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उदयपुर में दीयों को लेकर चल रहा यह क्रेज, पढ़िए पूरी खबर…

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लुभा रहे डिजाइनर दीये व मोमबत्तियां, देखें तस्वीरें

प्रमोद सोनी/उदयपुर. दीयों के बिना दीपावली की कल्पना नहीं हो सकती। दीये दीपावली त्योहार का मुख्य शृंगार है। अगर घर की चौखट पर दीयों से शृंगार न हो तो शायद लक्ष्मी जी भी उस चौखट पर पैर नहीं रखती। इसलिए दीयों का होना तो जरूरी है। पर अब पहले वाला जमाना नहीं रहा इसलिए दीये भी साधारण नहीं रहे। मार्केट में तरह-तरह के डिजाइनर दीये उपलब्ध हैं। इनमें प्लास्टिक से लेकर मिट्टी, टेराकोटा, मोम तक सभी तरह के दीये मिल जाएंगे।

डिजाइनर दीये

मार्केट में डिजाइनर दीये आए है। इनमें मिट्टी, प्लास्टिक व मोम के दीयों में कई तरह की आकर्षक डिजाइंस हैं। मिट्टी के दीयों में फूलों के शेप से लेकर स्क्वायर, गोल, ट्राइंगल, स्टार शेप आदि तरह के दीये मिल रहे हैं। इनकी ये डिजाइंस ही इन्हें ज्यादा आकर्षित बना रही हैं। गुजरात के टेराकोटा के दीये जो डिजाइन में बने हुए है वह 10 रुपये के चार दीयें, कलर वाले 60 रुपये के 12 दीये बिक रहे है। वही टेराकोटा के दीये जो बंगाल से भी मंगवाए है। यह विभिन्न कलर में है व थाली व दीये बने हुए है जो 100 से 150 रुपये तक बाजार में बिक रहे है। यह दीपक लोगों को आकृषित भी कर रहे है।

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वही शहर के कुम्हार के हाथों बने मिट्टी के दीपक 10 रुपये के 10 व बाहर से आए दीये 10 रूपये के 7 बिक रहे है। लाजवाब आकर्षक मोमबत्तियां दीपावली की जगमग दीयों के साथ मोमबत्तियां भी करती हैं। मोमबत्तियों में भी विभिन्न डिजाइनर मोमबत्तियां बाजार में उपलब्ध हैं। दुकानदारों के अनुसार, कुछ मोमबत्तियां ऐसी भी हैं जिन्हें घर के अंदर सुंदर तरीके से सजाया जा सकता है। ये मोमबत्तियां घर को और अट्रेक्टिव लुक देंगी।
वैक्स से बनी मोमबत्तियों में गुलाब के फूल, बेलवैक्स मोमबत्तियों के अलावा लोगों को जैल मोमबत्तियां ज्यादा लुभा रही हैं। ये जैल मोमबत्तियां कांच के ग्लासेज में होती हैं जो शो पीस का काम भी करती हैं।सजावटी लैम्प व झालरें घर के बाहर सजाने के लिए सजावटी लैम्प भी बिकने के लिए आए हैं। ये कई डिजाइंस में उपलब्ध हैं। इनसे एक तो कलरफुल रोशनी होती है और दूसरा ये कीट-पतंगों की समस्या भी कम पैदा करते हैं।

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वहीं, सड़कों पर कपड़े की बनी झालरें जिनमें चिडिय़ा, हाथी-घोड़े व कठपुतलियों की लोगों को ज्यादा आकर्षित कर रही हैं। वहीं, कांच व अन्य तरह की सजावटी झालरें भी पसंद की जा रही हैं। इनके अलावा सजावटी आयटम्स लक्ष्मी-गणेश की तस्वीरें, तरह-तरह की रंगोली, शुभ-दीपावली की विशेष लिखी हैं झालर भी आकर्षित कर रही हैं।कम हुआ मांडणाअब मांडणे की परम्परा शहरों में धीरे-धीरे कम हो चुकी है। बहुत से घरों में मांडणे के स्टीकर लगा कर ही काम चला लिया जाता है। बाजारों में तरह-तरह की डिजाइन के मांडणे उपलब्ध हैं। सूरजपोल स्थित डेकोरेटिव आयटम शॉप के एक संचालक मनोहरलाल बताते हैं कि इन दिनों लोगों के पास इतना समय नहीं होता कि वे मांडणे, मिठाइयां आदि बना सकें। अधिकतर परिवारों में महिलाएं भी जॉब करती हैं। ऐसे में सिर्फ दो-तीन दिन ही फेस्टिवल की तैयारी के लिए मिलते हैं। इसलिए घर के आंगन को सजाने के लिए कई लोग रेडिमेड मांडणे भी खरीदते हैं।

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मावे की जगह ली ड्रायफ्रूट्स ने
चेतक सर्कल स्थित मिठाई विक्रेता अनिल बजाज ने बताया की अधिकतम काजू बादाम की मिठाईयां ही बिक रही है। जिसमें काजू अमरूद, डायमंड केक काजू , काजू एपल, काजू कलश, काजू पिस्ता कोण, काजू केसर पिस्ता रोल्स, काजू बाइट्स, काजू एवं ड्रायफ्रूट्स की मिठाई जो 900 रु किलो से लेकर 1060 बाजार में बिक रही है। वही विशेष ड्रायफ्रू्सट डिब्बे, पांच वेरायटी में ड्रायफ्रूट्स की थाली व ड्रायफ्रुट्स बॉक्स जो 780 रूपये से लेकर 1450 रूपये तक बिक रहे है। वही मिठाई के डिब्बों पर मतदान जागरूकता के लिए म्हारो केणो वोट देणो के स्टिकरस लगाए गए है।