
video: उदयपुर में हुई मासूमों की मौत को लेकर चिकित्सा मंत्रालय से गठित विशेषज्ञ दल उदयपुर आएगा
डॉ. सुशील सिंह चौहान/ उदयपुर. संभाग के सबसे बड़े महाराणा भूपाल राजकीय चिकित्सालय की बाल चिकित्सा इकाई में 9 बच्चों की हुई मौत के मामले की चिकित्सा मंत्रालय से गठित तीन सदस्यीय जांच दल जांच करेगा। जल्द ही टीम उदयपुर आएगी। दूसरी ओर खुद पर लगे दाग को मिटाने के लिए आरएनटी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने पांच सदस्यीय चिकित्सकों का दल गठित किया। इसमें पीडियाट्रिक डॉ. प्रदीप मीणा, डॉ. महेश दवे, डॉ. संगीता सेन, डॉ. रूपा शर्मा एवं डॉ. सुशील साहू शामिल हैं। ये दल मौत के कारणों, उपचार के दौरान दी गई दवाइयों से लेकर व्यवस्था की बारीकी से जांच कर रिपोर्ट देगा। मामले को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय एवं चिकित्सा मंत्री खुद भी गंभीर हैं।
दूसरी ओर मौतों को लेकर खुद को पाक साफ बताने में लगे वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी अब खुद की ही रिपोर्ट में घिरते दिख रहे हैं। एक मामले में खुद का बचाव कर रहे वरिष्ठ शिशु चिकित्सा अधिकारी उनके कार्यालय रिपोर्ट के अनुसार 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) यानी छुट्टी के दिन भी 9 मौतों को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं दे पा रहे हैं। इन मौतों में भी 5 नवजात और ४ अलग बीमारियों से ग्रस्त बच्चे शामिल थे। रिकॉर्ड के अनुसार माह में सबसे ज्यादा मृत्यु गणतंत्र दिवस पर हुई है। इसकी एक वजह विभागीय ओहदेदारों की ड्यूटी के प्रति सुस्ती भी आंकी जा सकती है।
हावी रहे 'यमराज
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश के तहत वरिष्ठ चिकित्सकों की कथित उदासीनता ने 9 माताओं की गोद सूनी हो गई थी। इस दिन रिकॉर्ड में सी यूनिट सक्रिय थी, जिसके प्रभारी डॉ. आरएल सुमन थे, जबकि उनके अधीनस्थ स्टाफ में शामिल डॉ. मोहम्मद आसिफ एवं डॉ. अनुराधा सनाढ्य इस यूनिट का मूल हिस्सा हैं। खास बात यह है कि सक्रियता के बावजूद इस दिन सी यूनिट नर्सरी में 3 नवजात, डॉ. सुरेश गायेल की ए यूनिट दो नवजात काल का ग्रास हुए। इसी तरह पीडियाट्रिक आईसीयू संख्या 4 में 2 और न्यूनेटल आईसीयू में 2 बच्चों की मौत हुई थी।
खंगाले मौत के राष्ट्रीय आंकड़े
चिकित्सालय प्रशासन की दलील है कि देश में राष्ट्रीय मौतों का रेसो 4.92 फीसदी है, जबकि बीते वर्ष में बाल चिकित्सालय में इन मौतों का औसतन रेसो 3.3 फीसदी रहा है। वहीं जनवरी 2019 का औसतन रेसो 3.3 फीसदी रहा है। आंकड़े बताते हैं विकसित देश वियतनाम में मौत का औसतन रेसो 5.03 फीसदी है। ऐसे में चिकित्सालय इन रेसो के हिसाब से खुद का बचाव कर रहा है। दूसरी ओर देखे तो चिकित्सालय ने आइपीडी में प्रतिदिन भर्ती होने वाले हीमोफिलिया रोगियों को औसत में बाहर नहीं किया है। नवजात मौतों को लेकर इस औसत से बाहर रखा है।
जयपुर के दल में होंगे शामिल
पत्रिका की खबरों को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा मंत्रालय ने जयपुर से एक पीडियाट्रिक्स, एक एनेस्थेटिक व एक फिजिशियन का दल गठित किया है। ये दल जल्द ही उदयपुर पहुंचेगा। दल के स्तर पर बीमारियों से हुई मौतों, नवजात की मौतों और हीमोफिलिया रोगियों को अलग-अलग कर बारीकी से जांच की जा सकती है।
जांच कमेटी गठित
पांच सदस्यीय चिकित्सा टीम बनाई गई है। ये दल मौत के कारणों की रिपोर्ट देगा। ये रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी।
डॉ. डी.पी.सिंह, प्राचार्य व नियंत्रक, आरएनटी मेडिकल कॉलेज
Published on:
01 Feb 2019 12:11 am
