
कपिल सोनी / गोगुन्दा. कोटड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में आवास योजना में अंधेरगर्दी का आलम है। ग्राम पंचायत ने योजना के तहत बिना जानकारी एक महिला के नाम आवास जारी कर राशि स्वीकृत कर दी। मौके से आवास बनाने के फोटो भी लगे व आवास की राशि दूसरी महिला के खाते में डाल राशि उठा ली गई। जब पीडि़ता ने आवेदन किया तो मामले का भंडाफोड़ हुआ।
कोटड़ा पंचायत समिति के उखलियात ग्राम पंचायत के पीपली खेड़ा निवासी चुनी भुरा गमेती के नाम ग्राम पंचायत ने 2014-015 में इन्दिरा आवास योजना में मकान स्वीकृत कर 70 हजार की राशि जारी की गई। योजना मे आवास फार्म मे चुनी के बीपीएल परिवार क्रमांक 52693054 व यूनिक आईडी नं 272600704503085700 दर्ज है। पहली किस्त के रूप मे 17500 रुपए मालवा का चौरा स्थित पीएनबी की शाखा में खाता संख्या 700295958 में 13 नंवबर, 2014 को डाले गए। यह खाता पीपली खेड़ा निवासी सुगना पत्नी सोहनलाल गमेती का है।
दूसरी किस्त के रूप में 42हजार व तीसरी किस्त के रूप में 10 हजार 500 रुपए इसी खाते में डाले गए व राशि उठा ली गई। पहली किस्त के बाद पंचायत ने फर्जी तरीके से दूसरे मकान व अन्य महिला को खड़ी कर फोटो भी फार्म में संलग्न किये व हेराफेरी कर आवास योजना की राशि उठा ली। योजना के तहत ग्राम पंचायत द्वारा पहली किस्त के बाद लाभार्थी के द्वारा बनाए गए ढांचे का निरीक्षण कर निर्माण के साथ लाभार्थी का फोटो आवश्यक होता है। पंचायत समिति में आवास योजना की जांच कर राशि खाते में हस्तांतरण की जाती है।
योजना के स्वीकृति फार्म में लाभार्थी के बीपीएल क्रमांक व यूनिक आईडी होने के बाद किसी तरह की गलती होना संभव नहीं है। पूरे मामले में पंचायत समिति व ग्राम पंचायत ने गड़बड़झाला कर आवास योजना में हेराफेरी की। कुछ दिनों पूर्व रणछाराम व चुनकी द्वारा पंचायत में आवास के लिए आवेदन करने पर उसके आवास होने जानकारी दी गई। जब रणछाराम ने जानकारी ली तो वर्ष 2014 में उसकी पत्नी के नाम आवास स्वीकृत होने व राशि उठाने का पता चला।
ग्राम पंचायत ने आवास योजना में हेराफेरी करने में व भविष्य में मामले की पोल खुलने के डर से स्वीकृति फार्म में चुनी पत्नी रणछाराम नहीं लिख कर उसके ससुर भूरा का नाम लिखा परन्तु यूनिक आईडी व बीपीएल परिवार क्रमांक चुनी का ही रखा। चुनी का परिवार बीपीएल है। 4 पुत्र व 1 पुत्री है। पक्की छत नहीं है। बीपीएल होने के बावजूद तीन वर्षों से राशन सामग्री नहीं दी जा रही है। कई बार कोटड़ा पंचायत समिति, ग्राम पंचायत, राशन डालर, रसद विभाग के चक्कर काटने के बावजूद सुनवाई नहीं हो पा रही है।
इनका कहना है
मुझे मामले की जानकारी नहीं है। अगर इस तरह की गड़बड़ी हुई है तो मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रतनसिंह भाटी, विकास अधिकारी, कोटड़ा
Published on:
28 Apr 2018 02:36 pm
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