न्यायालय व परिवादी को आरोपी ने किया गुमराह, धोखाधड़ी में मामला दर्ज

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By: madhulika singh

Published: 04 Apr 2019, 04:36 PM IST

मोहम्मद इलियास/उदयपुर. फर्जी पासपोर्ट मामले में सुर्खियों में आए भरत शर्मा ने इस बार न्यायालय को गच्चा दे दिया। चेक अनादरण के मामले में उसे निचली अदालत से मिली एक वर्ष सजा के मामले में पेश अपील पर उसने लोक अदालत की भावना से एक बार अपर न्यायालय में समझौता कर परिवादी को नया चेक थमा दिया लेकिन यह चेक भी अनादरित हो गया। जबकि न्यायालय ने इसी चेक पेटे ही आरोपी को अधीनस्थ न्यायालय की ओर से दी गई एक वर्ष की सजा को अपास्त कर बरी किया था। दुबारा चेक अनादरण व न्यायालय को गुमराह करने के बाद परिवादी मगवास (झाड़ोल ) निवासी देवनारायण पुत्र पन्नालाल जोशी ने हिरणमगरी सेक्टर-14 निवासी भरत पुत्र पन्नालाल शर्मा व उसकी पत्नी शारदा शर्मा के खिलाफ न्यायालय में इस्तगासा पेश किया। न्यायालय ने पुलिस को धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने का आदेश दिया।

सजा की थी अपास्त
आरोपी भरत शर्मा से जान पहचान होने से परिवादी देवनारायण जोशी ने उसे 2.50 लाख रुपए उधार दिए थे। भुगतान पेटे चेक दिया, जो पर्याप्त राशि के अभाव में अनादरित हो गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट झाड़ोल ने आरोपी भरत शर्मा को दोषी मानते हुए एक वर्ष कैद व 2.80 लाख रुपए के अर्थदंड से दंडि़त किया। आरोपी ने निर्णय के खिलाफ डीजे में अपील की, जहां से यह प्रकरण अतिरिक्त सेशन न्यायाधीश न्यायालय उदयपुर पहुंचा। अपील से पहले ही आरोपी भरत शर्मा ने लोक अदालत की भावना से समझौता कर न्यायालय के समक्ष अपनी पत्नी शारदा शर्मा के नाम का 2.50 लाख का चेक दिया। न्यायालय ने समझौता व चेक पेटे अधीनस्थ न्यायालय की ओर से दी गई सजा अपास्त कर दी। परिवादी ने समझौते पेटे मिले चेक को बैंक में पेश किया तो वह चेक भी पर्याप्त राशि के अभाव में अनादरित हो गया, जबकि न्यायालय ने चेक देने के कारण आरोपी को दोषमुक्त किया था।

madhulika singh Reporting
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