
मोहम्मद इलियास/उदयपुर
नगर निगम की ओर से बरसों पहले किराए पर दी गई दुकानें व कियोस्क दूसरों के पास सबलेट होने के बावजूद नगर निगम न तो उन्हें वापस ले पाया न हीं उनका कोई किराया बढ़ा पा रहा। किराएदार निगम की प्रोपर्टी को किराए पर देकर 10-30 हजार रुपए कमा रहा है और निगम के खाते में सिर्फ 300 से 500 रुपए ही जमा हो रहे हैं। निगम ने ऐसे किराएदारों की सूची बनाई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आज तक कुछ नहीं कर पाया। पूर्व में नई उपविधि बनाकर मौके की दुकानों को वर्तमान जमीन की वेल्यू के हिसाब से किराए बढ़ाने का प्लान भी बना, लेकिन यह फाइल भी दफ्तर दाखिल हो गई।
नगर निगम की अभी शहर के दूधतलाई, सुखाडिय़ा सर्कल, टाउनहॉल, सहेलियों की बाड़ी, चेतक, सूरजपोल, जगदीश चौक, हाथीपोल सहित कई मौके की जगह पर 93 कियोस्क व करीब 70 दुकानें हैं। यह कियोस्क व दुकानें महज 200 से लेकर 2500 रुपए प्रतिमाह किराए पर चल रही है। बरसों से काबिज किराएदारों ने नियमों का उल्लंघन कर उनका हुलिया ही बदल दिया। इनमें तोडफ़ोड़ व नए निर्माण के साथ ही दूसरों को किराए पर चढ़ा रखा है।
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सर्वे में नहीं मिले मूल किराएदार
निगम की टीमों ने अपनी सम्पत्तियों के तहत दुकानों का सर्वे किया तो अधिकांश जगह पर मूल किराएदार ही नहीं मिले। टीम ने जांच की तो पता चला कि मूल किराए के बाद कई सम्पत्ति सबलेट होकर आगे से आगे तीन से चार नए किराएदारों के पास चली गई। निगम का उनसे कोई लेना देना ही नहीं था। कुछ तो ऐसे भी थे, जो निगम में अनुज्ञा शुल्क जमा करवा रहे थे, लेकिन खुद ने वहां दुकानों पर महंगी रेट पर दूसरों को दुकानें किराए पर दे रखी थी।
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राजस्व समिति की बैठक में निगम की सम्पत्तियों से राजस्व बढ़ाने का निर्णय लिया था। किराए की सम्पत्तियों पर भी किराए बढ़ाने को लेकर मंथन चल रहा है इसकी उपविधि बनाई जा रही है।
अरविंद जारोली, राजस्व समिति अध्यक्ष
Published on:
30 Oct 2023 09:42 pm
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