मल्होत्रा 1986 में अपने पिता का अंतिम संस्कार करने भारत आए। जब वे हरिद्वार गए तो वहां गंगा नदी की स्थिति देखकर डर गए। जंगलों को वहां जिस गति से काटा जा रहा था, उसे देखकर उन्हें काफी बुरा लगा। अभ्यारण्य बसाने के लिए उन्होंने उत्तरी भारत में जगह की तलाश शुरू की लेकिन कहीं भी मनचाही जगह नहीं मिल सकी। इस वजह से उन्हें काफी निराशा हुई।