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ब्रोकली और मशरूम की खेती से टोंक की प्रदेश में बन रही विशेष पहचान

खेती में आर्थिक मजबूती तब ही बन सकती है जब कोई नवाचार हो। जिले के किसान अक्सर तिलहन की फसल पर अधिक दे रहे हैं, लेकिन अब ब्रोकली और मशरूम प्रदेश में टोंक की पहचान बन रही है। इस नवाचार से जहां किसानों की आय बढ़ी है, वहीं किसानों को कुछ नया करने का मौका भी मिला है।

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ब्रोकली और मशरूम की खेती से टोंक की प्रदेश में बन रही विशेष पहचान

ब्रोकली और मशरूम की खेती से टोंक की प्रदेश में बन रही विशेष पहचान

टोंक. मेहनत और लग्न से कोई असम्भव काम करना मुश्किल नहीं है। खेती में आर्थिक मजबूती तब ही बन सकती है जब कोई नवाचार हो। जिले के किसान अक्सर तिलहन की फसल पर अधिक दे रहे हैं, लेकिन अब ब्रोकली और मशरूम प्रदेश में टोंक की पहचान बन रही है। इस नवाचार से जहां किसानों की आय बढ़ी है, वहीं किसानों को कुछ नया करने का मौका भी मिला है।

जिले में बनास नदी होने पर सब्जी का उत्पादन बहुत है, लेकिन अब तक परम्परागत खेती ही चलती आ रही है। जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल ने नवाचार को बढ़ावा देने की योजना बनाई तो राजीविका ने इसमें पहल की ओर महिला किसानों को प्रशिक्षण देकर ब्रोकली और बटन मशरूम की खेती को प्रोत्साहित किया।

इसके बाद महिलाएं पीछे नहीं रही और इस नवाचार में जुट गई। अब यह खेती जिले की पहचान बनती जा रही है। निवाई क्षेत्र में ब्रोकली की खेती से 140 तथा मूंडिया में बटन मशरूम की खेती से 80 महिलाएं जुड़ गई है। इस खेती का मकसद उच्चतम खेती की तकनीक को अपनाना है।


अगस्त में हुई थी शुरुआत:
अगस्त 2021 से जिला कलक्टर चिन्मयी गोपाल के निर्देश पर राजीविका के मार्गदर्शन में आत्मा, और केवीके ब्रोकली उगाने की अवधारणा पर काम कर रहे हैं। निवाई ब्लॉक में झिलाई, निवाई, किवाड़ा, नटवाड़ा, रजवास, ढाणी जुगलपुरा व खण्देवत गांवों में तैयार की जा रही है। उन्हें आत्मा टोंक द्वारा बीज और अन्य सहायता प्रदान की गई है। मनरेगा के तहत अपना खेत अपना काम योजना के तहत शेड तैयार कराए गए।

खेती के लिए नर्सरी और ट्रेनिंग केवीके द्वारा दी गई। अधिकारियों के मुताबिक ब्रोकली को सुपर फूड के रूप में जाना जाता है। यह कैलोरी में कम है, लेकिन इसमें पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट काफी होता है। ब्रोकली एक सब्जी है। इसलिए इसे शुरुआती दिनों ही तैयार किया जाता है। बाजार में ब्रोकली का औसत भाव 50 व 135 रुपए प्रति किलो है। इसे बेचना भी आसान है। मशरूम की खेती के लिए कृषि विज्ञान केंद्र केवीके द्वारा खेती के लिए प्रशिक्षण दिया है।

आत्मा टोंक द्वारा बीज और अन्य सहायता दी है। बटन मशरूम की नियंत्रित परिस्थितियों में एक वर्ष में औसतन 5-6 फसल ले सकते हैं। इस फसल की अवधि 60 दिनों की होती है। मशरूम उगाने के लिए 10 हजार से 50 हजार रुपए की आवश्यकता होती है। वित्तीय सहायता कलक्टर द्वारा एसएचजी सदस्यों को वित्त पोषण के तहत प्रदान की जाती है। बाजार में बटन मशरूम की औसत दर 140 से 200 रुपए प्रति किलोग्राम है। बाजार में इसकी मांग भी काफी अधिक है।

सरकार उपलब्धियों में करेगी शामिल

राजीविका के मुताबिक ब्रोकली और मशरूम की खेती को राज्य सरकार अपनी उपलब्धियों में शामिल करेगी। इसके लिए इसकी एक शॉर्ट फिल्म तैयार की गई है, जो सरकार तीन साल के कार्यकाल पर जनता के सामने रखेगी। इसकी ट्रायल चल रही है।

हर क्षेत्र में अब महिलाएं आगे आ रही है। ब्रोकली और मशरूम की खेती में भी महिलाओं ने नवाचार किया है। यह जिले के लिए अच्छी खबर है। इससे महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। कोशिश करेंगे कि जिलेभर की महिलाओं को ऐसे कार्य से आत्मनिर्भर बनाया जाए। साथ ही जिनके पास खेती की जमीन कम है, वो किसान भी आसानी से उत्पादन कर अपनी आर्थिक स्थित मजबूत कर सकते हैं।
चिन्मयी गोपाल, जिला कलक्टर टोंक

ब्रोकली और मशरूम की खेती शुरू हुई है। इससे महिलाओं की खेती में सुधार होगा। महिलाएं और आर्थिक रूप से विकसित होगी।
डॉ. मुकेश चावला, जिला परियोजना प्रबंधक
राजीविका टोंक