
उदयपुर। रेलवे डिजिटलाइजेशन की ओर बढ़ रहा है। इसके चलते अजमेर मंडल ने भी अपने टीटीई को टीटीई हैंड हेल्ड टर्मिनल (एचएचटी) डिवाइस वितरित किए हैं। इससे चलती ट्रेन में बर्थ खाली होने पर भी वेटिंग में चल रहे यात्रियों को सीट मिलने में आसानी हो रही है। उदयपुर से प्रतिदिन करीब 26 ट्रेनों का आवागमन होता है। रेलवे स्टाफ में उदयपुर के 38 टीटीई है। इनमें से 20 के पास यह मशीन मौजूद है।
धीरे-धीरे सभी ट्रेनों के टीटीई का यह मशीन दी जाएगी। वहीं अन्य जगहों से लगने वाले टीटीई के पास भी यह मशीन उपलब्ध है। ऐसे में यहां से आवागमन करने वाली आधी से अधिक ट्रेनों में एचएचटी मशीन मौजूद है। इससे टीटीई पेपरलेस हो रहे हैं। हालांकि अभी भी उदयपुर के 18 टीटीई को इसकी जरूरत है। इसके जरिए खाली बर्थ की जानकारी ऑनलाइन सर्वर में पहुंचने लगी है। इससे वेटिंग के यात्रियों को बर्थ मिलने में आसानी हो रही है। चलती ट्रेन में अगर सीट खाली रहती है, तो टीटीई इसे पहले आरएसी और उसके बाद वेटिंग यात्रियों को दे सकता है।
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उदयपुर से चलने वाली ट्रेन के किसी कोच में अगर यात्री रिजर्वेशन कराता है और किसी कारण नहीं आता है। ऐसे में जब टीटीई ट्रेन के यात्रियों की जब जांच करता है उसी समय खाली सीट का इंद्राज मशीन में किया जाएगा। मशीन से ऑनलाइन यह सीट खाली होगी। ऐसे में अगले स्टेशन से वेटिंग वाले यात्री का टिकट चार्ट बनने के बाद भी कंफर्म हो जाएगा।
पुरानी पद्धती में ऐसे होता है काम
पुरानी पद्धती में टीटी अपने पास मौजूद चार्ट में यात्रियों की सीट देखकर टिक लगाते हैं। खाली सीट की जानकारी अगले स्टेशन पर पहुंचने के बाद विंडो पर दी जाती है। इसके बाद उस सीट को बुक किया जाता है। ऐसे में कई बार वेटिंग वाले यात्री को अंत समय पर पता चलता है कि उसकी सीट कंफर्म हो गई है।
Published on:
31 Dec 2022 08:09 pm
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