
आवां. मुनि पुंगव सुधासागर के ससंघ सुदर्शनोदय तीर्थ आवां पर गुरुवार को श्रद्धालुओं की मौजूदगी में श्रद्धालुओं की मौजूदगी में 61 कलशों की स्थापना कर नया कीर्तिमान बनाया है।61 कलशों की स्थापना कर नया कीर्तिमान बनाया है।
आवां. मुनि पुंगव सुधासागर के ससंघ सुदर्शनोदय तीर्थ आवां पर गुरुवार को चातुर्मास के मंगल कलश की स्थापना के महोत्सव में जैन सहित अन्य समाजों के लोग उमड़े। श्रद्धालुओं की मौजूदगी में 61 कलशों की स्थापना कर नया कीर्तिमान बनाया है।
आवां की इस तपो भूमि के प्राकृतिक सौन्दर्य और रमणीयता ने भी दर्शनार्थियों को खासा लुभाया। इस अवसर पर मुनि पुंगव 108 सुधासागर के साथ, मुनि निष्कंप सागर, क्षुल्लक धैर्य सागर व गम्भीर सागर का आशीर्वाद लेने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा।
श्री शांतिनाथ दिगम्बर अतिशय क्षेत्र समिति के संयोजक संजय छाबड़ा, अध्यक्ष नेमीचन्द जैन व महामंत्री पवन कुमार जैन ने बताया कि चातुर्मास के मंगल कलश की स्थापना शास्त्रीय रीति-नीति और विधि-विधान से की गई।
शान्ति-धारा और नित्य अभिषेक, ध्वजारोहण, चित्रावरण व चरण-प्रक्षालन के कार्यक्रमों में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रवेश द्वार के सामने मुनि संघ के सान्निध्य में की ओर से ध्वजारोहण कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।
इस दौरान भगवान शान्तिाथ, महावीर स्वामी व तीर्थंकरों के साथ मुनि सुधासागर के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो गया। दीप प्रज्जवलन कर आयोजन की शुरुआत की गई। भगवान शांतिनाथ के बाद आचार्य शांति सागर, आचार्य ज्ञान सागर और मुनि पुंगव सुधासागर के गुरुवर आचार्य विद्यासागर का चित्रावरण के बाद मुनि संघ के पाद-प्रक्षालन मे श्रद्धालु उमड़ पड़े। राजस्थान पत्रिका के फेसबुक पेज पर भी पर इसका सीधा लाइव करने लोगों में खासी रूचि रही।
देशभर से उमड़े पूण्र्याजक
मुनि सुधासागर के ससंघ इस अमृतमय वर्षा-योग 2018 के आयोजन में तीर्थ क्षेत्र पर देश-भर के श्रद्धालु शामिल हुए। आरके मार्बल व्यवसायी अशोक पाटनी, राजेन्द्र के गोधा, हुकुम काका कोटा, जयन्ति परिवार अलवर, पन्ना लाल बेनाड़ा आगरा, सुरेश पाटनी, जमना लाल, गोपाल लाल, श्याम लाल जैन टोंक, एडवोकेट गोपाल लाल आदि समाज विभूतियों ने आयोजन में विशेष भूमिका निभाई। इसके अलावा विभिन्न प्रदेशों से श्रद्धालुओं ने शिरकत की।
मुनि हुए अभिभूत
मुनि सुधासागर ने प्रवचन में धर्म और ज्ञान की सरिता बहाई। इस दौरान वे आवां के लोगों की श्रद्धा से अभिभूत नजर आए। मुनि ने सबको आशीष देते हुए कहा कि लोगों की मध्यम आर्थिक स्थिति होने के बावजूद 32 स्थानीय परिवारों की ओर से कलश लेना इनकी अनन्य निष्ठा का परिचायक है।
मुनि ने चातुर्मास में गुरु की ऊर्जा से जीव-मात्र के कल्याण का सार बताते हुए उपवास, साधना और ध्यान पर प्रकाश डाला। आवां सुदर्शनोदय तीर्थ के तप का बखान करते हुए यहां फैल रही हरियाली और प्राकृतिक सौन्दर्य की सराहना भी की।
Published on:
27 Jul 2018 10:02 am
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