
बुलंद हौसलों के दम पर पाया सपनों का मुकाम
उदयपुर. परसाद . Inteligent And Brave Girl Of Mewar Story लोग भले ही खुद को विकसित मान लें, लेकिन समाज का एक तबका आज भी बेटियों को अभिशाप ही मानता है। एेसे में उन्हें दहेज प्रथा, शारीरिक शोषण, अधिकारों में भेदभाव जैसी अनेक सामाजिक कुरीतियों और अव्यवस्थाओं से दो-चार होना पड़ता है। हालांकि, कुछ जगह स्थितियां अलग हुई हैं तो कहीं आज भी हालात बदतर बने हुए हैं। बदलाव के इस दौर में एेसी बेटियां भी मिसाल बनी हैं जो अपने बुलंद हौसलों के बूते जमाने से लड़कर औरों के लिए प्रेरक बनी हैं। हम बात कर रहे हैं वेगड़ा कलाल समाज की बेटी भूमिका की। जिसने तकरीबन तीन साल अपने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के दम पर एक अलहदा मुकाम हासिल किया। अखिल भारतीय वेगड़ा कलाल समाज की ये बेटी मूलत: सराड़ा गांव की है, लेकिन रोजगार की तलाश में परिवार उदयपुर शिफ्ट हो गया। वहीं भूमिका के पिता पन्नालाल ने अनाज पीसने की चक्की डालकर परिवार पालने सहित बच्चों का अच्छी शिक्षा देने का संकल्प लिया। इसी क्रम में भूमिका ने 2017 में 12 बोर्ड परीक्षा साईंस बायो में 96 प्रतिशत से उत्तीर्ण की। इसी दौरान उसने मेडिकल की तैयारी शुरू कर दी और नीट प्रतियोगी परीक्षा में क्वालिफाई भी कर लिया, लेकिन पेमेन्ट सीट मिलने से वह एमबीबीएस में प्रवेश नहीं ले सकी। बाद में फिर भूमिका ने 2018 में भी नीट एग्जाम दिया। इस बार भी क्वालिफाई होने के बावजूद फ्री सीट नहीं मिलने से एमबीबीएस प्रवेश से वंचित रह गई। इधर, भूमिका के माता-पिता ने उसे जीएनएम नर्सिंग करने की सलाह दी। इस पर भूमिका ने 2019 के लिए नीट की तैयारी का एक साल और मांग लिया और कमर कसकर तैयारी शुरू कर दी। आखिर मेहनत और बुलंद इरादों ने रंग दिखाया और भूमिका ने 98.99 प्रतिशत से डॉक्टर बनने के सपने को साकार करते अन्य पिछड़ा वर्ग से नि:शुल्क कोटे की सीट प्राप्त कर ली। गुरु बना सारथी, लंबी कानूनी लड़ाई से जीत दिलाई असल परीक्षा तो तब शुरू हुई जब काउंसलिंग के दौरान ओबीसी का सर्टिफिकेट 6 माह से पुराना नहीं होने का हवाला देकर भूमिका का प्रवेश निरस्त कर दिया गया। एेसे में एक बार तो भूमिका अवसाद ग्रसित हो गई। उसकी दशा देखकर परिजन भी एक बारगी चिंतित हो गए। इसी स्थिति में मोहल्ले में रहने वाले सजातीय अध्यापक भैरूलाल कलाल को जब इस बात की जानकारी मिली तब उन्होंने भूमिका को सकारात्मक सोचने के लिए मानसिक रूप से तैयार किया और अपने कानूनी लडाई लडऩे की ठान ली। वे विद्यालय से छुट्टी लेकर जोधपुर निकल पड़े और कानूनी रायशुमारी के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में एम्स के खिलाफ मुकदमा ठोक दिया। दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद फैसला भूमिका कलाल के पक्ष में आया, लेकिन दुखों का अंत अभी हुआ नहीं था। हाईकोर्ट के फैसले को नकारते हुए अगले ही दिन एम्स ने सुप्रीम कोर्ट में अपना तर्क देते हुए हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील कर दी। आखिर गुरु-शिष्या के धैर्य और लम्बी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट का फैसला भूमिका के हक में आया और उसे रायपुर एम्स से डॉक्टर बनने के लिए नि:शुल्क कोटे से प्रवेश मिल गया। साथ ही एम्स रायपुर में हॉस्टल व्यवस्था भी फ्री ऑफ कॉस्ट कर दी गई। Inteligent And Brave Girl Of Mewar Story
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इनका कहना है..१. एम्स के रवैये से ऐसा लगा कि भूमिका कभी डॉक्टर नहीं बन पाएगी, लेकिन लोकतन्त्र पर विश्वास और न्यायिक प्रक्रिया भूमिका के पक्ष में जाने से आखिर भूमिका का सपना साकार हुआ। - भैरूलाल कलाल, अध्यापक, राजकीय प्राथमिक विद्यालय, सुरपलाया। Inteligent And Brave Girl Of Mewar Story
२. समाज की पहली बेटी पर डॉक्टर बनने जा रही है। एेसे में हर समाजजन को बेटी भूमिका पर अभिमान है। - चुन्नीलाल कलाल, युवा अध्यक्ष, अखिल भारतीय वेगड़ा कलाल समाज।
Published on:
11 Dec 2019 01:00 pm
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