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पिछोला में डूबा किशोर घंटों तक रहा गुमनाम, पहचाना तो निकला लाखों का वारिस

गोताखोर, पुलिस व चिकित्सकों ने बचाने का किया भरसक प्रयास

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mehmood

उदयपुर . शहर में पिछोला झील के गणगौर घाट पर सोमवार को नहाते समय एक बालक डूब गया। गोताखोरों ने बाहर निकालते हुए अपने स्तर पर उसे बचाने के भरसक प्रयास किए। कामयाबी नहीं मिलने पर पुलिस भी सरकारी वाहन से उसे लेकर एमबी चिकित्सालय की ओर दौड़ी, जहां चिकित्सकों ने भर्ती करते हुए उसे ऑक्सीजन देकर बचाने की खूब कोशिश की, लेकिन सभी के प्रयास विफल रहे। बच्चे के आखिरी सांस लेते समय उसके पास कोई अपना नहीं था। तीन घंटे तक उसकी पहचान नहीं हो पाई और जब पता चला तो वह लाखों की सम्पत्ति का मालिक ‘अनाथ’ निकाला।


मृतक महमूद (11) पुत्र अहमद हुसैन मंसूरी मूलत: ओसवाल भवन के सामने पोस्ट ऑफिस की गली में रहने वाला था। वह और उसकी बहन खेरून देहलीगेट निवासी अब्दुल सलीम के गोद आए थे। रविवार शाम को वह बिना बताए देहलीगेट पर एक विवाह समारोह में बारात के साथ चला गया, जो रातभर वापस नहीं लौटा। अब्दुल सलीम ने अंजुमन पदाधिकारियों को सूचना के साथ ही धानमंडी थाना पुलिस को गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दी। सुबह तक उसे ढूंढा लेकिन पता नहीं चला।


बच्चों के साथ नहाते समय डूब गया
इधर, महमूद सोमवार दोपहर को अन्य बच्चों को साथ गणगौर घाट पर नहा रहा था। गहराई में जाने पर वह अचानक डूब गया। लोगों ने इसकी सूचना पुलिस कंट्रोल रूम व गोताखोर को दी। सूचना पर पहुंचा गोताखोर छोटू हेला कुछ ही मिनटों में बालक को बाहर निकाल लाया। बालक की सांस चलती देखकर गोताखोर व अन्य लोगों ने पेट से पानी निकालकर उसे बचाने का प्रयास किया। सूचना पर घंटाघर थाना पुलिस को जाप्ता भी मौके पर पहुंचा। पुलिस की टीम उसे लेकर अस्पताल पहुंची। चिकित्सकों ने उसे बचाने का प्रयास किया लेकिन कुछ समय बाद ही उसने दम तोड़ दिया।

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3 घंटे बाद शिनाख्त
मृतक की पहचान तीन घंटे के बाद हो पाई। इससे पूर्व गणगौर घाट व उसके आसपास के क्षेत्र में पुलिस ने उसकी शिनाख्तगी के प्रयास किए लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। धानमंडी थाने में बच्चे की गुमशुदगी पर पुलिस ने अब्दुल सलीम को सूचना दी। सलीम ने जाकर उसकी पहचान की। उसने अंजुमन के पदाधिकारी भी वहां पहुंचे। मृतक का मंगलवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा।


पहले भी कई बार गया महमूद
समाजजनों का कहना है महमूद देहलीगेट में अब्दुल सलीम के मकान से पूर्व में भी चला गया। कई बार वह दो से तीन दिन के बाद लौटा, इस बारे में अंजुमन पदाधिकारियों को सूचित भी किया। एक बाद तो उसे रखने के लिए उन्होंने हाथ भी खड़े किए। बताया कि महमूद की दिमागी हालत तो ठीक थी लेकिन वह भोला था।