
बरसाती बौछारों से खिले चेहरे, लेकिन बिजली की समस्या ने बढ़ाई चिंता
उदयपुर/ लूणदा. क्षेत्र सहित समीपवर्ती गांवों में शुक्रवार को हुई रिमझिम से मौसम सुहावना रहा। बरसाती बूंदों से गीली होती खेत की मिट्टी देखकर किसानों के चेहरे खिले दिखे तो बहुत सी जगहों पर किसानों ने बैल, हल लेकर जुताई और बुवाई कार्यों में दिलचस्पी दिखाई।
दूसरी ओर बौछारों के बीच बार-बार होने वाली अघोषित बिजली कटौती से स्थानीय बिजली उपभोक्ताओं के चेहरे पर निराशा दिखाई दी। एक बार फिर लोगों के बीच अजमेर विद्युत वितरण निगम की कार्यप्रणाली को लेकर संदेह की सुई घूमने लगी। बरसात पूर्व लाइनों की मरम्मत के नाम पर होने वाली कटौती को लेकर लोग सवाल खड़े करने लगे।
इससे पहले लूणदा, धाकड़ों का खेड़ा, संग्रामपुरा, अमरपुरा जागीर सहित अन्य समीपवर्ती इलाकों में दोपहर 2 बजे के बीच हल्की से मध्यम बरसात दर्ज की गई।
एक बार में एक मरम्मत
विद्युत निगम की खामियों को लेकर राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि वितरण निगम और प्रसारण निगम के बीच तालमेल की कमी के चलते 132 केवीए जीएसएस की मरम्मत के दौरान वितरण निगम के स्तर पर 33/11 केवीए क्षमता वाली लाइनों की मरम्मत नहीं की जाती है। एक उदाहरण के तौर पर 15 से 19 जून के बीच 132 केवीए झुझपुरा की ओर से लाइन मरम्मत के नाम पर कटौती की गई। तब 33 केवीए लाइन धाकड़ों का खेड़ा, अमरपुरा जागीर से जुड़े वितरण निगम के ओहदेदारों ने लाइन मरम्मत का जोखिम नहीं उठाया। जबकि, इसमें कोई संदेह नहीं कि प्रसारण एवं वितरण निगम आपसी सामंजस्य के बाद ही लाइनों की मरम्मत का कार्य करता है।
फॉल्ट का कट
बरसात के बीच कहीं इंसुलेटर फॉल्ट हो गया होगा। इसकी जानकारी लेता हूं। 132 केवीए वाली लाइन की मरम्मत के साथ क्षेत्र की 33/11 केवी लाइनों की मरम्मत नहीं हुई थी।
गौरव सुथार, कनिष्ठ अभियंता, अमरपुरा जागीर
Published on:
22 Jun 2019 06:00 am
