
धीरेन्द्र जोशी /उदयपुर. आप में कौन है, जो विदेशी है। हम पुरखों से हिन्दुस्तानी है। मालिक एक, वतन एक, पुरखे एक फिर हम अलग कैसे? हम बाप- दादाओं को देखेंगे तो मिलेगा कि कोई श्यामलाल है तो कोई रामलाल। यह बात मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की ओर से आयोजित हकीम खां सूरी संभागीय मुस्लिम सम्मेलन में मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने ‘मुल्क की तरक्की में मुसलमानों की हिस्सेदारी’ विषय पर चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि गाय का गोश्त खाने की बात किसी भी धर्म में नहीं कही गई है।
कुरान में भी कहा गया है कि गाय का गोश्त बीमारी है, दूध शिफा। मक्का और मदीना में भी गाय का गोश्त वर्जित है। फिर भी कोई गाय का गोश्त खाता है तो वह शैतान है। इस अवसर पर उन्होंने मंच की गैर सरकारी पेंशन योजना, शिक्षा सहायता योजना, अनाज बैंक योजना पर प्रकाश डाला।
मंच पर भाजपा शहर जिलाध्यक्ष दिनेश भट्ट, मंच के संभागीय संयोजक इरशाद चेनवाला, रजनी डांगी, मेवाड़ महामंडलेश्वर महंत रास बिहारी, जैन समाज के अध्यक्ष सुमतिलाल दुदावत, सिख समाज के धर्मगुरु ज्ञानी अजित सिंह, ईसाई मिशनरीज के जार्ज ए थॉमस, भाजपा जिला महामंत्री डॉ. किरण जैन आदि मौजूद थे। कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. इश्याक ने कुरान की तिलावत से किया। राष्ट्रीय संयोजक अबु बकर नकवी ने अतिथियों का स्वागत दिया। संचालन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. जिनेन्द्र शास्त्री ने किया।
उदयपुर . पश्चिम ने भारतीय जीवन मूल्यों का सदैव अनुसरण किया है। भारत में कोई गरीब भिखारी नहीं हुआ करता था। घरों में ताले भी नहीं लगते थे, मगर जैसे-जैसे मूल्य आधारित समाज विघटित होता गया, नैतिकता का हृास होता गया, मानवता गिरती गई, वैसे-वैसे सामाजिक पतन भी आता गया।
यह बात सुखाडिय़ा विवि के विवेकानंद सभागार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य इन्द्रेश कुमार ने कही। वे दो दिवसीय प्रवास पर गुरुवार शाम को गुरुजी व्याख्यानमाला के अंतर्गत मुख्य वक्ता के रूप में जीवन मूल्य आधारित विकास पर उद्बोधन दे रहे थे। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन तो श्रेष्ठ मानवीय मूल्यों की खान है तथा इन्हीं श्रेष्ठ जीवन मूल्यों के कारण भारतीय संस्कृति का फैलाव विश्व के कई देशों तक था। आज भी हम उन जीवन मूल्यों का अनुसरण कर भारत को पुन: विश्व गुरु ? के रूप में स्थापित कर सकते हैं। मनोज जोशी ने बताया कि शनिवार को सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय केंद्रीय छात्रसंघ की ओर से युवा सम्मलेन में इन्द्रेश कुमार ‘युवा भारत का भविष्य’ विषय पर युवाओं के समक्ष विचार रखेंगे।
पाकिस्तान गए मुस्लिम परेशान
हिन्दुस्तान से पाकिस्तान गए 90 लाख मुसलमानों की संतानें आज दु:खी है। यह मुल्क के साथ गद्दारी करने का नतीजा है। वहां के मूल निवासी भारत के विभिन्न हिस्सों से गए मुसलमानों को महाजिर कहते हैं। अब वे न तो यहां के रहे और न ही पाकिस्तान के। भारत में रहकर पाकिस्तान का झंडा फहराने वाले लोगों के खिलाफ उठना होगा।
भारत आए शासकों ने क्या दिया?
इंद्रेश कुमार ने राम मंदिर मुद्दे पर चर्चा में कहा कि बाबर ने मस्जिद का नाम तक अपने नाम पर रखा, जबकि ऊपर वाले के नाम पर रखना चाहिए। भारत में आए शासकों ने मुस्लिमों के लिए क्या किया? न तो यूनिवर्सिटी खोली, न ही अस्पताल। बल्कि यहां के मुस्लिम और हिंदू कारीगर जो ढांका की मलमल बनाने के लिए प्रसिद्ध थे के हाथ कटवा दिए।
जीना नहीं, अच्छा जीना चुनौती
आरएनटी मेडिकल कॉलेज के सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य अतिथि इंद्रेश कुमार ने कहा कि जीना चुनौती नहीं, अच्छा जीना चुनौती है। पढ़ा-लिखा होने के साथ ही समझदार होना जरूरी है। व्यावहारिकता नहीं आए तो पढकऱ ज्यादा फायदा नहीं। उन्होंने कहा कि तरक्की के बाद गरीबों की सेवा करें जिससे पुण्य प्राप्त होता है। विदेश भ्रमण और अन्य कार्यों से कुछ मिलने वाला नहीं।
Published on:
27 Apr 2018 02:27 pm
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