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उदयपुर : साइलेंट डिजीज’ से चुनौतीः टीका भी, 1.20 लाख जांचें भी… फिर भी मिले 1400 से अधिक मरीज

जैसी ‘साइलेंट डिजीज’ से लड़ाई तेज हुई है, जहां 1.20 लाख से अधिक जांचों के बावजूद 1400 से ज्यादा मरीज सामने आए हैं।
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टीका

उदयपुर. 'हेपेटाइटिस: आइए बाधाएं तोड़ें' के विश्व स्वास्थ्य संगठन के आह्वान के बीच उदयपुर जिले में इस जानलेवा रोग के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की मुस्तैदी रंग ला रही है। राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत गांव से लेकर शहर तक जांच, टीकाकरण और उपचार का दायरा बढ़ा है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय के वर्ष 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि 2,000 हेपेटाइटिस-बी और 15,544 हेपेटाइटिस-सी रैपिड टेस्ट कर मरीजों की समय पर पहचान की गई, जबकि उच्च जोखिम वाले 50 नवजात को हेपेटाइटिस-बी इम्यूनोग्लोब्युलिन देकर सुरक्षित किया गया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर आरएनटी मेडिकल कॉलेज तक स्क्रीनिंग की बढ़ती संख्या के बावजूद नए संक्रमितों का सामने आना चिंताजनक है, जिसे देखते हुए विशेषज्ञ समय पर जांच और जागरूकता को ही इस 'साइलेंटकिलर' से बचाव की सबसे मजबूत ढाल बता रहे हैं।

संभाग का सबसे बड़ा रेफरल सेंटर आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल वायरल हेपेटाइटिस के उपचार और स्क्रीनिंग का प्रमुख केंद्र बन चुका है। अप्रेल 2025 से मार्च 2026 के बीच यहां 91,134 लोगों की हेपेटाइटिस-बी स्क्रीनिंग की गई। इनमें 1,101 मरीज संक्रमित पाए गए। संक्रमितों में से 81 मरीजों का उपचार शुरू किया गया, जबकि जून 2026 तक 271 मरीज उपचाररत रहे। इसी अवधि में 1,03,066 लोगों की हेपेटाइटिस-सी जांच की गई। इनमें 336 मरीजों की आरएनए जांच पॉजिटिव आई और 24 मरीजों का उपचार शुरू किया गया। संक्रमण की रोकथाम के लिए अस्पताल में 1,192 स्वास्थ्यकर्मियों का हेपेटाइटिस-बी टीकाकरण भी किया गया, जबकि 156 नवजातों को जन्म के बाद हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन के साथ एचबीआइजी दिया गया।

रोकथाम-उपचार का ऐसा मॉडल

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की जन आरोग्य लिवर क्लीनिक की पहल वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण को नई दिशा दे रही है। वहां केवल मरीजों का इलाज ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों की स्क्रीनिंग, जोखिम वाले लोगों की पहचान, टीकाकरण, नियमित फॉलो-अप और जनजागरूकता गतिविधियों पर भी फोकस किया जा रहा है। ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में शिविरों के जरिये लोगों को समय पर जांच कराने और संक्रमण से बचाव के उपायों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

एक बार जांच जरूर करवाएं

सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के अधीक्षक एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन माथुर के अनुसार हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी को 'साइलेंटडिजीज' कहा जाता है, क्योंकि अधिकांश मरीजों में शुरुआती वर्षों तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई बार बीमारी का पता तब चलता है, जब लिवर गंभीर रूप से प्रभावित हो चुका होता है। ऐसे में प्रत्येक वयस्क को जीवन में कम-से-कम एक बार हेपेटाइटिस-बी की जांच करानी चाहिए। वहीं प्रत्येक नवजात को जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका और आवश्यकता होने पर एचबीआइजी देना संक्रमण की रोकथाम का प्रभावी उपाय माना जाता है।

ये भी जानें

- हेपेटाइटिस-बी का टीका 95 प्रतिशत से अधिक सुरक्षा प्रदान करता है।

- जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाया टीका संक्रमण का खतरा काफी कम कर देता है।

- हेपेटाइटिस-सी का आधुनिक दवाओं से सफल उपचार संभव है।

- जांच, टीकाकरण और उपचार से वर्ष 2030 तक वायरल हेपेटाइटिस उन्मूलन की दिशा में तेजी लाई जा सकती है।