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उदयपुर में वकील बोले-कमेटी नहीं हाइकोर्ट चाहिए…विरोध की चेतावनी पर सरकार ने फिर भेजा एक खत

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उदयपुर में वकील बोले-कमेटी नहीं हाइकोर्ट चाहिए...विरोध की चेतावनी पर सरकार ने फिर भेजा एक खत

उदयपुर . शहर में हाइकोर्ट बेंच की स्थापना का मुद्दा राजनीति में उलझ गया है। शुक्रवार को उदयपुर जिले में प्रवेश कर रही गौरव यात्रा के विरोध की चेतावनी पर सरकार ने फिर आनन-फानन में एक और पत्र जारी कर पांच दिन में कमेटी गठन का आश्वासन दिया है। इस पत्र के बाद संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के सुर बदल गए हैं।उल्लेखनीय है कि पूर्व में 90 दिन तक धरना-प्रदर्शन व आमरण अनशन के बाद सरकार ने वार्ता कर कमेटी गठन का आश्वासन दिया। इसको लेकर जब जोधपुर व अन्य जगहों पर विरोध के स्वर मुखर हुए तो सरकार ने कमेटी ही नहीं बनाई। सरकार के रवैये के विरोध में दोबारा विरोध-प्रदर्शन होने पर एक लाइन का पत्र भेजकर कहा कि कमेटी का प्रक्रियाधीन है। इसके बाद लम्बा समय गुजरने के बाद भी कमेटी का गठन नहीं होने पर बुधवार को हर 7 तारीख को होने वाले विरोध प्रदर्शन में अधिवक्ताओं ने सीएम की उदयपुर में यात्रा की विरोध का निर्णय किया तो संयुक्त शासन सचिव, विधि ने फिर से एक लाइन में पत्र जारी कर कहा कि पांच दिन में कमेटी का गठन कर दिया जाएगा। इधर, विधि मंत्री इस कमेटी में जोधपुर, बीकानेर, कोटा व अन्य जगहों के अधिवक्ताओं को भी जोडऩे की बात कह रहे हैं जबकि उनका इस क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं है।

अधिवक्ताओं का कहना है कि सीएम आदिवासी क्षेत्र का दौरा कर रही है और आदिवासियों दिवस पर आदिवासियों के लिए हाइकोर्ट से बढिय़ा कोई तोहफा नहीं हो सकता। इधर, गुरुवार को अधिवक्ताओं ने धरना प्रदर्शन के साथ ही देहलीगेट पर चक्काजाम किया। मानव-शृंखला बनाते हुए कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रामकृपा ने बताया कि देहलीगेट पर एक अधिवक्ता शक्तिसिंह भाटी ने वरिष्ठ अधिवक्ता व उनके साथ अभद्रता व गाली-गलौज की। इस पर बार कार्यकारिणी व वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने निर्णय लेकर उन्हें बार सदस्यता से निलंबित कर दिया।

सरकार कमेटी में सबको शामिल कर रही है तो लगता है कि उनकी अन्य जगह भी हाइकोर्ट बेंच खोलने की मंशा है। जोधपुर के विरोध के चलते कमेटी में देरी हुई। सरकार ने पांच दिन के भीतर कमेटी के गठन की बात कही है। सर्वसम्मति निर्णय के अनुरूप शुक्रवार को कोर्ट में सदबुद्धि यज्ञ किया जाएगा।

शांतिलाल चपलोत, हाइकोर्ट संघर्ष समिति संयोजक

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान विरोध के स्वर मुखर होने से तो वहां से दूसरा लेटर आया है लेकिन हकीकत यह भी है कि इतना वर्षों के संघर्ष के बाद हमारा मुद्दा कागजों में नहीं था लेकिन अब यह कागजों पर आने के साथ ही यह पत्र आया है। सभी को शामिल कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी।

शांतिलाल पामेचा, हाइकोर्ट संघर्ष समिति सचिव

सरकार को केवल उदयपुर के लिए कमेटी बनानी चाहिए थे। कमेटी बनाने की बात इसलिए निकली थी कि उदयपुर अनुसूचित क्षेत्र में आता है। बीकानेर, कोटा, जोधपुर का इस प्रावधान से लेना-देना नहीं है। उदयपुर में खंडपीठ हो सकती है। यात्रा को शांतिपूर्वक निकालने के लिए ही यह पत्र जारी हुआ है। मुख्यमंत्री खुद कहती है कि आंदोलन नहीं करना पड़ेगा और अब कमेटी के नाम पर भटकाव है।

रमेश नंदवाना हाईकोर्ट संघर्ष समित अध्यक्ष

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हम कमेटी की मांग नहीं कर रहे है। हम हाइकोर्ट या सर्किट बेंच की मांग कर रही है। इसके लिए जिस स्तर पर संघर्ष करना पड़ेगा वो करेंगे।

रामकृपा शर्मा, बार एसोसिएशन अध्यक्ष

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