26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

उदयपुर में यूआईटी ने 18 साल तक नहीं सौंपा कब्जा, स्थायी लोक अदालत ने दिया ऐसा आदेश

स्थायी लोक अदालत में इसे गंभीरता से लेते हुए यूआईटी को दोषी माना।

2 min read
Google source verification
court order for uit udaipur

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर . यूआईटी ने एक खातेदारी जमीन से कुछ हिस्सा लेकर एवज में जारी किए भूखंड का कब्जा व आवंटन पत्र परिवादिया को नहीं देकर मामले को 18 साल तक न्यायालय में उलझाया रखा जबकि विवाद से उसका कोई लेना-देना नहीं था। स्थायी लोक अदालत में इसे गंभीरता से लेते हुए यूआईटी को दोषी माना। स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष के.बी.कट्टा, सदस्य सुशील कोठारी व ब्रजेन्द्र सेठ ने यूआईटी को आदेश दिया कि वह परिवादिया को सबसिटी सेन्टर योजना के अधीन पूर्व में आवंटित कार्नर का निर्विवाद व्यावसायिक भूखंड एक माह में आवंटित कर भौतिक कब्जा संभलाएं।

बतौर क्षतिपूर्ति परिवादिया को वह 3 लाख रुपए एक मुश्त 10 प्रतिशत ब्याज से दो माह में भुगतान करें। भूखंड का कब्जा संभालाने तक यूआईटी परिवादिया को प्रतिमाह 5 हजार रुपए अलग दे। एक माह के अंदर यूआईटी अगर न्यायालय के आदेश की पालना नहीं कर करती है तो सबसिटी योजना स्कीम के अधीन अन्य भूखंड की नीलामी स्थगित रहेगी। खारोल कॉलोनी निवासी सुनीता पत्नी महेन्द्र सिंह तलेसरा बनाम यूआईटी जरिये सचिव के इस प्रकरण में न्यायालय ने स्पष्ट लिखा कि वर्ष 2000 से उत्पन्न भूखंड का यह विवाद अब 18 वर्ष का होकर कानूनी बालिग की स्टेज पर आ चुका है, जिसे अब भी विपक्षी विभाग अंतिम रूप से निस्तारण का आशय न रखकर उच्चतम व उच्च न्यायालय के निर्णय बाद तक जिंदा रखना चाहता है।

वह भी ऐसी स्थिति में जब परिवादिया का लंबित विवाद से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है। प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अधीन यह आवश्यक हो गया है कि विपक्षी के विरुद्ध सख्त आदेश पारित किया जाए। लम्बी अवधि के दौरान आग्रह पर भी विभागीय त्रुटि को दुरुस्त नहीं करने के न्यायालय ने विभागीय जांच के बाद क्षतिपूर्ति राशि संबंधित अधिकारी, कर्मचारी से वसूल कर पुन: राजकोष में जमा करवाने के आदेश दिए। साथ ही आदेश की एक प्रति प्रमुख शासन सचिव स्वायत्त शासन नगरीय विकास एवं आवसन विभाग को देने के आदेश दिए।

यह था मामला : परिवादिया सुनीता तलेसरा ने वाद में बताया कि सबसिटी योजना सविना में स्वयं की खातेदारी व कब्जे की खसरा नम्बर 147/148 कुल 0.0600 भूमि है। यूआईटी के आग्रह पर इस भूमि का 1/5 वां हिस्सा 14 मार्च 97 को निशुल्क समर्पित करवा पंजीयन करवा दिया। भूमि विपक्षी के नाम राजस्व अभिलेख में दर्ज कर दी गई। विपक्षी ने इसी योजना के अधीन समर्पित की गई भूमि का 12 प्रतिशत व्यावसायिक एवजी भूखंड के रूप में परिवादिया को देना स्वीकार किया था। आवंटन पत्र 1 दिसम्बर 2000 के जरिये सबसिटी सेन्टर योजना एल ब्लॉक में भूखंड संख्या 142 क्षेत्रफल 153.9 वर्गफीट का आवंटन पत्र प्रार्थियां के नाम पर जारी किया गया।

साइट प्लान शुल्क, टाइप डिजाइन डिमार्केशन शुल्क एवं 10 प्रतिशत कार्नर चार्जेज के रूप में 3625.25 जमा करवाए गए। 22 जुलाई 2002 को यूआईटी ने 1734 रुपए लीज राशि मांग की गई। लीज डीड के विलम्ब शुल्क सहित 16160 रुपए 6 अप्रेल 2016 को जमा करवाए। यूआईटी ने दी गई भूमि की एवज में जारी भूखंड का भौतिक कब्जा आज तक विपक्षी को नहीं संभलाया, न ही उसकी लीज डीड विपक्षी की ओर से जारी की गई। न्यायालय में आवेदन करने पर यूआईटी ने सुलह निस्तारण का प्रयास किया जो विफल रहे। यूआईटी ने उसी जगह पर गत जनवरी में भूखंडों की नीलामी बाबत सूचना प्रसारित की लेकिन परिवादी को कब्जा नहीं दिया। यूआईटी ने जवाब में बताया कि उक्त भूखंड यूआईटी के नाम दर्ज है किन्तु उक्त आराजी के बाबत एक प्रकरण वक्तीबाई बनाम यूआईटी हाइकोर्ट में विचाराधीन है एवं प्रकरण से प्रभावित भूमि पर स्थगन आदेश प्रभावी है।

बड़ी खबरें

View All

उदयपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग