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आठ माह अंधेरे में डूबी रही मेवाड़़ की ‘विश्वविरासत’

कुम्भलगढ़ में एएसआइ की लापरवाही को भुगत रहे लाखों सैलानी
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kumbhalgarh

आठ माह अंधेरे में डूबी रही मेवाड़़ की 'विश्वविरासत',आठ माह अंधेरे में डूबी रही मेवाड़़ की 'विश्वविरासत'

जितेन्द्र पालीवाल @ उदयपुर. यूनेस्को की विश्वविरासत सूची में शुमार कुम्भलगढ़ पिछले आठ महीनों से अंधेरे में डूबा रहने के बाद फिर से रोशन होने लगा है। दुर्ग की देखरेख के लिए जिम्मेदार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने यहां अण्डरग्राउण्ड बिजली लाइन बिछाने के काम में अपेक्षा से ज्यादा वक्त लगा दिया। यहां दुर्ग पर रोशनी ही नहीं, अक्सर लाइट एण्ड साउण्ड सिस्टम बंद रहने से भी हजारों सैलानी हर साल निराश लौट जाते हैं।
एएसआइ के अधीन संरक्षण में आने के बाद पूरे दुर्ग परिसर में शुरुआती दौर में बिछाई गई बिजली लाइन जगह-जगह से फॉल्ट होने पर कई बार रोशनी नहीं हो पाती थी। कई बार एक-एक पखवाड़े तक बिजली बंद रहने लगी। पूरी लाइन खराब होने पर एएसआइ ने पूरे दुर्ग परिसर में बिजली लाइनें भूमिगत करने का निर्णय लिया। आठ माह पूर्व दुर्ग पर प्रतिदिन शाम को लाइट एण्ड साउण्ड शो के बाद करीब 20 मिनट तक होने वाली लाइटिंग बंद कर दी गई। बीच में कभी-कभार चलती, तो कभी आपूर्ति में बाधा के कारण कई दिनों तक बंद रहने लगी। इस समस्या से स्थायी निजात पाने के लिए एएसआइ ने भूमिगत केबल बिछाने का काम शुरू किया। इस काम में इतनी देरी लगी कि लगभग आठ महीने तक रोशनी ज्यादातर मौके पर बंद ही रही।


पर्यटन विभाग ने लिखे कई पत्र
पर्यटन विभाग के उदयपुर स्थित उपनिदेशक कार्यालय ने एएसआइ के जोधपुर स्थित सर्कल कार्यालय को कई बार चिट्ठियां लिखकर पर्यटकों के लिए दुर्ग पर रोशनी शुरू कराने का आग्रह किया। आठ महीनों बाद भूमिगत केबल का काम खत्म होने पर दो दिन पहले दुर्ग फिर से जगमगाने लगा है।


लाइट एण्ड साउण्ड शो में भी अंधेरगर्दी
देश-दुनिया से यहां आने वाले सैलानियों के लिए दुर्ग में सूर्यास्त के बाद आरटीडीसी की ओर से करीब 45 मिनट का लाइट एण्ड साउण्ड शो चलता है, जिसमें पूरे दुर्ग पर स्पॉट लाइट के जरिये हरेक कालखण्ड का कथानक प्रस्तुत किया जाता है। भीड़ ज्यादा होने पर यह दो बार भी चलाया जाता है। इसमें मेवाड़ के शासक राणा कुम्भा द्वारा दुर्ग का पुनर्निर्माण, महाराणा प्रताप का जन्म, बाल्यकाल, कुम्भा की पुत्र उदा के हाथों हत्या, औरंगजेब द्वारा अधीनता स्वीकारने व संधि का दबाव व अन्य कई कालखण्डों को सैलानी देखते-समझते हैं। पिछले साल जनवरी में भी एक पखवाड़े तक शो बंद रहा था। कई बार बिजली बिल का भुगतान नहीं होने से कनेक्शन तक कट जाता है। दुर्ग में प्रतिमाह करीब सात हजार सैलानी शो देखने आते हैं।


एक दिसम्बर से शुरू होगा फेस्टिवल
राज्य पर्यटन विभाग की ओर से एक दिसम्बर से तीन दिवसीय कुम्भलगढ़ फेस्टिवल भी शुरू होने वाला है। ऐसे में आठ माह बाद रोशनी व्यवस्था बहाल होने से सैलानी सुनहरी आभा में नहाए दुर्ग को देखने का लुत्फ ले सकेंगे।

कुम्भलगढ़ में आते हैं इतने देसी-विदेशी पर्यटक
वर्ष उदयपुर कुम्भलगढ़
2015 279363
2016 380772
2017 451550
2018 533105
2019 522096
(अक्टूबर 2019 तक के आंकड़े)

छवि खराब होती है
विश्वविरासत सूची में शामिल कुम्भलगढ़ में आ रहे देसी-विदेशी पर्यटकों में भारत की सरकार की रेपुटेशन खराब होती है। पर्यटन विभाग व एएसआइ को भी नीचा देखना पड़ता है। बार-बार ऐसी बाधाएं अच्छी बात नहीं है। अब लाइटिंग सुचारू रही तो फेस्टिवल की शोभा बढ़ेगी।
शिखा सक्सेना, उप निदेशक, पर्यटन विभाग