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मानसून की बैरुखी को देखते हुए बीसलपुर बांध से जयपुर की तीन करोड़ लीटर जलापूर्ति घटाई, आगामी दिनों में हो सकता है जल संकट

राजमहल. मानसून की बैरुखी के कारण अगस्त माह के प्रथम सप्ताह तक भी बीसलपुर बांध से जयपुर व अजमेर में हो रही जलापूर्ति को धीरे-धीरे कम करने की शुरुआत कर दी है।

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टोंक

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Kamal Bairwa

Aug 04, 2018

bisalpur

राजमहल क्षेत्र के बीसलपुर बांध का विहंगम दृश्य।

राजमहल. मानसून की बैरुखी के कारण अगस्त माह के प्रथम सप्ताह तक भी बीसलपुर बांध में पानी की आवक नहीं होने से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने जयपुर व अजमेर में हो रही जलापूर्ति को धीरे-धीरे कम करने की शुरुआत कर दी है। बीसलपुर बांध से शुक्रवार को जयपुर शहर सहित मालपुरा-दूदू व झिराना-चाकसू पाइप लाइनों में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 एमएलडी पानी यानि करीब तीन करोड़ लीटर पानी की आपूर्ति रोजाना कम कर दी है।

इधर, बांध परियोजना के अनुसार बांध में पानी की आवक अधिकतर अगस्त माह व सितम्बर के प्रथम सप्ताह तक होती आई है, फिर भी जलभराव क्षेत्र में बारिश का अभाव रहा तो मंडराते संकट के चलते ये कटौती की जा रही, अगर बांध का यही हाल रहा तो आगामी सर्दी के मौसम में भी जयपुर व अजमेर की जलापूर्ति में ओर अधिक कटौती होने की सम्भावना है।

अभी बांध के हाल
1999 में बनकर तैयार हुए बीसलपुर बांध का कुल गेज 315.50 आर एल मीटर है। वहीं गुरुवार को बांध का गेज 309.31 आरएल मीटर दर्ज किया गया है, जिसमें कुल जलभराव 8.945 टीएमसी है। बांध का जलभराव पेंदे से यानि 295 आरएल मीटर से शुरू होता है। अभी बांध में महज 14.31 मीटर पानी बचा हुआ है। वहीं अजमेर को प्रति 24 घंटे के दौरान 300 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है। जयपुर में 565 एमएलडी पानी की जलापूर्ति की जा रही है, जिसमें शुक्रवार से 20 एमएलडी पानी जयपुर का कम कर दिया है।

वहीं 5 एमएलडी मालपुरा-दूदू, 5 एमएलडी झिराना-चाकसू का कम किया गया है। मानसून की ऐसे ही बैरुखी रही और अगस्त माह में भी पानी की आवक नगण्य रहती है तो आगामी गर्मी में बांध के सूखने की आशंका के साथ ही जयपुर व अजमेर में पेयजल का संकट मंडरा सकता है।

आठ साल बाद भी नहीं खुली आंखें
बीसलपुर बांध बनने के बाद पहली बार 2010 में बांध पूर्णतया सूख गया था। जब बांध का गेज 295.62 आरएल मीटर पर रह गया था। तब बांध से जयपुर में जलापूर्ति की शुरुआत हो चुकी थी। वहीं 2010 में बीसलपुर बांध के सूखने पर सरकार ने 5 हजार करोड़ रुपए की योजना बनाकर ब्रह्माणी नदी का पानी बनास में डालने की कार्रवाई शुरू कर दी थी, लेकिन आठ वर्ष गुजर जाने भी ढिलाई के चलते अब तक उक्त योजना पर कार्य शुरू नहीं हो पाया है।