5 सितंबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

एक अस्पताल ऐसा, जहां डॉक्टर नहीं आए तो चपरासी ही मालिक

बिना स्टाफ के अस्पताल में आना पसंद नहीं करता कोई, 10 में से 4 नियुक्त, उसमें से भी 2 ही कार्यरत, फलासिया क्षेत्र में स्थित है पीपलबारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र
2 min read
Google source verification
एक अस्पताल ऐसा, जहां डॉक्टर नहीं आए तो चपरासी ही मालिक

एक अस्पताल ऐसा, जहां डॉक्टर नहीं आए तो चपरासी ही मालिक

फलासिया . सरकार की ओर से नि:शुल्क दवा, नि:शुल्क जांच समेत कई तरह की चिकित्सा योजनाएं संचालित है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर स्थिति दयनीय है। बरसात के साथ ही जल जनित मौसमी बीमारियों के प्रकोप से हर कोई आहत है, वहीं सरकारी तौर पर चिकित्सा सुविधाओं का भारी अभाव है। इसी को लेकर राजस्थान पत्रिका ने हर गांव-कस्बे तक पहुंचकर पड़ताल कर रहे हैं। इसी कड़ी में पीपलबारा सीएचसी की रिपोर्ट-
पंचायत समिति के पीपलबारा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर स्वीकृत पदों के मुकाबले कर्मचारियों की भारी कमी है। इस पीएचसी में 10 पद स्वीकृत है, 4 नियुक्त और उसमें भी 2 ही कार्यरत हैं। महज एक डॉक्टर और एक चपरासी पीएचसी को चला रहे हैं।
पीपलबारा पीएचसी में चिकित्सक अरविन्द मीणा और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी सतीश मीणा के भरोसे ही पीएचसी का संचालन हो रहा है। जब यहां विभागीय आंकड़ों में 1 चिकित्सक, 2 मेलनर्स, 1 सुपरवाइजर महिला, 1 लेब टेक्नीशियन, 2 प्रसाविकाएं, 2 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की स्वीकृत हैं।

महिला कर्मचारी के अभाव में नहीं आती महिलाएं

ग्रामीण महिलाएं आमतौर पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं महिला चिकित्साकर्मी को ही बता पाती है। ऐसे में चिकित्सालय में महिला कर्मचारी की मौजूदगी भी जरुरी है, लेकिन पीपलबारा पीएचसी में एक भी महिला कर्मचारी नहीं है। प्रसाविका रुपादेवी का नाम यहां दर्ज है, लेकिन उन्हें डेपुटेशन पर अन्यत्र नियुक्त कर दिया है। ऐसे में महिलाएं अस्पताल में आने से ही कतराने लगी है। घटती प्रसव संख्या इसका उदाहरण है।

घटती गई रोगियों की संख्या
पीपलबारा पीएचसी पर स्टाफ की इतनी कमी है कि रोगी यहां उपचार कराने आते ही नहीं है। यहां पहले आसपास के गांवों से रोगी पहुंचते थे, तब संख्या अधिक रहती थी। अब स्टाफ नहीं होने से रोगी पीपलबारा आने के बजाय करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित मादड़ी पीएचसी जाते हैं। स्थिति ये है कि महज स्थानीय ग्रामीण ही आते हैं, बाकी आसपास के गांवों के लोग भी मादड़ी और झाड़ोल जाते हैं।

उच्चाधिकारियों को पता है

स्टाफ की कमी है। हमने कई बार उच्चाधिकारियों को इससे अवगत करवाया। यहां महज क्वादर व पीपलबारा के ही रोगी आते है। बाकी पास के गांवों के लोग भी मादड़ी पीएचसी जाते है। स्टॉफ की कमी दूर हो तो प्रसव और रोगियों का रुख भी पीपलबारा पीएचसी की ओर हो सकता है।
डॉ. अरविन्द मीणा, चिकित्साधिकारी, पीपलबारा पीएचसी

केंद्र का नाम - प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पीपलबारा
स्थापना - 16 वर्ष पूर्व

कर्मचारियों की संख्या - 1 चिकित्सक, 1 चतुर्थ श्रेणी
प्रतिदिन रोगियों की संख्या - 20 से 25

केंद्र से दूरस्थ - बेडनपाड़ा, जामून मादला
पेरीफेरी के गांव - क्वादर, दमाणा, बिजली, खाटीकमदी, सरादित, बेडनपाड़ा, लोडी मादड़ी, बलोलिया, कोल्यारा, देवीनवाड़ा, उमरिया।