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टोंक की पहचान बीड़ी उद्योग आखिर इस बार चुनावी मुद्दों में कहां हो गया गुम

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टोंक की पहचान बीड़ी उद्योग आखिर इस बार चुनावी मुद्दों में कहां हो गया गुम

टोंक. शहर के अधिकांश लोगों के रोजगार का साधन बीड़ी उद्योग सरकार की अनदेखी के चलते हाशिए पर है। लगातार बढ़ रहे टैक्स के चलते ये धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। इसके साथ ही शहर की बेरोजगारी भी बढ़ रही है। चौंकाने वाली बात ये है कि दो दशक पहले तक इस उद्योग से शहर के 10 हजार परिवार जुड़े थे।


उनकी संख्या वर्तमान 5 हजार ही रह गई है। ऐसा ही आलम रहा तो बेरोजगारों की फौज बढ़ जाएगी। इसका कारण है कि सरकार लगातार बीड़ी उद्योग पर टैक्स बढ़ाती जा रही है। ऐसे में बीड़ी उद्योग से जुड़े व्यापारी भी निराश हो रहे हैं।

उनका मुनाफा लगातार घटने से वे इसे बंद करने के कगार पर है। जबकि राजस्थान में टोंक ऐसा शहर है, जो अन्य जिलों के मुकाबले सरकार को सर्वाधिक टैक्स अदा करता है। इसके बावजूद सरकार इस ओर कदम नहीं बढ़ा रही है।

ऐसे हो रहा नुकसान
सरकार ने देशभर में जीएसटी लगा दी। इसके तहत किसी भी उत्पाद पर एक ही टैक्स लगना चाहिए, लेकिन राज्य सरकार इसके बावजूद बीड़ी के तेंदू पत्ते पर कृषि मंडी का 1.6 प्रतिशत अलग से टैक्स लगा रही है।

ऐसे में बीड़ी उद्योग पर दोहरी मार पड़ रही है। जबकि टैक्स एक ही लागू होना चाहिए। इसके लिए कई बार बीड़ी उद्योग व्यापारियों ने राज्य सरकार को अवगत भी कराया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

पड़ोसी राज्य में दर कम
राजस्थान में बीड़ी उद्योग से जुड़े श्रमिकों की दर में भी कमी है। मध्यप्रदेश में जहां 1000 बीड़ी पर 105 रुपए है, वहीं राजस्थान में 1000 बीड़ी पर ये दर 131 रुपए। इससे भी बीड़ी उद्योगों का मुनाफा घट गया है। जबकि टोंक के बाद अजमेर, ब्यावर, कोटा में बीड़ी का काम होता है।

ये भी दे रहे हैं नुकसान

शहर में टैक्स देने वाले महज चार बीड़ी कारखाने है। जबकि अवैधानिक रूप से करीब 100 कारखाने चल रहे हैं। ये कारखाने ना तो टैक्स दे रहे हैं और ना ही श्रमिकों को पूरी मजदूरी।

उनकी ओर से बनाई जा रही नकली बीड़ी के चलते सरकार व कारखानों को नुकसान भी हो रहा है। इससे भी बीड़ी उद्योग लगातार घटता जा रहा है। शहर में पंजीकृत महज 700 श्रमिक है। जबकि 4 हजार श्रमिक कम दर पर बीड़ी बना रहे हैं।

फैक्ट फाइल
20 साल पहले थे 15 हजार
10 साल पहले थे 10 हजार
वर्तमान में है 5 हजार
पंजीकृत श्रमिक 700
अपंजीकृत श्रमिक-4 हजार
पंजीकृत कारखाने- 4
अपंजीकृत कारखाने- 100


कई बार कहा है
बीड़ी उद्योग टैक्स बढ़ाने से लगातार नुकसान में है। ज्यादा दिन हम लोग इस उद्योग को नहीं चला पाएंगे। इसके लिए कई बार सरकार से कहा है, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
मोईन निजाम, व्यापारी बीड़ी उद्योग।

शहर में और कोई काम नहीं है
शहर में और कोई काम नहीं है। ऐसे में मजबूरी में बीड़ी बना रहे हैं। मजदूरी भी पूरी नहीं मिलती है।
असलम, बीड़ी मजदूर।

कहां जाए रोजगार की तलाश

शहर में बीड़ी उद्योग से हम लोग दो पीढ़ी से जुड़े हुए हैं। ये भी लगातार कम होता जा रहा है। अब जाएं तो जाएं कहां रोजगार के लिए।
मोहनलाल, बीड़ी श्रमिक


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