
अदालती फैसले पर टिका रेजीडेंट अध्यक्ष का भविष्य
डॉ. सुशीलसिंह चौहान/ उदयपुर. रवींद्रनाथ टैगोर राजकीय आयुर्विज्ञान महाविद्यालय में रेजीडेंट अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर चिकित्सकों के बीच भीतरी राजनीति गरमा रही है। अदालत की शरण लेकर स्टे से अध्यक्ष पद संभालने वाले डॉ. बाबूलाल जाट की ओर से इस्तीफा देने के बाद से रिक्त पद को लेकर रेजीडेंट्स यूनियन गुटों में तब्दील हो रहा है। ऐसे में पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजवीरसिंह, जिन्होंने लिखित तौर पर पद से इस्तीफा नहीं दिया था, फिर से अध्यक्ष होने के दावे कर रहे हैं। दूसरी ओर महाविद्यालय प्रशासन नए अध्यक्ष को लेकर किसी भी प्रतिक्रिया को देने से बच रहा है। प्रशासनिक ओहदेदारों का मानना है कि अब अदालत तक पहुंच चुके मामले का निर्णय भी वहीं से ही होगा।
गौरतलब है कि जीबीएम (जनरल बॉडी मीटिंग) में अध्यक्ष चुने गए डॉ. बाबूलाल के विरोध को देखते हुए महाविद्यालय प्रशासन ने लिंगदोह कमेटी के तहत महाविद्यालय में अध्यक्ष सहित अन्य पदों को लेकर चुनाव कराए थे। इसके बाद डॉ. बाबूलाल ने अदालत स्टे लाकर मतगणना पर अग्रिम आदेश तक रोक लगवा दी थी।
94 फीसदी हुई वोटिंग
इधर, दो से तीन धड़ों में बंट चुके रेजीडेंट्स के बीच नए अध्यक्ष को लेकर कई बातें सामने आ रही हैं। एक पक्ष लिंगदोह कमेटी के तहत हुए चुनाव में 94 फीसदी वोटिंग को लेकर परिणामों के आने का इंतजार कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष अपने अध्यक्ष को लेकर फिर से जीबीएम कराने की तैयारी कर रहा है। तीसरे पक्ष के तौर पर पूर्व अध्यक्ष डॉ. राजवीर के समर्थक अदालती फैसला आने तक उन्हें फिर से नेतृत्व देने की मंशा जता रहा है। हकीकत यह भी है कि अध्यक्ष पद को लेकर यूनियन में सक्रिय रेजीडेंट के बीच बिखराव के हालात बन रहे हैं।
जिम्मेदारी संभालना भी टेड़ी खीर
हकीकत यह है कि लिंगदोह कमेटी के तहत हुए चुनाव की मतगणना से पहले डॉ. बाबूलाल ने अदालत की शरण में जाकर १२ सितम्बर को पदभार संभाला था। इसके बाद २० सितम्बर को ही उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर पद से इस्तीफा भी दे दिया। इससे पहले चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए डॉ. संजीव चौधरी, भानुप्रतापसिंह एवं हरिओम बैरवा ने भाग्य अजमाया था, जिनके परिणाम मतदान पेटियों में अदालती फैसले के इंतजार में बंद हैं। समस्या यह है भी चर्चा में है कि विवादित रहने वाले अध्यक्ष पद को संभालना किसके बूते में हैं।
अदालत तय करेगी राह
अध्यक्ष पद के विवाद को अदालत में चुनौती तत्कालीन अध्यक्ष ने दी थी। इसलिए फैसला भी अदालत से ही होगा। हमें अध्यक्ष पद के फैसले को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं है।
डॉ. डी.पी.सिंह, प्राचार्य, आरएनटी मेडिकल कॉलेज
मैं ही रहूंगा अध्यक्ष
मैंने पद से इस्तीफा नहीं दिया था। इस बीच डॉ. बाबूलाल ने पदभार छोड़ दिया। अदालती फैसला आने तक मैं ही अध्यक्ष पद की व्यवस्थाएं संभालने के लिए अधिकृत हूं। शायद ही इसमें किसी को आपत्ति हो।
डॉ. राजवीरसिंह, पूर्व अध्यक्ष, रेजीडेंट यूनियन
Published on:
22 Oct 2018 02:25 am
