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बीसलपुर पर ध्यान नही दे रहा पर्यटन विभाग, विकास तो मिले लोगों को रोजगार

बीसलदेव मंदिर लोगों के आकर्षण का केंद्र होने के साथ ही निर्माण की अपनी अनूठी कला व सैकड़ों खम्भों व बढ़ी बढ़ी पत्थर की शिलाओं पर टिका होने से पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है।

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बीसलपुर पर ध्यान नही दे रहा पर्यटन विभाग, विकास तो मिले लोगों को रोजगार

बीसलपुर पर ध्यान नही दे रहा पर्यटन विभाग, विकास तो मिले लोगों को रोजगार

बीसलपुर बांध, बीसलदेव मंदिर व जलभराव के बीच बना टापू के विकास मामले में अनदेखी बरती जा रही है। बांध बनने से पूर्व से ही गेट संख्या एक के निकट जलभराव किनारे बना बीसलदेव मंदिर पुरातत्व विभाग के अधीन है। जहां पर्यटन विकास को लेकर अब तक कोई विकास कार्य नहीं कराए गए। इससे बीसलपुर बांध क्षेत्र पर्यटन विकास के मामले में पिछड़ा हुआ रहा है।

25 हैक्टेयर भूमि में फैला हुआ टापू

बांध के करीब जलभराव क्षेत्र के बीच में करीब 25 हैक्टेयर भूमि में फैला हुआ टापू बांध के पूर्ण जलभराव 315.50 आर एल मीटर होने के बाद भी यथावत सूखा रहता है। जहां पर प्रशासन की अनदेखी के चलते किसान अस्थाई झुग्गी झोपडिय़ां बनाकर खेती का कार्य करते हैं।

आकर्षण का केंद्र है बीसलदेव मंदिर

इसी प्रकार बीसलदेव मंदिर लोगों के आकर्षण का केंद्र होने के साथ ही निर्माण की अपनी अनूठी कला व सैकड़ों खम्भों व बढ़ी बढ़ी पत्थर की शिलाओं पर टिका होने से पर्यटकों को बरबस अपनी ओर आकर्षित करता है। जहां पर पर्यटन विकास के मामले में कोई विकास कार्य नही होने से ये दोनों ही अपनी-अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।


शाम ढलते ही होता है अंधेरा:

प्राकृतिक धरोहरों में शामिल बीसलदेव मंदिर बनावट व सुंदरता को लेकर आकर्षण का केंद्र रहा है। मगर पुरातत्व विभाग के अधिन होने से विकास के मामले में बांध परियोजना से भी उपेक्षा का शिकार बना रहा है। यहां पर शाम ढलते ही अंधेरा हो जाता है। वही अंधेरे के दौरान पास ही स्थित जलभराव से जहरीले कीटों का गढ़ बन जाता है। जिससे शाम को पर्यटक मंदिर परिसर में प्रवेश करने से कतराते हैं।

बन सकता है पार्क या होटल

बीसलपुर बांध के जलभराव के बीच बने लगभग 100 बीघा भूमि के टापू पर पर्यटन विकास को लेकर राजस्थान पर्यटन विकास निगम ने कभी ध्यान नहीं दिया है। इससे बांध का टापू आज तक रंगीन फव्वारों से सुसज्जित पार्क निर्माण व हेरिटेज होटल बनने से वंचित रहा है। यहां पर उदयपुर की पिछोला झील की भांति डेम पैलेस होटल भी बनाया जा सकता है। मगर बांध बनने के वर्षों बाद भी ये टापू पर्यटन विकास को लेकर पिछड़ता जा रहा है।

रोशनी तक की व्यवस्था भी नहीं

किशन लाल लोधा ग्रामीण ने बताया कि बीसलदेव मंदिर बांध के करीब अनमोल धरोहर में शामिल माना जाता है। मगर पुरातत्व विभाग की अनदेखी के साथ ही यहां अन्य विकास कार्य तो दूर रोशनी तक की व्यवस्था भी नहीं की गई है। जिससे यहां पर्यटक आते तो हैं मगर अनदेखी व सुविधाओं के अभाव में रुकते नहीं है।

पर्यटकों की सुविधाओं के अभाव

कौशल प्रजापत दुकानदार ने बताया कि बीसलपुर बांध स्थल पर पर्यटन विकास को लेकर कई जगह है। मगर पर्यटन विकास के मामले में बीसलपुर बांध उपेक्षा का शिकार हुआ है। जिससे बांध स्थल पर पर्यटकों की सुविधाओं का शुरू से ही अभाव रहा है। पर्यटकों की सुविधाओं के अभाव में पर्यटकों की संख्या भी घटती जा रही है।

पार्क या होटल का निर्माण

बंशी लाल मीणा दुकानदार ने बताया कि बीसलपुर बांध के बीच बना टापू प्राकर्तिक सौंदर्य का अनुठा स्थान है। यहां अगर प्रशासन की ओर से पार्क या होटल का निर्माण होता है तो पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा। जिससे क्षेत्र के लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा। राज्य के कई जगहों पर जलभराव के बीच पर्यटन स्थलों पर ऐसा हो रखा है।

आईलैंड की भांति नजर आता है टापू

नंद लाल रैगर ने बताया कि बीसलपुर बांध पर बीसलदेव मंदिर काफी वर्षों पूर्व से ही लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा है। मगर पुरातत्व विभाग के अधिन होने से बांध परियोजना की ओर से विकास कार्य नहीं हो सका। बांध के बीच बना टापू आईलैंड की भांति नजर आता है। जहां अगर सरकार विकास कार्य करवाती है तो बांध स्थल पर पर्यटन विकास को मजबूती मिलेगी। वही रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।