4 सितंबर 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

यहां भी स्कूली बच्चों की जिंदगी पर ‘मौत का संकट

government school कानोड़ के राउमावि मालखेजड़ी, खेरवाड़ा की ग्राम पंचायत पहाड़ा का रामावि, मेनार के राउमावि व बालिका विद्यालय के हाल, राजकीय विद्यालयों को नहीं मिल रहा बजट, थोबावाड़ा के सरकारी विद्यालय में हुई मौतों से भी नहीं मिला सबक
3 min read
Google source verification
यहां भी स्कूली बच्चों की जिंदगी पर 'मौत का संकट

यहां भी स्कूली बच्चों की जिंदगी पर 'मौत का संकट

उदयपुर. government school खेरवाड़ा के थोबावाड़ा में राजकीय विद्यालय की दीवार ढहने से असमय काल का ग्रास बनी तीन मासूम जिंदगियों को लेकर प्रशासनिक अमला एकबारगी संजीदा होने का ढोंग भले ही करे, लेकिन धरातल पर समस्याएं अभी भी मुंह बाएं खड़ी हैं। अतिवृष्टि और नियमित बारिश, जिले के अन्य जर्जर विद्यालयों को नित चुनौती दे रही हैं। बावजूद इसके मासूमों के भविष्य को लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासनिक अधिकारी ऐहतियात नहीं बरत रहे हैं।
कानोड़. शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक भींडर ब्लॉक के 70 से अधिक राजकीय विद्यालय जर्जर अवस्था में हैं। इनमें सुधार के प्रस्ताव सरकार को भेजे जा चुके हैं। बावजूद इसके इन विद्यालयों में अध्यापक व विद्यार्थी जान को संकट में डालकर पढऩे और पढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। ऐसा ही हाल निकटवर्ती पीथलपुरा ग्राम पंचायत का राउप्रावि मालखेजड़ी के हैं। पूरा विद्यालय भवन जर्जर है। दीवारों में दरारें आ चुकी हैं। पानी के साथ दीवारों सेे रते व कंक्रीट जगह छोड़ रही है। ऐसा ही हाल पोषाहार कक्ष का है। डरी सहमी कुक-कम-हेल्पर प्रतिदिन पोषाहार बनाती हैं। सहमे हुआ स्टाफ बच्चों को बरामदे में बिठाकर अध्ययन करा रहा है। लेकिन बरामदा भी जर्जर हाल में लटक रहा है। विद्यालय स्टाफ की मानें तो मामले को लेकर विभाग व पंचायत को पत्र लिखकर अवगत कराया जा चुका है। मालखेजड़ी की संस्था प्रधान रंजना रानी ने बताया कि उनकी ओर से चेताने के बाद भी विभाग स्तर पर कदम नहीं उठाए गए। स्कूल भवन परिसर बच्चों के बैठने के लिहाज से असुरक्षित है। कार्यालय व स्टोर कक्ष तथा नीम के नीचे बच्चों को बिठाना मजबूरी है। इधर, भींडर सीबीइओ महेंद्र बड़ाला ने बताया कि 15 दिन पहले ही प्रस्ताव आगे भिजवाए हैं। बजट मिलते ही कार्य को प्राथमिकता दी जाएगी।

जर्जर हाल में पढ़ाना मजबूरी
भाणदा. एक ओर रैली एवं अन्य आयोजनों के माध्यम से जिले का शिक्षा विभाग ग्रामीण अभिभावकों को सरकारी विद्यालयों में भेजने के लिए रणनीति बना रहा है, लेकिन खामियों से होने वाली बच्चों की मौतों को लेकर विभाग के पास कोई कार्ययोजना नहीं है। खेरवाड़ा उपखण्ड के पहाड़ा रामावि के हाल भी बहुत चिंतनीय है। एसएमसी अध्यक्ष सतवीरसिंह चौहान ने बताया कि वहां कुल सात कमरे हैं। इनमें से चार कक्षाकक्षों को रमसा के सहायक अभियंता की ओर से अनुपयोगी घोषित किया जा चुका है। लेकिन, विद्यार्थियों की अधिक संख्या के बीच आज भी बच्चों को इन जर्जर कक्षाकक्षों में बिठाया जा रहा है। ऐसे में हर समय विद्यार्थियों की जान पर संकट के बादल मंडराते रहते हैं। कक्षा एक से 8वीं तक के बच्चों को बरामदे में बिठाकर स्टाफ उनकी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन गांवों के संघ अभियान में भी जर्जर हाल की जानकारी दी जा चुकी है। अब चिंतित अभिभावक खामियों के बीच असुरक्षित बच्चों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। दूसरी ओर रामावि पहाड़ा के कार्यवाहक संस्था प्रधान बाबूलाल ने बताया कि डीइओ ने बताया कि समस्या से जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया जा चुका है। सामूहिक कक्षाओं को देखकर कई बार ग्रामीण उन्हें खरी खोटी सुनाने से नहीं चूकते।

4 साल से भेज रहे प्रस्ताव
मेनार. स्थानीय राउमावि व राजकीय कन्या माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने आने वाले विद्यार्थियों के लिए भी लगातार हो रही बारिश नित नई चुनौती बन रही है। विभागीय लापरवाही के चलते जर्जर भवनों की टपकती छतों का उपचार नहीं कराया गया। इसके कारण विद्यार्थी तीन तरफ से टपकते पानी के बीच शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। राउमावि के 6 कमरों में छत टपक रही है। दूसरी ओर कन्या विद्यालय का प्लास्टर उखडऩें की समस्या निरंतर बनी हुई है। बता दें कि ये स्कूल करीब 55 साल पुरानी है। चूना पत्थर से निर्मित दीवारें अब जवाब देने लगी हैं। खास बात देखिए कि जोइनिंग के बाद 31 दिसम्बर को मेनार पक्षी दर्शन के लिए पहुंची कलक्टर ने ग्रामीणों की समस्या जानकर स्कूलों में टपकते पानी को लेकर उपखण्ड अधिकारियों को निर्देश दिए थे। लेकिन, 10 माह बाद भी हालात जस के तस हैं। हकीकत में कन्या विद्यालय ब्रह्म सागर तालाब के किनारे स्थित है। तालाब भरने के बाद विद्यालय पर तीन ओर से जल संकट बना हुआ है। विद्यालय के संस्था प्रधान प्रद्युम्न व्यास ने बताया कि विद्यालय की नींव में पानी भर चुका है। government school छत की समस्या को लेकर प्रस्ताव भेज चुके हैं।