बालिका का हो बेहतर उपचार, कभी तो 'भगवान सुने पुकार

बालिका का हो बेहतर उपचार, कभी तो 'भगवान सुने पुकार
बालिका का हो बेहतर उपचार, कभी तो 'भगवान सुने पुकार

Sushil Kumar Singh Chauhan | Updated: 13 Oct 2019, 06:00:00 AM (IST) Udaipur, Udaipur, Rajasthan, India

human story मानसिक विक्षिप्त बालिका के साथ अनहोनी की आशंका से चिंतित आम, मानसिक रोगी बेटी का ध्यान रखने में अक्षम माता-पिता

उदयपुर/ भाणदा. human story उसे न खाने की चिंता है और न ही जीने के लिए पानी चाहिए। उसे न मौत का अंदेशा है और न रात का भय। दुनिया से अनजान वह अबोध तो बस दो पैरों के सहारे गुमनाम गलियों में चलती रहती है। उसे ही नहीं पता कि वह कहां को निकली है। कहां का जाना है। कोई मिल गया तो ठीक। नहीं तो वह उसकी मस्ती में कई किलोमीटर का सफर पार कर जाती है। ये कहानी है खेरवाड़ा उपखण्ड की ग्राम पंचायत डेरी के गोविंददेव गांव निवासी मनीषा (१५) गरासिया की। फौज से सेवानिवृत्त शंकरलाल गरासिया पर दूसरे बेटे बेटियों के साथ परिवार के भरण पोषण का इतना दबाव है कि वह मनीषा की खोज खबर ले ही नहीं पाते। वहीं शंकरलाल की पत्नी भी मानसिक रोग से जूझ रही है, जिसे खुद की सुध नहीं रहती है। ऐसे में मनीषा अक्सर रात के समय घर से बाहर निकल जाती है। भूखी-प्यासी वह इधर-उधर भटकती रहती है। क्षेत्र के कुछ सभ्य लोगों को उसके साथ अनहोनी की आशंका सताने लगी है। रात के अंधेरे में उसे घूमता देख कई बार लोग चिंतित हो उठते हैं। करणी सेना ब्लॉक खेरवाड़ा के अध्यक्ष सतवीरसिंह चौहान ने बताया कि वह खुद भी कई बार मनीषा को उसके घर तक छोड़कर आए हैं। कई बार रात में घूमता पुलिस का गश्ती दल भी मनीषा को उसके घर तक छोडऩे गया है। लेकिन, बीमारी के चलते दुनियादारी से बेखबर मनीषा को हर दिन संभालने वाला मिल जाए ऐसा भी जरूरी नहीं है। रात के समय गांवों में कुछ असामाजिक लोगों की मौजूदगी भी मनीषा के लिए चिंता की वजह बनी हुई है।

कोई ऐसा मिल जाए 'भगवान
स्थानीय सभ्य समाज के चिंतित लोग मनीषा के लिए दुआ करते है कि कोई ऐसा व्यक्ति मिल जाए जो उसका स्थायी उपचार करा सके। भगवान की मेहर से उसकी सुध-बुध वापस आ जाए। लोगों ने बताया कि मनीषा को किसी प्रकार की योजना का भी लाभ नहींं मिल रहा है। human story न ही बाल संरक्षण आयोग और एनजीओ की ओर से मनीषा के सहयोग को लेकर कोई पहल हुई है।

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