
प्रशिक्षण के नाम पर महज राइफल की ट्रेनिंग, साल में एक बार अभ्यास वो भी अधूरा
टोंक. जिले के पुलिसकर्मियों को हथियार चलाने के प्रशिक्षण के नाम पर टोंक में महज राइफल की ट्रेनिंग दी जाती है। अन्य हथियारों की ट्रेनिंग किशनगढ़ अजमेर, भीलवाड़ा, जोधपुर, भरतपुर व जयपुर समेत अन्य प्रशिक्षण केन्द्रों में दी जाती है। जिले में 1150 जवानों की नफरी है।
जिले के थाने तथा पुलिस लाइन से क्रमानुसार प्रशिक्षण दिया जाता है। गत वर्ष भी राइफल का कच्चा बंधा क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया था। इस साल 15 सितम्बर से प्रशिक्षण दिया जाना तय है। इधर, दबी जबान से जवान बताते हैं कि हथियार चलाने के अभ्यास का पूर्णरूप से मौका नहीं मिल पाता। एक-दो फायर किए और अभ्यास पूरा हो जाता है। कई बार तो दो-दो साल में अभ्यास का मौका मिलता है।
मालखानों में बंद है हथियार
निवाई. लोगों की सुरक्षा के लिए थानों में हथियार तो रखे हैं, लेकिन संतरियों और अधिकारियों को सालाना प्रशिक्षण नहीं देने कारण हथियार काम नहीं लिए जाते। प्रशिक्षण के अभाव में पुलिस के हथियार केवल मालखाने की शोभा बढ़ा रहे हैं। इससे अपराधियों में पुलिस का खौफ नजर नहीं आता है।
बहरोड़ में हुई घटना के बाद निवाई थाने में शनिवार को एसएलआर लेकर संतरी तैनात नजर आया। निवाई थाना प्रभारी बी.एल. मीणा ने बताया कि निवाई थाने में पिस्टल, रिवाल्वर, एसएलआर, गैसगन सहित विभिन्न प्रकार के हथियार हैं और सब हथियारों की हर सप्ताह सर्विस की जाती है।
दत्तवास थाना प्रभारी उदयवीर सिंह ने बताया कि थाने में पिस्टल, रिवाल्वर, एसएलआर, गैसगन हैं और सभी का समय-समय पर पुलिस लाइन टोंक से सर्विस कराईजाती है। सदर थाना प्रभारी छोटेलाल ने बताया कि थाने में पिस्टल, रिवाल्वर, एसएलआर है। बरोनी थाना प्रभारी रामकृष्ण चौधरी ने बताया कि मालखाने में पिस्टल, रिवाल्वर, एसएलआर, गैसगन है।
आधा दर्जन प्रकार के है थाने में हथियार
देवली. थाने में करीब आधा दर्जन प्रकार के हथियार है, जिनकी हर माह साफ-सफाई व देखरेख की जाती है। मौजूदा समय के अनुसार दिए जाने वाले हथियार व उनके संचालन की स्वतंत्रता नहीं होना पुलिस के लिए ज्यादा परेशानीभरा है। थाने में एक रिवाल्वर, पांच पिस्टल, 12 बोर पम्प एक्शन की 2, एसएलआर 16 बंदूक व एक गैस रिवाल्वर है। रिवाल्वर व पिस्टल अधिकारियों स्तर के अधिकारियों को दी जाती है।
जबकि एसएलआर पुलिसकर्मियों को सौंपी जाती है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि एसएलआर एके 47 व एके 56 मुकाबले तकनीकी रुप से कमजोर है। एसएलआर बंदूक विश्वनीय मानी जाती है। थाना प्रभारी नरेश कुमार ने बताया कि इन हथियारों को सप्ताहभर में देखरेख करने के निर्देश होते हैं, लेकिन पुलिसकर्मी कम से कम एक पखवाड़े व माह में गर्म पानी व तेल से सफाई करते हैं।
वहीं पुलिसकर्मी से लेकर थाना प्रभारी तक के अधिकारियों को हर वर्ष जिलास्तर पर हथियारों का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने बताया कि थानों पर संतरी ड्यूटी एसएलआर से करवाई जाती है। इससे तीन-चार साल पहले थ्री नोट थ्री बंदूक से होती थी। जो ब्रिटिशकालीन होने से पिछले वर्षो में विभाग ने जमा कर ली।
वर्ष में दो बार हथियारों का मुआयना किया जाता है। जबकि हकीकत यह है कि पुलिसकर्मियों को दो वर्ष में एक बार फायरिंग करने व हथियार संचालन का मौका मिलता है। इससे के पीछे पुलिस विभाग का बजट भी है। बजट के अभाव में पुलिसकर्मियों को हथियारा संचालन के पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाते।
गत कुछ सालों में थाने में घुसकर हथियारों से फायरिंग करने की प्रदेश में कई घटनाएं हो चुकी है। इसका कारण अपराधियों को पुलिस की हथियारों सम्बन्धी स्वतंत्रता का मालूम होना है। जहां अपराधी अपने हथियार के साथ कहीं पर भी फायरिंग कर सकता है, जिसके लिए कोई नियम-कायदे नहीं है।
जबकि पुलिस को फायरिंग का जवाब देने के लिए अपने उच्चाधिकारियों के आदेशों का इंतजार करना पड़ता है। लिहाजा ऐसी स्थिति में अपराधी पुलिस के बंधे हाथों का लाभ उठाने लगा है। पुलिस अपने उच्चाधिकारी के आदेश तक रुकता है। तब तक अपराधी अपने काम को अंजाम देकर ही निकल जाता है।
मालखानें की शोभा बढ़ा रहे हथियार
मालपुरा. पुलिस थाने में सरकार कि ओर से आधुनिक गन, पिस्टल, रिवाल्वर, गैस गन सहित हथियार सुरक्षा के लिए उपलब्ध तो करा रखे हैं, लेकिन इनकी सुरक्षा के चलते हथियारो को मालखानें में रखा जाता है। थाना प्रभारी दलपत सिंह ने बताया थाने में 16 एस.एल.आर गन, 5 पिस्टल, 4 रिवाल्वर, गैस गन सहित हथियार मौजूद है।
एस.एल.आर गन थाने में आने के बाद आज तक काम नही आई। इनके उपयोग के लिए पुलिसकर्मियों को साल में एक बार जिला रेंन्ज में प्रशिक्षण दिया जाता है तथा प्रतिवर्ष साफ सफाई के लिए जिला मुख्यालय से टीम आती है। पुलिस थाने में 16 एस.एल.आर गन वर्ष 2016 में आई थी।
टोडारायसिंह. थाने में एसएलआर व राइफल है, जो मालखाने में रखी रहती है। एक राइफल थाने के गेट के पास खड़े जवान के पास होती है। थाना प्रभारी बंशीलाल ने बताया कि राइफलों की साप्ताहिक सफाई कार्य होता है। इसके अलावा जिला मुख्यालय पर वार्षिक अभियान के तहत फायरिंग प्रशिक्षण होता है। फायरिंग रैंज में होने वाले प्रशिक्षण में सिपाहियों को प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है।
Published on:
09 Sept 2019 10:27 am
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