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#sehatsudharosarkar यहां रात को सोता मिला पन्नाधाय अस्पताल, गर्भवती और प्रसूताओं पर भारी गैर जिम्मेदाराना रवैया

वार्ड में सुस्ताते मिले चिकित्सक, गर्भवती और परिजन दिखे हैरान-परेशान

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pannadhaya hospital

उदयपुर . ‘जाके पैर न फटी बिवाई, वह क्या जाने पीर पराई’ की कहावत पन्नाधाय राजकीय महिला चिकित्सालय में चरितार्थ हो रही है। जहां चिकित्सकों का गैर जिम्मेदाराना रवैया गर्भवती और प्रसूताओं पर भारी पड़ रहा है। दर्द से कराहती गर्भवती महिलाओं के प्रति चिकित्सकों की कोताही कोढ़ में खाज का काम कर रही है। मरीज के परिजनों से मिल रही शिकायतों के बाद पत्रिका टीम ने जब रात 1.15 बजे चिकित्सालय के हालात देखे तो चौंकाने वाले हाल मिले। अस्पताल की सीढिय़ां चढ़ते ही डॉक्टर उनके कक्ष से गायब मिले। पर्ची लेकर मरीज भटकते दिखे तो परिजनों को उनकी परेशानी का जवाब सुरक्षा प्रहरी देते दिखे। भीतर वार्ड में चिकित्सक मिल भी गए तो जरूरतमंद को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना काउंटर पर कोई फाइल बनाने वाला नहीं मिला। थक-हारकर मरीज को वार्ड एक में भर्ती कर दिया गया। दूसरी ओर वार्ड नंबर 11 में भर्ती प्रसूताओं के परिजनों को प्रसूता की वस्तुस्थिति बताने से भी चिकित्सक बचते रहे। मजबूर परिजन जैसे-तैसे रात गुजारने और सुबह विशेषज्ञों के वार्ड में आने की राह तकते रहे। काफी पड़ताल के बाद रात करीब 3 बजे चिकित्सक एवं रेजीडेंट वार्ड के बंद कमरों में सुस्ताते दिखे। केवल पर्ची काउंटर पर बैठा नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी को लेकर सजग दिखा।

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लाइट चालू, पंखे बंद
पत्रिका टीम ने रात करीब 1.15 बजे अस्पताल में प्रवेश किया। पर्ची काउंटर पर नर्सिंग स्टाफ जगता मिला। लोगों को यहां से जवाब मिलता रहा, लेकिन ग्रामीण परिवेश वाले व्यक्ति को सही जवाब नहीं मिले। पर्ची लेकर भीतर जाने पर पता चला कि ओपीडी चिकित्सक कक्ष में कोई मौजूद नहीं है। कक्ष में ट्यूबलाइटें जलती मिली, जबकि चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ मौके से नदारद मिला। करीब एक घंटे बाद एक बंद कमरे में चिकित्सकों के सोने की पुष्टि हुई। इसी तरह लाभार्थी परिवारों को भामाशाह काउंटर पर कोई स्वास्थ्य मार्गदर्शक नहीं मिला। किराए के भामाशाह (बीपीएल) काउंटर पर नर्सिंंग स्टाफ फाइल नहीं बनने की जानकारी देता दिखा। इस बीच परिजन वार्ड नंबर एक में सीधे पहुंचे, जहां मौजूद महिला डॉक्टर ने पर्ची लिखकर उसकी जिम्मेदारी पूरी की।


नहीं मिला चिकित्सक का जवाब
दोपहर में क्लाउड वार्ड संख्या 9 में प्राथमिक उपचार के बाद लौटी गर्भवती दीप्ति गांधी को प्रसव लक्षणों के बीच परिजनों ने रात करीब 9 बजे एक बार फिर वार्ड 11 में भर्ती कराया। वार्ड में भर्ती गर्भवती की उपचार प्रक्रिया एवं लक्षणों को जानने के लिए परिजन चिकित्सकों से गुहार लगाते रहे। लेकिन, ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक परिजनों को कुछ भी बोलने से इनकार करते रहे। डॉक्टर्स की चुप्पी से परिजन पूरी रात परेशान रहे। सुबह करीब 7 बजे युवती ने दो जुड़वा बच्चों को जन्म दिया। यहां भी मशीनरी खामी ने प्रसूता को परेशान दिया। गर्भ में जिंदा बच्चे को अनुभवी चिकित्सकों ने सोनोग्राफी में मृत घोषित कर दिया। ये तो भगवान का शुक्र था कि दर्द के बाद गर्भवती ने सुरक्षित नवजात को जन्म दिया।

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नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी
ओपीडी कक्ष में चिकित्सक के साथ नर्सिंग कर्मचारी भी रहते हैं। चिकित्सक एवं रेजीडेंट
को सुबह 7 बजे फिर ड्यूटी पर आना होता है। इसलिए उन्हें सोने की अनुमति दी हुई है। नर्सिंग स्टाफ की शिफ्ट सुबह बदलती है। उन्हें जगने के साथ रोगी हित में चिकित्सक को जगाने की जिम्मेदारी है। फिर भी व्यवस्था सुधार के प्रयास होंगे।
डॉ. सुनीता माहेश्वरी, अधीक्षक, पन्नाधाय महिला चिकित्सालय