जॉब्स की टेंशन के साथ कैरेक्टर का चक्कर, नौकरी पाने के लिए चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने में युवाओं को छूट रहे पसीने

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By: madhulika singh

Published: 22 Jul 2018, 11:00 AM IST

उदयपुर. सरकारी व गैर सरकारी जॉब्स में बेदाग छवि वाले कर्मचारियों की चाहत और अपराध व फर्जीवाड़े को कम करने के लिए सेवा का अधिकार कानून के तहत चरित्र प्रमाण पत्र की अनिवार्यता की गई थी। इससे कम्पनियां तो फायदे में हैं लेकिन युवा इसकी अनिवार्यता से परेशान हो चुके हैं। नौकरी पाने के चक्कर में मात्र एक चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने के लिए युवाओं को ऑनलाइन आवेदन के बावजूद संबंधित कार्यालयों के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जबकि पहले स्कूल व कॉलेजों में मिलने वाले सर्टिफिकेट्स से ही काम चल जाता था लेकिन अब पुलिस वैरिफिकेशन के बाद ही प्रमाण पत्र प्राप्त होता है।

जिला विशेष शाखा में बढ़ा भार

सरकारी के साथ प्राइवेट फर्म भी बेदाग छवि वाले लोगों को लेना पसंद करती है। इसी के तहत हर जॉब में आवेदकों से चरित्र प्रमाण पत्र मांगा जाता है। इसी कारण चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने की मांग बढ़ गई है। यह काम यहां पुलिस की जिला विशेष शाखा के पास है और आए दिन चरित्र प्रमाण पत्र बनवाने वालों की संख्या बढऩे से शाखा का कार्य भी बढ़ गया है। पहले यह कार्य थानों में एसएचओ स्तर के अधिकारी ही करते थे पर अब पारदर्शिता के लिए संबंधित पुलिस अधीक्षक कार्यालय की जिला विशेष शाखा को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है।


वैरिफिकेशन की दो प्रक्रियाएं

जिला विशेष शाखा से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ समय से नौकरियों के लिए चरित्र प्रमाण पत्र के लिए पुलिस वैरिफिकेशन जरूरी कर दिया गया है। इसके तहत दो प्रक्रियाएं होती हैं। पहली जिसमें कोई संस्था या कार्यालय स्वयं ही अपने अभ्यथियों के लिए प्रमाण-पत्र जारी करने की मांग करता है जो कि नि:शुल्क होता है और दूसरा, अभ्यर्थी स्वयं या ऑनलाइन आवेदन करता है जिसके लिए उसे 200 रु. का पोस्टल ऑर्डर व प्रार्थना पत्र संलग्न करना होता है।

 

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एक महीने या हफ्ते का समय

लोक सेवा अधिकार के तहत छुट्टी छोडकऱ 28 दिनों में चरित्र प्रमाण पत्र बनना होता है, लेकिन अभ्यर्थियों की जरूरत को देखते हुए इसे हफ्ते भर में तैयार कर दे दिया जाता है। थाने की रिपोर्ट के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र बनता है। जिला पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी हस्ताक्षर होते हैं। ये प्रमाण पत्र 6 महीने तक वैध रहता है। यदि आप एक ही फर्म में काम कर रह होते हैं तो वह चलता है लेकिन अगर दूसरी फर्म में जॉइन करते हैं तो फिर से आपको उसी प्रोसेस से गुजरना होता है।

चरित्र प्रमाण पत्र का उद्देश्य
- बेदाग छवि वाला कर्मचारी

- नौकरियों में फर्जीवाड़े को रोकना
- अपराध की दुनिया से दूर

- जॉब में रहते हुए कोई अपराध कर भी जाए तो उसका पता लगाना आसान होगा। पुलिस व क पनी दोनों के पास ही उसकी पूरी डिटेल्स मौजूद होंगी जिससे वे उस तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
- अपराध की रोकथाम के लिए आवश्यक

यह बातें देखी जाती हैं-

- कोई कानूनी मुकदमा दर्ज तो नहीं हुआ।
- किसी तरह के मुकदमों के अलावा छोटे-मोटे झगड़ों, शांति भंग, गुंडा एक्ट, वारंट में पेंडेंसी तो नहीं चल रही है।

- जिले में नागरिक के नाते चरित्र कैसा रहा
- मूल निवासी कहां के हैं

- वर्तमान में कहां रह रहे हैं
- पिछले 5 वर्ष में कहां-कहां रहे?

- जहां रहे संबंधित थाना क्षेत्र में कोई मुकदमा तो नहीं रहा।
- आप किसी राजनीतिक पार्टी के तो नहीं हैं?

पिछले दस महीनों में शाखा ऑन लाइन आए आवेदन-

कुल आवेदन- करीब 15 हजार
निस्तारण- करीब 13 हजार

madhulika singh Reporting
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