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सर्वे रिपोर्ट तय करेगी बनास नदी में खनन होगा या नहीं

टोंक. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले की बनास नदी समेत अन्य खनन क्षेत्रों में सर्वे रिपोर्ट तै

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फाइल फोटो

सतवाड़ा के पास बनास में बजरी का होता खनन। फाइल फोटो

टोंक. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जिले की बनास नदी समेत अन्य खनन क्षेत्रों में सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

इस रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि खनन के लिए लीज जारी की जाए या नहीं। कोर्ट को लगेगा कि खनन कई गुना अधिक किया जा चुका है तो लीज नहीं दी जाएगी। लीज देने के बाद भी नियमों की पालना कड़ाई से की जानी है।
सर्वे के आदेश गत 7 फरवरी को खनिज विभाग जयपुर के अधीक्षण अभियंता डी. पी. गौड़ ने जारी किए हैं।

इसके तहत जिले में खनन करने वाले लीज धारक की ओर से 9 बिंदुओं पर सर्वे किया जा रहा है। फिलहाल खनिज विभाग ने देवली के जलसीना व राजमहल स्थित बनास नदी में सर्वे कराया है। अब सतवाड़ा, पीपलू के गहलोद, लॉक, लांकड़ा, खलीलपुरा उर्फ डोडवाडी, मांसी नदी, मालपुरा की मांसी नदी, सहोदरा, टोंक में नया गांव, बोरदा, निवाई में मांसी नदी में दी गई लीज क्षेत्र का सर्वे कराया जाएगा।


यहां बजरी खनन प्रतिबंधित


नियमों के अनुसार लीज क्षेत्र के समीप 8 स्थानों पर किसी भी हालात में बजरी का खनन नहीं किया जा सकता है। इसमें छान से टोडारायसिंह जाने वाली सडक़ पर नदी में बनास पुल का क्षेत्रफल सेफ्टी जोन 0.6 हैक्टेयर, टोंक से मालपुरा जाने वाली सडक़ पर बनास नदी में बनी रपट का सेफ्टी जोन 4.00 हैक्टेयर, टोंक व लहन गांव में जलदाय विभाग के कुओं के सेफ्टी जोन क्षेत्र 457.21 हैक्टेयर, टोंक में नदी क्षेत्र में पडऩे वाली खातेदारी भूमि 57.00 हैक्टेयर, जयपुर-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने बनास नदी के नए व पुराने पुल के बीच तथा दोनों तरफ सेफ्टी जोन का क्षेत्रफल (1350 गुणा 800 मीटर) 108 हैक्टेयर, चूरिया गांव के खसरा नम्बर 61 में इसरदा डेम का डूब क्षेत्र 133 हैक्टेयर, चूरिया तथा मण्डावर क्षेत्र में पडऩे वाली बनास नदी में 206.08 हैक्टेयर तथा टोंक में वन क्षेत्र 1143.89 हैक्टेयर में बजरी का खनन प्रतिबंधित है।

अवैध खनन पर विशेष नजर


सर्वे रिपोर्ट में तय किया जाएगा कि खनन कहां-कहां किया जाना है। इसके लिए सम्बन्धित क्षेत्र को पिल्लर लगाकर चिह्नित किया जा रहा है। ऐसे में भविष्य में लीज जारी होने पर उक्त क्षेत्र में ही खनन किया जा सकता है। इसमें भी एक मीटर गहरा तथा एक मीटर ऊंचाई पर नदी के दोनों किनारों पर लगने वाले पिल्लर से खनन की गहराई नापी जाएगी। नियमों के मुताबिक खनन तीन मीटर गहराई में किया जाएगा। पिल्लर के अनुसार अधिक खनन होने पर लीज धारक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ये नियम पहले भी थे, लेकिन गहराई नापी नहीं जा रही थी। पिल्लर लगने के बाद आसानी से गहराई नापी जा सकेगी।

इनको किया शामिल


केन्द्रीय विशेषज्ञ अंकन समिति की बैठक गत 18 जनवरी को हुई थी। इसमें सर्वे के बिंदुओं को शामिल किया गया। इसमें क्रॉस सैक्शन नक्शा बनाना, लीज क्षेत्र वाले नदी के दोनों किनारों पर निर्धारित साइज के पिल्लर का निर्माण, डीजीपी उपकरण से आक्षांश, देशांतर तथा रिड्यूस्ड लेवल की रीडिंग, समुद्र तल से ऊंचाई, पिल्लर लगाकर क्षेत्र का चिह्नीकरण, पिल्लर से 20-20 मीटर के अंतराल पर रीडिंग आदि किया जाएगा। सर्वे रिपोर्ट पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट में पेश करेगा।

सहायक अभियंता करेंगे सत्यापित


सर्वे रिपोर्ट का सत्यापन खजिन विभाग के सहायक अभियंता जे. पी. गोदारा करेंगे। उन्हें लगेगा कि सही तो वे रिपोर्ट आगे भेज देंगे। गलत लगने पर रिपोर्ट दोबारा तैयार कराई जाएगी।

यह है खनन का क्षेत्रफल


टोंक जिले से गुजर रही बनास नदी में बजरी खनन की लीज 8 हजार 837.84 हैक्टयेर में दी गई है। इसमें टोंक में 2 हजार 389.36, पीपलू में 3 हजार 342.10, देवली में एक हजार 667.78, टोडारायसिंह में एक हजार 260.96 तथा उनियारा में 177.64 हैक्टयेर क्षेत्र शामिल है। इसके अलावा बजरी का खनन नहीं किया जा सकता।

आदेश मिले हैं


-सर्वे रिपोर्टके आदेश मिले हैं। लीज धारक की ओर से सर्वे कराया जा रहा है। ये रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। लीज जारी होती है कि इन नियमों की पालना की जाएगी।
अमीचंद दुहारिया, सहायक अभियंता, खनिज विभाग, टोंक