
जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति
उदयपुर. शहर की झीलों के संरक्षण, उनके वैज्ञानिक तथा तकनीकी प्रबंधन की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति और उदयपुर विकास प्राधिकरण ने झीलों में नौकायन, जेट्टी संचालन और झील संसाधन प्रबंधन के लिए नई नीति का ड्राफ्ट तैयार कर सार्वजनिक कर दिया है। अब इस ड्राफ्ट पर 15 दिन तक आमजन, पर्यावरणविदों, पर्यटन विशेषज्ञों, नौकायन व्यवसायियों और सामाजिक संगठनों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई हैं। सुझावों की समीक्षा के बाद ही अंतिम नियम लागू किए जाएंगे।
नई नीति का उद्देश्य केवल नौकायन को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि झीलों की पर्यावरणीय क्षमता, सुरक्षा, पर्यटन, स्थानीय रोजगार और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करना है। फिलहाल नई नीति लागू होने तक वर्तमान व्यवस्था के तहत ही नौकाओं के अनुबंधों का नवीनीकरण जारी रहेगा।
अब झील जितनी क्षमता, उतनी ही नावें
जिला कलक्टर एवं जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति के अध्यक्ष गौरव अग्रवाल की अध्यक्षता में बैठक में झीलों के भविष्य को लेकर चर्चा हुई। बैठक में पर्यटन, जल संसाधन, मत्स्य, परिवहन, प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर निगम, यूडीए सहित कई विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। ड्राफ्ट नीति में पहली बार झीलों की वहन क्षमता के अनुसार नौकाओं के संचालन का प्रावधान किया गया है। इसके तहत प्रत्येक झील में कितनी नावें सुरक्षित रूप से संचालित हो सकती हैं, इसका वैज्ञानिक व तकनीकी निर्धारण किया जाएगा। साथ ही पैसेंजर कैपेसिटी यूनिट तय कर नौकायन गतिविधियों को नियंत्रित किया जाएगा।
नावों से लेकर जेट्टी तक बदलेंगे नियम
प्रस्तावित नियमों में नावों के संचालन की अनुमति, जेट्टी संचालन, सुरक्षा मानकों, पर्यावरण संरक्षण, झील संसाधनों के उपयोग और संचालन की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इससे झीलों पर बढ़ते पर्यटन दबाव को नियंत्रित करने के साथ अव्यवस्थित नौकायन और पर्यावरणीय नुकसान को भी रोका जा सकेगा। बैठक में पिछोला सहित अन्य झीलों में संचालित नौकाओं के अनुबंधों की समीक्षा भी हुई। जिला कलक्टर ने अधिकारियों को झीलों की वास्तविक क्षमता, वर्तमान में संचालित नौकाओं की संख्या तथा पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों का अध्ययन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जनता की राय से बनेगी अंतिम नीति
नगर निगम आयुक्त एवं समिति के सदस्य सचिव अभिषेक खन्ना ने बताया कि ड्राफ्ट नीति को अंतिम रूप देने से पहले जनभागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया गया है। कोई भी नागरिक, पर्यावरणविद, पर्यटन व्यवसायी, नाव संचालक या संस्था 15 दिन के भीतर अपने सुझाव एवं आपत्तियां जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति, नगर निगम पर भेज सकती है। ड्राफ्ट नियम नगर निगम कार्यालय के अलावा यूडीए और नगर निगम की वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं।
प्राधिकरण करेगा अंतिम निर्णय
सदस्य सचिव जिला झील संरक्षण एवं विकास समिति एवं नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि झील संरक्षण नियमों के प्रारूप पर आगामी 15 दिनों तक प्राप्त होने वाले सुझावों एवं आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। उपयोगी एवं महत्वपूर्ण सुझावों को शामिल करते हुए नियमों का संशोधित प्रारूप तैयार किया जाएगा। इसके बाद यह संशोधित ड्राफ्ट स्वायत्त शासन विभाग के अंतर्गत राजस्थान झील विकास प्राधिकरण को अनुमोदन एवं अंतिम निर्णय के लिए भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि झील संरक्षण नियमों को लेकर अंतिम निर्णय राजस्थान झील विकास प्राधिकरण ही करेगा।
Updated on:
28 Jul 2026 06:24 pm
Published on:
28 Jul 2026 06:24 pm
