद्यार्थियों को गतिविधियों, उदाहरणों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। जिसमें एक विद्यार्थी की स्वस्थ जीवनचर्या में सुबह जल्दी उठने, प्रतिदिन व्यायाम करने, माता-पिता एवं बड़ों का आशीर्वाद ग्रहण कर उनके जीवन के अनुभवों के अनुरुप अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाना, प्रतिदिन विद्यालय जाकर शिक्षा ग्रहण करना, आयु एवं शरीर के आवश्यकतानुरूप स्वच्छ एवं संतुलित भोजन का सेवन, साफ कपड़े पहनना, घर के छोटे-मोटे कार्यों में सहयोग कर माता-पिता की सेवा करना, शरीर को नुकसान पंहुचाने वाली वस्तुओं/पदार्थों के सेवन से बचना, इत्यादि शामिल है।
इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण एवं उसकी उपयोगिता को समझाते हुए जागरूक करेंगे। साथ ही इलेक्ट्रोनिक उत्पादों के निर्माण एवं इलेक्ट्रोनिक वस्तुओं के उपयोगिता समाप्ति अर्थात् खराब हो जाने की स्थिति में इनका निस्तारण उचित ढंग से किया जाकर पर्यावरण प्रदूषण से बचाने की जानकारी दी जाएगी।
तृतीय दिवस उर्जा सरंक्षण के लिए जागरूक किया जाएगा। ऊर्जा के कई रूप हैं। ऊर्जा परपरागत एवं गैर परपरागत स्त्रोतों से प्राप्त होती है, जिनके माध्यम से मानव अपना जीवन यापन करता है, ऊर्जा सीमित है, अत: आने वाली पीढिय़ों के लिए इसका संरक्षण आवश्यक है।
चतुर्थ दिवस जल ही जीवन है, बिना जल कुछ भी नहीं को लेकर जागरूक किया जाएगा। क्योंकि वर्तमान में बढ़ती जनसंया एवं जल प्रदूषण के कारण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है, वर्षा जल संचय की विभिन्न विधियों एवं जल संरक्षण के लिए पेड़-पौधों की आवश्यकता को समझना आवश्यक है।
शिविर के पांचवे दिवस खान-पान को लेकर जागरूक किया जाएगा। क्योंकि खान-पान के चलते स्वास्थ्य पर काफी प्रभाव पडऩे लगा है। ऐसे में स्थायी खाद्य प्रणाली जो सभी के लिए खाद्य सुरक्षा और पोषण को प्रदान करती है।
मानव, जीवन में बहुत सी वस्तुओं को उपयोग करता है, उनके उपयोग उपरान्त उसका निस्तारण करना भी आवश्यक है, अत: अनावश्यक वस्तुओं का उचित ढंग से निस्तारण कर हम अनावश्यक वस्तुओं से होने वाले विभिन्न प्रदूषणों को कम करने में अपना प्रभावी योगदान दे सकते हैं।
मानव हर साल लाखों टन सिंगल यूज प्लास्टिक का उत्पादन करता है, जिनमें से अधिकांश को पुनर्नवीनीकरण नहीं किया जा सकता है। प्लास्टिक की थैलियां / प्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल नहीं होता और आमतौर पर ये जमीन के अन्दर जल प्रदूषण एवं बाहर मृदा प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बनता है। ऐसे में इन सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने के प्रति जागरूक किया जाएगा।
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Published on:
23 Jun 2024 01:14 pm

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